अगर मां का काम जॉब हो तो जानिए कितनी होनी चाहिए एक हाउसवाइफ की सैलरी?
नई दिल्ली। एक हाउसवाइफ 24 घंटे अपने परिवार, अपने बच्चे और अपने घर का काम करती है। उनके काम में न तो ब्रेक होता है और न ही कोई छुट्टी। वो नॉनस्टॉप काम करती है वो भी बिना किसी सैलरी और बिनी किसी प्रोत्साहन के।
हम जानते हैं कि मां की ममता अमूल्य हैं, जिसकी कोई कीमत नहीं चुकाई जा सकती है और न ही मां के काम की किसी से तुलना की जा सकती है, लेकिन अगर मां के काम को अगर जॉब की नजरों से देखा जाए तो क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि एक मां की सैलरी कितनी होनी चाहिए?

काम के लिए मिले सैलरी
साल 2012 में यूपीए के शासनकाल में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने पैरवी करते हुए सुझाव दिया था कि हाउसवाइफ के काम को जॉब माना जाना चाहिए और उनके पति को अपनी पत्नी के इस काम के लिए सैलरी देनी चाहिए। हालांकि उनका ये सुझाव तो सुझाव ही रह गया, लेकिन Miss World 2017 के फाइनल राउंड में मानुषी छिल्लर ने मां के काम को लेकर जो जवाब दिया उसने न केवल उन्हें विश्व सुंदरी का ताज दिला दिया बल्कि इस मुद्दे को एक बार फिर से हवा दे दी। एक बार फिर से हाउसवाइफ की सैलरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
क्या कहता है सर्वे
हम सब जानते हैं कि एक मां की ममता की कीमत नहीं लगाई जा सकती, लेकिन सच्चाई ये भी है कि एक हाउसवाइफ बिना थके दिन भर घर का काम करती है और बॉस की तरह ऑर्डर देने वालों की कमी नहीं होती। ऐसे में उनके काम को जॉब की तरह देखा जाना भी गलत नहीं है। एक मां के काम को लेकर ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक कॉर्पोरेशन ऐंड डिवेलपमेंट ने 2011 में एक सर्वे करवाया था। इस सर्वे के मुताबिक एक इंडियन हाउसवाइफ औसतन रोजाना 6 घंटे काम करती है। इस काम के उन्हें कोई पैसे नहीं मिलते हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक होममेकर्स के कामों को इकॉनमिक ऐक्टिविटी में दर्जा न मिलने और नेशनल इनकम में शामिल नहीं किए जाने से देश की अर्थव्यवस्था में हम महिलाओं के योगदान को नकार रहे हैं।
जानें एक मां को कितनी मिलनी चाहिए सैलरी
इकॉनमिक टाइम्स द्वारा कराए गए एक सर्वे के मुताबिक एक महिला को घर संभालने के लिए कम से कम 45000 रुपए सैलरी हर महीने मिलनी चाहिए। आपको इस सैलरी के मापदंड के बारे में बताते हैं।
औसत 2 बच्चों की देखभाल=12000
3 से 4 लोगों का रोज का खाना=6000
घर की साफ-सफाई और कपड़े= 3000
घर के खर्च, हिसाब और बजट संभालना=4000
बीमार होने पर देखभाल का=6000
बच्चों का होमवर्क और पढ़ाई=6000
बच्चों को घूमाना समेत बाकी के काम=8000
वर्किंग वूमन के लिए और मुश्किल
एक महिला को उसके घर के रोजाना के काम के लिए कम से कम 45000 रुपए की सैलरी मिलनी चाहिए। लेकिन आपको बता दें कि हाउसवाइफ के साथ-साथ वर्किंग वूमन के लिए काम और मुश्किल हो जाता है, क्योंकि ऑफिस की शिफ्ट खत्म करने के बाद उन्हें घर के कामों का, बच्चों का और घर के लोगों का ध्यान रखना होता है।












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