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इरोम के फैसले से खफा हैं उनके समर्थक, कर रहे हैं विरोध

इंफाल। दुनिया की सबसे लंबी अनशन करने वाली इरोम शर्मिला का उन्हीं के क्षेत्र में विरोध हो रहा है। विरोध इस स्तर तक हो रहा है कि अस्पताल से छूटने के बाद जब वो कुछ लोगों के घर रहने के लिए गईं तो उन्हें रुकने नहीं दिया गया। बता दें कि शर्मिला ने मंगलवार को जब इंफाल स्थित जवाहर लाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के बाहर अपना अनशन तोड़ा उसके बाद उन्हें रहने का ठिकाना नहीं मिला।

अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार वो करीब 2 जगहों पर रहने के लिए गईं लेकिन उन्हें वापस आना पड़ा। इसके बाद पुलिस उन्हें देर रात इंफाल सिटी पुलिस स्टेशन ले आई। यहां यह बात सामने आ रही है कि करीब डेढ़ दशक तक जो शर्मिला के साथ खड़े थे, उनका अनशन टूटने के बाद समर्थकों को साथ रखना मुश्किल लग रहा है।

इसलिए हो सकता है ऐसा

शर्मिला के एक सहयोगी ने बताया कि ' ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि कुछ संगठनों ने शर्मिला द्वारा अनशन तोड़े जाने पर सवाल उठाए हैं।' इससे पहले मेइती विद्रोही संगठन, कांगलेई यावोल कन्ना लुप ( केवाईकेएल ) की नमोइजम ओकेन और खेत्री लाबा और वाम पंथी समूह कांगलेईपक कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य जो शर्मिला को अपनी ' बड़ी बहन ' संबोधित करते हैं उन्होंने अपील की थी कि वो अपना अनशन न तोड़ें। शर्मिला द्वारा अनशन तोड़े जाने के निर्णय के बाद इस फैसले पर मणिपुर में लोग बट गए। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब शर्मिला मंगलवार को कोर्ट पहुंची तो उनके साथ कुछ ही महिलाएं और समर्थक मौजूद थे।

irom sharmila

द हिंदू के अनुसार शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता मलेम निंगथोजुआ ने उन्हें बताया कि 'मणिपुर के लोग भारतीय चुनावी राजनीति में यकीन नहीं करते। लोगों का मानना है कि राजनीति में आकर शर्मिला भी उन्हीं की तरह हो जाएंगी।'

मणिपुर मे ही ह्यूमन राइट्स एलर्ट के निदेशक बबलू लोइतॉंगबम के मुताबिक '16 साल पहले जब एक नौजवान महिला ने अफ्सपा के खिलाफ अनशन शुरू किया था तो सभी उस पर हंस रहे हैं। आज वो अफ्सपा के खिलाफ पूरे देश में विरोध का चेहरा बन चुकी है।'

विरोध प्रदर्शन पर यह कहा शर्मिला ने

वहीं अपने खिलाफ हुए प्रदर्शनो पर शर्मिला ने कहा है कि वो मुझे मेरे होने के बारे में गलत समझ रहे हैं। उन्होंने मुझे बिना मेरे दिल से जोड़े मुझे देखने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि 16 साल पहले शर्मिला ने मणिपुर में अफ्सपा के खिलाफ अनशन की शुरूआत की थी।

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