फ्यूल सब्सिडी पर सरकार और नेताओं का भेदभाव झेलता बिहार
पटना। बिहार में हो रहे विधानसभा चुनावों में नेता आरक्षण से लेकर गरीबी तक जैसे मुद्दों का जिक्र कर रहे हैं लेकिन सभी नेता एक अहम मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं। पेट्रोल, डीजल और केरोसिन पर मिलने वाली सब्सिडी यानी फ्यूल सब्सिडी भी बिहार के लिए काफी अहमियत रखती है।

बिहार न सिर्फ देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों में शामिल है बल्कि यह देश का वह राज्य भी है जिसे सब्सिडी के मामले में भेदभाव झेलना पड़ता है।
बिहार में जारी विधानसभा चुनावों के मौके पर जरा इन आंकड़ों पर नजर डालिए। देखिए कि कैसे बिहार में सब्सिडी का खेल भी राजनेताओं और पार्टियों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।
बिहार को मिलती सबसे कम सब्सिडी
वर्ष 2011-2 012
- बिहार-प्रति व्यक्ति फ्यूल सब्सिडी के नाम पर 537 रुपए।
- दिल्ली 1734 रुपए
- गुजरात में 1411 था।
- हरियाणा-2983
वर्ष 2012-2013
- बिहार-623
- दिल्ली-2061
- गुजरात-1631
- हरियाणा-3267
2013-2014 का हाल
- बिहार-602
- दिल्ली-1967
- गुजरात-1418
- हरियाणा-2556
एलपीजी सब्सिडी
- बिहार को वित्तीय वर्ष 2013-2014 में एलपीजी के लिए जो सब्सिडी मिली वह सबसे कम थी।
- इस वर्ष बिहार को प्रति व्यक्ति दर की हिसाब से सिर्फ 170 रुपए बतौर सब्सिडी मिली।
- दिल्ली की बात करे तो यह आंकड़ा 1,340 रुपए था।
- हरियाणा को 6 68 रुपए तो गुजरात को 406 रुपए मिले।
डीजल सब्सिडी
- बिहार को डीजल पर सब्सिडी के तौर पर जहां एक रुपए मिलते हैं तो हरियाणा को 10 रुपए हासिल होते हैं।
- वर्ष 2013-2014 के दौरान बिहार को डीजल पर सब्सिडी के तौर पर 175 रुपए मिले।
- जहां दिल्ली को 604 रुपए तो वहीं हरियाणा को 1770 रुपए हासिल हुए।
- पंजाब की बात करें तो यह आंकड़ा वहां पर 1040 रुपए था।
(आंकड़ें इंडियास्पेंड की रिपोर्ट पर आधारित)
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