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दो साल में सांप्रदायिक या धार्मिक दंगों में कितने आरोपी दोषी साबित हुए ? केंद्र को संसद में देना पड़ा जवाब

नई दिल्ली, 27 जुलाई: केंद्र सरकार ने लोकसभा में कहा है कि देश में दंगों के मामलों के बढ़ने का कोई ट्रेंड नहीं है। काफी सारे प्रश्नों के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एसीआरबी) के आंकड़ों के हवाले से कहा है कि देश में साम्प्रदायिक दंगों में पिछले सालों में बढ़ने की कोई प्रवृत्ति नहीं दिखाई दी है। केंद्र सरकार की ओर से जवाब देने की जिम्मेदारी गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने संभाली थी। उन्होंने सदन को बताया कि 'भारत सरकार आंतरिक सुरक्षा और कानून और व्यवस्था की स्थिति की निगरानी करती है.......पिछले कुछ सालों से, इसकी एक बढ़ती प्रवृत्ति नहीं दिखाई दे रही है।'

The Central Govt has said in the Lok Sabha that there has been no trend in the past years of increasing cases of communal or religious riots

दो साल में 761 आरोपी दोषी करार- केंद्र
दरअसल, सरकार से बहुजन समाज पार्टी के सांसद दानिश अली ने सवाल पूछा था कि क्या देश में दंगों के मामलों में बढ़ती हुई प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। उन्होंने सरकार से दंगा पीड़ितों को राहत देने और मामलों की जांच के लिए किए जा रहे उपायों पर भी जवाब मांगा था। इस दौरान राय ने गृह मंत्रालय की ओर से लोकसभा को बताया कि साल 2018 और 2020 के बीच विभिन्न सांप्रदायिक और धार्मिक दंगों के सिलसिले में 8,565 गिरफ्तारियां हुईं, उनमें से कुल 761 लोगों को अबतक दोषी करार दिया गया है।

इन वर्षों के दौरान 8,358 लोगों के खिलाफ चार्जशीट
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक इन वर्षों के दौरान 8,358 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है। पिछले वर्षों में दिल्ली में गिरफ्तारियों, चार्जशीट और दोषी करार दिए जाने के मामलों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। 2018 में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। जबकि 2019 में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2020 में 394 लोगों की गिरफ्तारियां हुईं।

इस साल बिहार में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां- गृह मंत्रालय
इस दौरान सरकार ने ये भी बताया इस साल बिहार में सबसे ज्यादा 487 गिरफ्तारियां हुई हैं। गृह मंत्रालय ने यह भी बताया है कि 1 अप्रैल, 2008 से 23 अगस्त, 2016 के बीच ऐसे मामलों में उन प्रभावित परिवारों को 3 लाख रुपये सरकार ने दिए हैं, जिनके परिवार के सदस्यों की या तो मौत हुई है या फिर वे स्थायी तौर पर शरीर से अक्षम हो गए हैं। लेकिन, 23 अगस्त, 2016 के बाद यह रकम बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है।

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