मोदी सरकार पीडीपी को भी ‘राष्ट्रद्रोही’ माने या नहीं?

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिहटी (जेएनयू) विवाद पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए बीजेपी पर हमला बोला कि कश्मीर में बीजेपी ने जिस पीडीपी के साथ सरकार बनाई, वो अफजल गुरु को शहीद मानती है। क्या वो भी देशद्रोह की श्रेणी में आती है?

Mehbooba Mufti, Narendra Modi

आरोप था कि 9 फरवरी को आतंकी अफजल गुरु को फांसी देने के विरोध में जेएनयू में कार्यक्रम हुए। बाद विवाद इतना बढ़ा कि 12 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, यह सवाल इसलिए पूछना पड़ रहा है कि पीडीपी-बीजेपी जम्मू-कश्मीर में फिर से सरकार बनाने जा रही है।

पढ़ें- महबूबा मुफ्ती होंगी जम्मू-कश्मीर की पहली महिला सीएम

संभवतः इस महीने के आखिर तक सरकार का गठन भी हो जाए, जिसकी मुखिया पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती होंगी। जेएनयू विवाद के बाद सहसा इस तरह के सवाल अंकुरित होने लगे। याद रहे कि बीते वर्ष इसी मार्च महीने में जम्मू-कश्मीर में भाजपा मुसीबत में फंस गई थी।

विवादास्पद बयानों से हुई शुरुआत

पीडीपी-भाजपा की सरकार बनने के साथ ही पीडीपी की ओर से विवादास्पद बयानों की शुरुआत हुई। पहले तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद का बयान फिर अफजल गुरु को लेकर पीडीपी की मांग। बीजेपी को तब सफाई देते नहीं बन रही थी और उसके नेता, प्रवक्ता बयानों को महत्व ना देने की बात कह रहे थे। सरकार बनने के दिन ही सईद ने कश्मीर में चुनाव के लिए पाकिस्तान, आतंकियों और हुर्रियत को श्रेय दे डाला।

अगले दिन 9 पीडीपी विधायकों ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी को न्याय का मजाक बताया। बीजेपी दोनों मामलों पर घिरी और उसके पास कोई जवाब नहीं था। सईद के बयान पर तो संसद में भी हंगामा मचा। बाद में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस बयान से सरकार खुद को अलग करती है और ये सिर्फ पीडीपी की राय है।

अब मुद्दा यह है कि अफजल गुरु जेएनयू में आतंकी है, लेकिन पीडीपी के साथ भाजपा सरकार भी बना सकती है जो अफजल गुरु को 'शहीद' कहकर महिमामंडित करती है।

एबीवीपी बना मुखबिर

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकताओं ने हैदराबाद और जेएनयू में 'मुखबिर' की तरह सक्रियता दिखाई। संघ-भाजपा की 'राष्ट्रवादी' सरकार सभी 'राष्ट्रविरोधियों' को प्रताड़ित कर रही है लेकिन इन 'राष्ट्रवादी' भारतीयों को लेकर कुछ तथ्यों पर गौर करना चाहिए। देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल के मुताबिक, यह आरएसएस और हिंदू महासभा जैसे हिंदुत्ववादी संगठन थे जो गांधी की हत्या के जिम्मेदार थे। यह कुनबा आज भी उनकी हत्या को वध कहकर महिमामंडित करता है।

14 अगस्त 1947 को आरएसएस के मुखपत्र 'आर्गेनाइजर' ने लिखा था, 'बदकिस्मती से जो लोग सत्ता में आए हैं, वे हमारे हाथों में तिरंगा पकड़ा देंगे लेकिन हिंदू इसे कभी स्वीकृति व सम्मान नहीं देंगे। तीन अपने आप में अशुभ है और तिरंगे में तीन रंग हैं जो निश्चित तौर पर बुरा मनोवैज्ञानिक असर छोड़ेंगे। यह देश के लिए हानिकारक होगा।' जिन्होंने गांधीजी को मारा, जिन्होंने आजादी के बाद तिरंगे की तौहीन की, वे 'राष्ट्रवादी' हैं और जो युवा भारतीय चाहते हैं कि भारतीय राष्ट्र-राज्य सबके लिए मूलभूत अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों पर अमल करे, उनकी अदालत के फैसले से पहले ही 'आतंकवादी' के रूप में ब्रांडिंग की जा रही है।

मोदी के हस्तक्षेप से हुआ गठबंधन

बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी राम माधव ने कहा कि पीडीपी ने सरकार बनाने को लेकर कोई नई शर्त नहीं रखी है। महबूबा पीएम से मिलना चाहती थीं और पीएम ने उन्हें हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया है। पीएम ने महबूबा से कहा कि वे पार्टी लीडर्स से बात कर सरकार बनाने को लेकर आगे बढ़ें। माधव ने कहा कि बीजेपी को पीडीपी के साथ मुफ्ती मोहम्मद सईद के वक्त हुए गठबंधन के आधार पर सरकार बनाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है।

महबूबा की तरफ से की गई देरी ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी। यह पहला मौका है जब वह कश्मीर की सत्ता में हिस्सेदारी कर रही है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में जम्मू में पार्टी की स्थिति कमज़ोर हुई है, इसके बावज़ूद वह यह कभी नहीं चाहेगी कि वो सत्ता से बाहर हो जाए। बहरहाल, देश के लोग जेएनयू प्रकरण के बाद यह जानना चाहते हैं कि केन्द्र की मोदी सरकार, संघ और भाजपा के लोग पीडीपी को भी देशद्रोही मानते हैं या नहीं?

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