जज साहब मैं जिंदा हूं...मेरा मर्डर नहीं हुआ, मासूम ने जब सुप्रीम कोर्ट में दी गवाही, जानें क्या है केस?

सुप्रीम कोर्ट से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां पीलीभीत का रहने वाला एक 11 वर्षीय लड़का अपने ही मर्डर केस की सुनवाई के दौरान जिंदा होने की गवाही देने पहुंचा। जिसने भी ये सुना वह दंग रहे गया।

लड़के सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ के सामने पेश हुआ और न्यायाधीशों को बताया कि उसकी 'हत्या' के मामले की सुनवाई हो रही है। लड़के ने दावा किया कि उसके पिता ने उसके नाना और मामा को उसकी हत्या के मामले में झूठा फंसाया था। कोर्ट ने केस के खिलाफ आरोपियों की दाखिल याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस मामले में जनवरी से सुनवाई होगी।

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याचिका स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "अगले आदेश तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। अदालत ने यूपी सरकार, पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक और न्यूरिया पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अधिकारी को भी नोटिस जारी किया है।

'टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस केस से जुड़ी घटनाओं का सिलसिलेवार ढंग से खुलासा करते उनके वकील कुलदीप जौहरी ने बताया कि बच्‍चा को क्‍यों यह साबित करने के लिए अदालत में जाना पड़ा कि वह मरा नहीं है। उन्‍होंने बताया कि बच्‍चा फरवरी 2013 से अपने नाना, जो कि एक किसान हैं के साथ रह रहा था। उसकी मां को पिता ने बेरहमी से पीटा था। आरोप है कि वह परिवार से अधिक दहेज चाहता था।

पीड़ितों के वकील ने बताया कि, बच्‍चे की मां पिता द्वारा पीटे जाने के चलते बुरी तरह घायल हो गई थीं। फरवरी 2010 में उनकी शादी हुई थी। सिर्फ तीन साल बाद मार्च 2013 में पिटाई के कारण वह घायल हुईं और उनकी मौत हो गई। मौत के बाद नाना ने अपने दामाद के खिलाफ आईपीसी की धारा 304-बी (दहेज हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी।

इसके बाद लड़के का पिता अपने बेटे की कस्‍टडी की मांग की थी। जिसे लोगों दोनों पक्षों के बीच केस चल रहा है। 2023 की शुरुआत में लड़के के पिता ने अपने ससुर और उनके चार बेटों पर अपने बच्‍चे की हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने उन पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 504 (जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के आरोपों के तहत केस दर्ज कर लिया।

वकील कुलदीप जौहरी ने बताया कि, उनके क्लाइंट ने एफआईआर को रद्द करने के लिए पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। जिसके बाद उन्हें अपने बच्‍चे के जीवित होने के सबूत के तौर पर उसके साथ सुप्रीम कोर्ट में आना पड़ा। कोर्ट ने जजों के सामने बच्चे ने कहा कि, मेरा मर्डर नहीं हुआ है, मैं जिंदा हूं। अब इस मामले की सुनवाई अगले साल जनवरी में होगी। तब तक कोर्ट ने पीड़ितों के खिलाफ किसी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है।

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