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भारत के 10 सबसे अमीर लोगों में कितने 'ब्राह्मण'? ट्रंप के सलाहकार के बयान के बाद छिड़ी बड़ी बहस, देखें लिस्ट

Top 10 Richest Person in India 2025: डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने हाल ही में भारतीय ब्राह्मणों पर बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भारत के ब्राह्मण रूस से सस्ता तेल खरीदकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, और इसकी असली कीमत पूरा भारत चुका रहा है। नवारो के मुताबिक, रूस से तेल खरीदकर भारत कहीं न कहीं यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है, जिससे अमेरिका और रूस को कोई खास नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि भारतीय जनता ही महंगाई और टैरिफ का सबसे बड़ा बोझ उठा रही है।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जमकर बहस छिड़ गई है-क्या वाकई भारत के ब्राह्मण ही सबसे अमीर और मुनाफाखोर हैं? दरअसल, यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि साल 2025 में भारत में अरबपतियों की संख्या और उनकी संपत्ति दोनों में जोरदार बढ़ोतरी हुई है। अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अरबपति हब बन चुका है। तो चलिए, इसी बहस के बीच नजर डालते हैं कि भारत के टॉप 10 अरबपति कौन हैं और उनमें से कितने ब्राह्मण हैं।

How many Brahmins are among India 10 richest people

इस साल भारत में कुल 284 अरबपति हैं। यह पिछले साल से 13 नए अरबपतियों की बढ़ोतरी है। इन अरबपतियों की संयुक्त संपत्ति अब ₹98 ट्रिलियन (लगभग 1.1 से 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गई है। यह रकम सऊदी अरब की पूरी GDP से भी ज्यादा है और भारत की अपनी GDP का करीब एक-तिहाई हिस्सा है। भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति में हर साल 10% की दर से बढ़ोतरी हो रही है।
भारत में धनकुबेरों की ताकत और दौलत लगातार बढ़ रही है। इससे भारत न सिर्फ एशिया में बल्कि पूरी दुनिया में अरबपतियों का एक मजबूत ठिकाना बन चुका है।

Top 10 Richest Person in India 2025: भारत के सबसे अमीर 10 लोगों की लिस्ट और उनकी जाति क्या है?

🔹 1. मुकेश अंबानी - 92.5 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ भारत के सबसे अमीर व्यक्ति, वैश्विक रैंक 15, उद्योग: तेल, गैस, रिटेल और टेलीकॉम। (मुकेश अंबानी गुजरात के बनिया (वैश्य समुदाय) से आते हैं।

🔹 2. गौतम अडानी - 56.3-60.60 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 24, उद्योग: इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा। (गौतम अडानी भी गुजरात के बनिया (वैश्य समुदाय) से आते हैं। )

🔹 3. शिव नादर - 35.5 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 48, उद्योग: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)। (शिव नादर, तमिलनाडु के नादर समुदाय से आते हैं)

🔹 4. सावित्री जिंदल और परिवार - 34.5 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 49, उद्योग: स्टील और पावर। (सावित्री जिंदल मारवाड़ी परिवार से हैं)

🔹 5. दिलीप सांघवी - 24.9 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 77, उद्योग: फार्मास्युटिकल्स। (दिलीप सांघवी गुजराती जैन परिवार से हैं)

🔹 6. साइरस पूनावाला - 23.1 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 81, उद्योग: वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग। (साइरस पूनावाला पारसी (जोरास्ट्रियन) परिवार से ताल्लुक रखते हैं।)

🔹 7. कुमार मंगलम बिड़ला - 20.9 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 95, उद्योग: बिड़ला समूह (कुमार मंगलम बिड़ला एक मारवाड़ी वैश्य समुदाय से हैं)

🔹 8. लक्ष्मी मित्तल - 19.2 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 116, उद्योग: स्टील (ArcelorMittal)। (लक्ष्मी मित्तल एक बनिया या वैश्य परिवार से हैं, विशेष रूप से राजस्थान के मारवाड़ी समुदाय से आते हैं।)

🔹 9. राधाकिशन दमानी - 15.4 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 122, उद्योग: रिटेल (DMart)। (राधाकिशन दमानी एक माहेश्वरी मारवाड़ी समुदाय से हैं। उनका जन्म राजस्थान के बीकानेर में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ है)

🔹 10. कुशल पाल सिंह - 14.5 अरब डॉलर की संपत्ति, वैश्विक रैंक 124, उद्योग: रियल एस्टेट (DLF)। (कुशल पाल सिंह की जाति जाट है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक हिंदू जाट परिवार में हुआ है)

भारत के टॉप 10 अमीरों की लिस्ट में अगर उनकी जाति के हिसाब से देखा जाए तो एक भी 'ब्राह्मण' नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर का कहना है कि ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के एडवाइजर ने राजनीति से प्रेरित होकर ये बयान दिया था।

कांग्रेस ने अमेरिका के सलाहकार की विवादित टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिका को इस तरह के आधारहीन और भ्रामक बयान नहीं देने चाहिए।

इस मसले पर तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी बोलने वाले समाज में 'ब्राह्मण' शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर अमीरों के लिए किया जाता है। ऐसे में नवारो का बयान न केवल भ्रामक है, बल्कि उनकी अज्ञानता को भी उजागर करता है।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने भी नवारो की टिप्पणी को गलत ठहराया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह बयान अमेरिका के कुछ बौद्धिक क्षेत्रों में भारत के प्रति मौजूद पूर्वाग्रह को दर्शाता है। उनका कहना है कि यह सोच सीधे तौर पर 19वीं सदी के औपनिवेशिक लेखकों, जैसे जेम्स मिल, की विरासत से जुड़ी है।

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