सही समय पर नहीं जागते कैप्‍टन आयुष तो आतंकवादी कर देते बड़ा नुकसान

27 अप्रैल को कुपवाड़ा हमले में शहीद होने से पहले कैप्‍टन आयुष यादव ने मारे दो आतंकी और बचाई थी अपने साथी जवानों की जिंदगी। आतंकियों को क्‍वार्ट्स की ओर बढ़ने से रोका था कैप्‍टन ने।

नई दिल्‍ली। 25 वर्ष की उम्र में कैप्‍टन आयुष यादव एक ऐसा काम कर गए हैं कि आने वाली कई पीढ़‍ियों को उनकी मिसाल दी जाएगी। 27 अप्रैल को कुपवाड़ा में हुए आतंकी हमले शहीद होने से पहले कैप्‍टन आयुष ने न सिर्फ अपनी मातृभूमि की रक्षा की बल्कि उन्‍होंने अपने साथियों की भी जान बचाई। आइए आपको कैप्‍टन आयुष से जुड़ी पांच ऐसी बातों के बारे में बताते हैं जो आपको पूरी जिंदगी प्रेरणा देती रहेंगी।

क्‍या हुआ था 27 अप्रैल को

क्‍या हुआ था 27 अप्रैल को

27 अप्रैल गुरुवार को तड़के तीन आतंकवादी कुपवाड़ा के पंझगाम स्थित आर्मी कैंप में दाखिल। जिस समय वह दिवार काट रहे थे उन पर फायरिंग शुरू हो गई। आतंकवादियों ने सुरक्षा में लगे जवानों पर फायरिंग की और उन्‍होंने उन क्‍वार्ट्स की ओर भागना शुरू किया जहां पर बाकी सैनिक रहते थे। कैप्‍टन आयुष जो उस समय सो रहे थे वह तुरंत अपनी एके-47 के साथ एक्‍शन में आए।

बचपन से था सेना में जाने का सपना

बचपन से था सेना में जाने का सपना

कैप्‍टन आयुष हमेशा से ही एक बहादुर बच्‍चे थे और बचपन से ही सेना में जाना चाहते थे। 30 दिसंबर 2012 को वह इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) में दाखिल हुए और वह आईएमए के 134वें कोर्स का हिस्‍सा थे। उनकी ऑल इंडिया रैंक तीसरी थी और देश मिलिट्री इंस्‍टीट्यूट के लिए इस रैंक को हासिल करना बहुत ही मुश्किल होता है।

क्‍या किया था कैप्‍टन ने

क्‍या किया था कैप्‍टन ने

हमले के समय कैप्‍टन आयुष यादव गोलियों की आवाज सुनते हुए जाग गए। उन्‍हें कुछ गड़बड़ी का अंदाजा हुआ और वह अपनी एके-47 लेकर भागे। आतंकवादी क्‍वार्ट्स की ओर आ रहे थे। यह देखकर कैप्‍टन आयुष ने आतंकवादियों पर फायरिंग की और इस बीच एक गोली उन्‍हें भी लग गई। लेकिन फिर भी वह आतंकियों से लड़ते रहे और उन्‍होंने आतंकवादियों को आगे बढ़ने नहीं दिया।

अगर सोते रहते कैप्‍टन

अगर सोते रहते कैप्‍टन

कुपवाड़ा में पंझगाम गांव में सेना के जिस कैंप पर हमला हुआ था वह सेना की 68वीं ब्रिगेड है और नॉर्थ कश्‍मीर के कुपवाड़ा से 25 किलोमीटर दूर है। अगर कैप्‍टन आयुष सही समय पर नहीं जागते तो आतंकी इस कैंप को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकते थे। यह सेना का आर्टिलरी कैंप है और मुश्किल के समय सेना के लिए बहुत मददगार साबित होता है।

37 मिनट तक आतंकियों से लेते रहे मोर्चा

37 मिनट तक आतंकियों से लेते रहे मोर्चा

कैप्‍टन यादव और उनके दो साथी सूबेदार भूप सिंह और नायक बीवी रमन्‍ना करीब 37 मिनट तक आतंकियों से मोर्चा लेते रहे। सेना के प्रवक्‍ता कर्नल सौरव जोशी ने कहा कैप्‍टन यादव उस समय शहीद हुए जब वह आतंकवादियों को लिविंग क्‍वार्ट्स की ओर बढ़ने से रोक रहे थे।



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