हवस और हैवानियत: नशे में आदिवासी लड़कियों से मुज़रा करवाता है हॉस्टल सुपरिटेंडेंट का पति

भोपाल। हवस और हैवानियत इंसानी फितरत का एक ऐसा काला पन्ना है जिस पर लिखी इबारत हर पल करिश्माई अंदाज में बदलती है। कभी बर्बादी की शक्ल में तो कभी खून के छींटों में, कभी बेशर्मी में तो कभी अश्कों और आंहों में। अब इसी इंसानी फितरत ने हैवानियत की एक ऐसी तस्वीर दिखाई है जो ना मालूम कब से एक पिंजरे में कैद थी। इस शर्मनाक करतूत को सुनकर आपको अपने कान पर ही भरोसा नहीं होगा। जी हां हम बात कर रहे हैं आजाद हिंदूस्‍तान के सबसे खौफनाक हॉस्‍टल और आजाद हिंदूस्‍तान के सबसे बदनसीब लड़कियों की।

Husband of girls hostel superintendents ask girls to dance after drinking
मासूम बच्चियों की आंखों में कल तक के सुनहरे भविष्‍य का सपना लेकर मां-बाप ने अपने जिगर के टुकड़ों को सरकारी हॉस्‍टल में पढ़ाई के लिए भेजा था। मगर वक्‍त का खेल देखिए पढ़ाई तो दूर वो बच्चियां इन दिनों ठीक से सो नहीं पा रही हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इन मासूम बच्चियों को आधी रात को आंख में आंसू लिए मुज़रा करने को मजबूर किया जाता है। मामला सुशासन का दावा करने वाले शिवराज सिंह चौहान के मध्‍य प्रदेश की है। यहां के सिवनी जिले के गंगाटोला में स्थि‍त एक आदिवासी गर्ल्‍स हॉस्‍टल के सुपरिटेंडेंट का पति रात के अंधेरे में बच्चियों से डांस करवाता है।

वह भी तब जब वह बुरी तरह नशे में होता है। इसके आलावा ये भी आरोप है कि बच्चियों को ढंग का खाना भी नहीं मिलता है और ना ही बीमार होने पर इलाज करवाया जाता है। हॉस्‍टल की लड़कियों ने बताया कि 'मैडम जी के पति आते हैं दारू पीकर और हमको नाचने को बोलते हैं। खाना भी अच्छा नहीं मिलता। ऐसा नहीं है कि बच्चियों के माता-पिता जब इस बारे में नहीं जानते और इस ओर प्रशासन का दरवाजा नहीं खटखटाया गया। बताया जाता है कि मामले में जिले के कलेक्टर तक आवेदन दिया गया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ और हाथ नहीं लगा। दूसरी तरफ हॉस्टल सुपरिटेंडेंट गीता ने पूरे घटनाक्रम से अनजान बनते हुए कहा कि इस चीज की जानकारी एक तो आप लोगों ने मुझे बताई और इसके पहले सर लोग आए थे तो उन्होंने मुझे बताया।

न्‍यूज चैनल आजतक पर गीता ने कहा कि ऐसी कोई बात होती तो यहां चपरासी है वो सबसे पहले मुझे बताते। हमारे हॉस्टल में इतना विद्रोह है कि अगर किसी बच्ची की तबीयत खराब हो जाती है तो पूरे पालक शिक्षक संघ में हल्ला हो जाता है। दस बार बैठक हो जाती है। इस चीज की हमें बिल्कुल जानकारी नहीं है। अभी पहली बार मुझे पता चला कि ऐसी शिकायत हुई है। मेरे पति पुलिस विभाग में हैं जबलपुर में, जब कभी उनकी शासकीय छुट्टी होती है तब वो मेरे पास यहां आते हैं और आएंगे एक दिन के लिए तो बच्चों से मिलेंगे, मुझ से मिलेंगे। उनके पास इतना फालतू टाइम नहीं कि वो बंद कैंपस में किसी लड़की को नचाने लगे या कोई अभद्रता करें, क्योंकि चारों तरफ से उनके ऊपर निगरानी रहती है।

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