4 राज्यों में भाजपा की प्रचंड जीत से धरी रह गई बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे की रणनीति, नरम पड़े तेवर

बेंगलुरू, 14 मार्च। इस साल कर्नाटक में भी विधानसभा चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से प्रदेश में जीत की रणनीति बनाने में जुट गई है। जिस तरह से हाल ही में पांच राज्यों में चुनाव संपन्न हुए और भाजपा ने चार राज्यों में वापसी की है उसके बाद प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र ने फैसला लिया है कि वह प्रदेश में भाजपा की फिर से वापसी की योजना में नेतृत्व के साथ मिलकर सहायक की भूमिका निभाने को तैयार हैं। रविवार को विजयेंद्र ने कहा कि वह मौजूदा भाजपा सरकार में मंत्री बनने में इच्छुक नहीं हैं।

चार राज्यों में भाजपा की जीत ने बदले हालात

चार राज्यों में भाजपा की जीत ने बदले हालात

दरअसल जब पांच राज्यों में चुनाव के नतीजे घोषित हो रहे थे उस वक्त विजयेंद्र दिल्ली में थे और माना जा रहा था कि वह खुद को मौजूदा सरकार में शामिल किए जाने को लेकर नेतृत्व पर दबाव डालने पहुंचे थे, वह दिल्ली में अपने पक्ष में नेताओं को लाने की कोशिश कर रहे थे। वह चाहते थे कि मुख्यमंत्री बासवाराज बोम्मई की सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिले। कर्नाटक भाजपा के उपाध्यक्ष विजयेंद्र ने अब इस बात का इशारा किया है कि वह प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति में सहायक की भूमिका निभाने को तैयार हैं और वह अब खुद को इस सरकार में मंत्री बनाने का दबाव नहीं डालेंगे।

नरम पड़ने लगे तेवर

नरम पड़ने लगे तेवर

विजयेंद्र ने खुद रविवार को पत्रकारों से कहा कि वह पार्टी नेतृत्व पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं डाल रहे थे कि उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाए। उन्होंने दावा किया कि वह दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने के लिए आए थे नाकि मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग लेकर आए थे। विजयेंद्र ने कहा कि मैं यहां संगठन के मुद्दों पर चर्चा के लिए आया हूं। रिपोर्ट के अनुसार जब 2019-2021 के बीच कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की सरकार थी तो विजयेंद्र सुपर सीएम की भूमिका निभा रहे थे और इस साल होने वाले चुनाव में वह अपने पिता की सीट शिकारीपुरा से चुनाव लड़ सकते हैं।

हिंदुत्व और विकास ही नया समीकरण

हिंदुत्व और विकास ही नया समीकरण

वहीं बीएस येदियुरप्पा की बात करें तो उन्होंने भी इस बात का इशारा दिया है कि वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के उम्मीदवार के नाम को आगे नहीं बढ़ाएंगे। माना जा रहा है कि जल्द ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के नए चेहरे का ऐलान किया जासकता है। सूत्रों के मुताबिक येदियुरप्पा ने कहा है कि वह पार्टी को फिर से सत्ता में लाने के लिए काम करेंगे, फिर कोई भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की बात करें तो चार राज्यों में जीत के बाद पार्टी पारंपरिक जाति आधारित वोट बैंट की राजनीति से अलग हिंदुत्व और विकास पर आधारित वोट बैंक को तैयार करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही मुख्य चेहरे के तौर पर आगे रखा जाएगा बजाए क्षेत्रीय नेता के।

नए चेहरे के साथ पार्टी करेगी नई शुरुआत

नए चेहरे के साथ पार्टी करेगी नई शुरुआत

माना जा रहा है कि भाजपा नलिन कुमार कतील की जगह नए चेहरे को प्रदेश की कमान सौंप सकती है जोकि पार्टी के एजेंडे और रणनीति को आगे बढ़ा सके। पार्टी में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि अहम पद पर महिलाओं के नेतृत्व से कर्नाटक में जाति आधारित राजनीति को पीछे करके बड़े पैमाने पर वोटर्स को भाजपा की ओर खींचा जा सकता है। भाजपा के एक नेता ने बताया कि कर्नाटक जातिगत राजनीति से ऊपर उठने के लिए तैयार है, भाजपा के अंदर भी इसी तरह की सोच है। लोकसभा चुनाव 2019 में यह पहले ही हो चुका है।

अब जातीय समीकरण से अलग राजनीति

अब जातीय समीकरण से अलग राजनीति

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कर्नाटक की 28 में से 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि मांड्या सीट पर सुमलथा अंबरीश जोकि लोकप्रिय फिल्म स्टार और कांग्रेस के पूर्व सांसद एमएच अंबरीश की पत्नी हैं उन्होंने जीत दर्ज की थी। बावजदू किसी जाति से कनेक्शन के सुमलथा को यहां से जीत मिली थी। पांच राज्यों में हाल में हुए चुनाव के नतीजों के बाद जिस तरह से बदले हुए समीकरण सामने आए हैं उसके बाद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब समुदाय विशेष के नेताओं को अपनी शर्तों पर पार्टी में आगे ले जाने की योजना बना रहा है। लिंगायत नेता येदियुरप्पा को भी इसी रणनीति के तहत पार्टी हैंडल करना चाहती है जोकि फिलहाल सफल होती रणनीति नजर आ रही है।

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