हुर्रियत और अलगाववादी की पसंद नरेंद्र मोदी

farook modi
जम्‍मू। सुनकर थोड़ी हैरानी होगी, लेकिन यह सच है कि नरेंद्र मोदी अब हुर्रियत और दूसरे अलगाववादी नेताओं को भी पसंद आने लगे हैं। हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं का कहना है कि बीजेपी जरूर एक मुसलमान विराधी पार्टी है लेकिन पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार नरेंद्र मोदी ही एकमात्र नेता हैं जो कश्‍मीर और कश्‍मीरियों की भलाई के लिए सोच सकते हैं।

इसके अलावा मोदी बाकी दूसरे नेताओं की तुलना में यहां की आंतरिक और बाहरी परेशानियों को भी दूर करने की क्षमता रखते हैं। गौरतलब है कि कश्‍मीर में इससे पहले पीपुल्‍स ड्रेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी मोदी की तारीफ कर चुकी हैं।

हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक ने कहा है कि बीजेपी देश की ऐसी पार्टी है जिसका नजरिया हमेशा से ही कश्‍मीर पर काफी स्‍पष्‍ट रहा है। साथ ही पार्टी के भीतर यहां की परेशानियों को दूर करने की एक राजनीतिक सोच भी नजर आती है। एक मीडिया रिपोर्ट में मीरवाइज ने मोदी के लिए यह ख्‍याल जारी किए हैं।

मीरवाइज , मोदी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेई की तारीफ करने से भी नहीं चूके। उन्‍होंने कहा कि केंद्र में राज कर रही कांग्रेस पार्टी की वजह से कश्‍मीर में हालात एक दशक पहले वाले दौर में वापस लौट गए हैं।

मीरवाइज के मुताबिक वाजपेई की अगुवाई वाली एनडीए सरकार की ओर से कश्‍मीर घाटी में जारी तनाव को कम करने के लिए कई महत्‍तवूर्ण कार्य किए गए थे।

उन्‍होंने कहा कि जिस समय वाजपेई देश के प्रधानमंत्री थे उस समय कश्‍मीर के मुद्दों को मानवाधिकारों से जुडे़ मुद्दों के तौर पर देखने और मानवीयता के आ धार पर इन्‍हें सुलझाने का फैसला लिया गया था।

दूसरी ओर महबूबा मुफ्ती की मानें तो कश्‍मीर में रहने वाला एक समूह आज भी मानता है कि प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी उनके लिए बेहतर निर्णय ले सकते हैं। साथ ही मोदी, वाजपेई की राह पर चलते हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए यहां के लोगों को शामिल कर कड़े कदम भी उठाने की ताकत रखते हैं।

हालांकि मुफ्ती ने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि चुनावों के बाद उनकी पार्टी बीजेपी के साथ किसी तरह का गठबंधन कर सकती है।

न सिर्फ मीरवाइज और मुफ्ती बल्कि यहां मौजूद कई राजनीतिक विश्‍लेषक मानते हैं कि अगर एनडीए को चुनावों में बहुमत हासिल होता है तो फिर एकबार फिर से कश्‍मीर मुद्दे को सुलझाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

घाटी के मशहूर अलगाववादी नेता नयीम खान कहते हैं बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार कश्‍मीरियों और कश्‍मीर की समस्‍या को करीब से समझ सकती है।

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खान के मुताबिक कई वर्षों के बाद वाजपेई देश के प्रधानमंत्री बने थे तो काफी समय के बाद देश को एक ऐसा नेता मिला था जिसने कश्‍मीर और पाकिस्‍तान के बीच जारी समस्‍याओं को स्थिर करने की कोशिशें की थीं।

ऐसे में जम्‍मू एवं कश्‍मीर के लोगों को मोदी से काफी उम्‍मीदें हैं कि वह यहां की समस्‍याओं और मुद्दों को समझने के साथ उन्‍हें सुलझाने में कई प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे।

न सिर्फ मशहूर लोग बल्कि कश्‍मीर में रहने वाली आम जनता भी मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहती है। एक टैक्‍सी ड्राइवर मोहम्‍मद युसूफ की मानें तो मोदी को भले ही क म्‍यूनल नेता करार दिया जाता हो

लेकिन वह घाटी में सुकून और शांति ला सकते हैं। युसूफ के मुताबिक यहां पर अमन-चैन काफी जरूरी है क्‍योंकि बाकी शहरों की ही तरह कश्‍मीर भी देश का एक अभिन्‍न हिस्‍सा है।

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