उल्टी गिनती शुरू! पृथ्वी के बेहद करीब पहुंच रहा विशाल पत्थर, अब आगे क्या होगा
उल्टी गिनती शुरू! पृथ्वी के बेहद करीब पहुंच रहा विशाल पत्थर, अब आगे क्या होगा
नई दिल्ली, 05 सितंबर: नासा समेत दुनियाभर कई रिसर्च और वैज्ञानिक संगठन हमेशा ये दावा करते हैं कि ऐस्टरॉइड यानी उल्कापिंड पृथ्वी से टकराएगी। नासा द्वारा कई ऐसे दिन की भविष्यवाणी की गई है। लेकिन अभी तक कोई भी उल्कापिंड पृथ्वी से टकरा कर उसको नुकसान नहीं पहुंचा पाया है। एक बार फिर नासा के वैज्ञानिकों ने ऐसी ही भविष्यवाणी की है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सितंबर में एक विशाल उल्कापिंड धरती के पास गुजरेगा। बताया जा रहा है कि दो हफ्ते बाद धरती के बेहद नजदीक से विशालकाय उल्कापिंड गुजरेगा।
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दुनिया के सबसे बड़े टावर से भी बड़ा है ये पत्थर
द सन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस पत्थर का साइज दुनिया का सबसे बड़ा टावर बिग बेन टावर के जितना बड़ा है। या इससे भी अधिक बड़ा हो सकता है। बिग बेन के आकार का दोगुना माना जाने वाला एक विशाल क्षुद्रग्रह दो सप्ताह से भी कम समय में पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने के लिए तैयार है।

13 सितंबर को आएगा ये पत्थर
वैज्ञानिकों ने इस पत्थर को 2008 RW नाम दिया है। ये विशाल अंतरिक्ष चट्टान केवल तीन या चार साल में एक बार पृथ्वी के करीब आता है। ये पत्थर कई सालों से चक्कर लगा रहा है। यह उल्का पिंड 13 सितंबर की रात 1.50 बजे हमारी कक्षा में प्रवेश करने के लिए तैयार है। और लगभग 10 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से यात्रा करेगा।

धरती से सिर्फ इतनी दूरी पर होगा ये विशाल पत्थर
वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस बार ये पत्थर पृथ्वी से कुछ ज्यादा ही करीब से गुजरने वाला है। इसका नवीनतम फ्लाईबाई पहले से कहीं ज्यादा करीब होने वाला है और पृथ्वी से टकरा सकता है। यह पृथ्वी से लगभग 6.7 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर यात्रा करेगा, जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव द्वारा संभावित रूप से खींचे जाने के काफी करीब है। अगर धरती के गुरुत्वाकर्षण ने इसे अपनी और खींचा तो यब तबाही ला सकती है।

क्या सच में आ जाएगी तबाही
बता दें कि वैज्ञानिकों ने फिलहाल अभी तक तो कोई खुलासा नहीं किया है कि ये धरती से टकराया तो टक्कर कहां होगी। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अगर यह पृथ्वी से टकराता है तो यह कहां इसका असर होगा लेकिन यह इतना करीब होगा इसलिए नासा के लिए परेशानी का विषय है। इस वजह नासा लगातार इसपर नजर बनाए हुए है

इस उल्कापिंड की खोज साल 2008 में की गई थी
द स्काई के एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इस उल्कापिंड 2008 RW को 02 सितंबर 2008 में खोज गया था। यह निकट-पृथ्वी वस्तु अपोलो समूह से संबंधित है। यह 1023 दिनों से सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा कर रहा है। इस समय, क्षुद्रग्रह सूर्य से अधिकतम 456 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर चल रहा है और 139 मिलियन किलोमीटर की न्यूनतम दूरी पर पहुंचता है।

फिलहाल पृथ्वी से कितनी दूरी पर ये उल्कापिंड
द स्काई के एक्सपर्ट्स ने कहा, ''पृथ्वी से ये विशाल उल्कापिंड 2008 RW की दूरी वर्तमान में 51.63 मिलियन किलोमीटर है, जो 0.35 खगोलीय इकाइयों के बराबर है। इस विशाल पत्थर 2008 RW को यात्रा करने और हमारे पास आने में दो मिनट और 52 सेकंड का समय लगता है।" क्षुद्रग्रह का सटीक आकार फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह लगभग 73 मीटर से लेकर विशाल 164 मीटर तक है। अभी तक कई बार ये पृथ्वी के पास से गुजर चुका है लेकिन इस बार जो दूरी है वो बेहद कम है। जो चिंता का कारण है।












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