ब्रह्मांड में लगातार आ रही थी 'गुनगुनाने की आवाज', भारतीय वैज्ञानिकों ने खोल दिया राज
ब्रह्मांड अपने आप में बहुत से राज समेटे हुए है। वहां काफी वक्त से गुनगुनाने की आवाजें आ रही थीं। इसकी जांच के लिए भारत समेत कई देशों के वैज्ञानिक एकजुट हुए और एक टीम बनाई गई। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद इस रहस्यमयी आवाज की सच्चाई पता लगा ली है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ये गूंजने वाली आवाज गुरुत्वाकर्षण तरंगों से आ रही थी। ये काफी वक्त से सुनी जा रही थी। इसकी चर्चा अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी की थी, लेकिन उस जमाने में उतने हाईटेक उपकरण नहीं थे, ऐसे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। अब वैज्ञानिकों की टीम ने दुनिया के 6 ताकतवर रेडियो टेलिस्कोप की मदद से सारा मामला सुलझा दिया है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैदराबाद (आईआईटीएच) के शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत, जापान और यूरोप की टीम ने गहरे अंतरिक्ष से आने वाले कंपनों को सुनने के लिए भारत के सबसे बड़े टेलीस्कोप यूजीएमआरटी का उपयोग किया। जिससे पता चला कि ये गुरुत्वाकर्षण तरंगें हमारे शुरुआती ब्रह्मांड में विशालकाय ब्लैक होल के विलय से पैदा हुईं।
खगोलशास्त्री इन कंपनों को नैनो-हर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगें कहते हैं क्योंकि इनकी तरंग दैर्ध्य कई लाख करोड़ किलोमीटर हो सकती है। मामले में आईआईटीएच के प्रोफेसर शांतनु देसाई ने कहा कि मुझे खुशी है कि भौतिकी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग दोनों के आईआईटीएच छात्र इस ऐतिहासिक खोज का हिस्सा बन सकते हैं। इस रिसर्च से जुड़ा सारी जानकारी 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' में इस महीने पब्लिश की गई है।
ब्लैक होल की भी जानकारी मिलेगी
रिसर्च पेपर के मुताबिक इन गुरुत्वाकर्षण तरंगों के बारे में सबसे पहले बात 1916 में आइंस्टीन ने की थी। अब इन तरंगों को लो-पिच पर सुना जा सका। जांच में पता चला कि ब्लैक होल्स के विलय के वक्त ये पैदा हुई थीं। इससे ब्लैक होल से जुड़ी काफी अहम जानकारियां मिलेंगी।
इस खोज को 2002 में शुरू किया गया। उस वक्त NCRA (पुणे), IIT (रुड़की), IISER (भोपाल), TIFR (मुंबई), IIT (हैदराबाद), IMSc (चेन्नई) और आरआरआई (बेंगलुरु) इसमें शामिल थे। 2016 में इंडियन पल्सर टाइमिंग ऐरे (InPTA) और जापान के शोधकर्ता भी इसमें जुड़ गए।












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