आज ही हुई थी कारगिल युद्ध की शुरुआत, जानिए जंग के उन 85 दिनों में कब क्या हुआ था?
3 मई 1999 यह वही तारीख है जब 25 साल पहले कारगिल युद्ध की शुरुआत हुई थी। ये युद्ध 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ था। उन 85 दिनों के दौरान हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तानी सैनिकों से बहादुरी से लड़ाई लड़ी और देश को शानदार जीत दिलाई।
इस युद्ध में भारत ने अपने 527 जवानों को खो दिया था। भारत के 1363 जवान घायल हुए थे। वहीं, पाकिस्तान के 700 सैनिक मारे गए थे। भारतीय जवानों ने इस युद्ध में अपने खून का आखिरी कतरा देश की रक्षा के लिए न्यौछावर कर दिया था।

आज से 25 साल पहले 3 मई की वह सुबह थी जब पाकिस्तानी सैनिकों के घुसपैठ की जानकारी मिली थी। दरअसल कुछ चरवाहों ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना के घुसपैठ के बारे में सूचना दी थी।
5 मईः भारतीय सेना ने पेट्रोलिंग पार्टी को घुसपैठ वाले इलाके में भेजा। पहले मोर्चे पर 15 सैनिकों की एक टुकड़ी भेजी गई, जिसमें से 5 सैनिकों को पाकिस्तान ने कैद कर लिया और उन्हें मार दिया। पाक ने शहीद जवानों के शव से बर्बरता भी की। दरअसल घुसपैठिए लेह-श्रीनगर हाईवे पर कब्जा कर लेना चाहते थे। इसके जरिए वह लेह को बाकी हिन्दुस्तान से काट देना चाहते थे। ईधर सैनिकों की शहादत से भारत की सरकार भड़क उठी।
8 मईः कारगिल से घुसपैठियों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन विजयी की शुरुआत की गई। इस अभियान की मॉनिटरिंग खुद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई कर रहे थे।
9 मईः पाकिस्तानी सैनिक कारगिल में मजबूत स्थिति में पहुंच चुके थे। यही वजह थी कि कारगिल में भारतीय सेना के गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की।
10 मईः पाकिस्तानी सेना के जवानों ने LOC के पार द्रास और काकसर, बटालिक सेक्टर सहित जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों में घुसपैठ शुरू कर दी। तब उस वक्त ये अंदाजा लगाया गया कि करीब 600 से 800 घुसपैठिये भारतीय चौकियों पर कब्जा कर चुके हैं। दोपहर के समय भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' की शुरुआत कर दी। घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए कश्मीर घाटी से अधिक संख्या में सैनिकों को कारगिल जिले में ले जाया गया। वहीं, पाकिस्तानी सेना ने भारत पर हमला करने से इनकार कर दिया।
15 मईः 1999 के बाद कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से सेना को भेजने की शुरुआत हुई।
26 मईः भारतीय वायुसेना एक्शन में आ गई थी। वायुसेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' के तहत ऊंची चोटियों पर एयरस्ट्राइक की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान घुसपैठियों पर जमकर बमबारी की गई।
27 मईः चोटी पर बंकर बन जाने की वजह से एयरस्ट्राइक की कार्रवाई बहुत सफल नहीं हो पा रही थी। इसी बीच भारत के दो विमान पाकिस्तानी हमलावरों के निशाने पर आ गए। कैप्टन नचिकेता पाकिस्तान के कब्जे में चले गए। दो भारतीय लड़ाकू विमानों को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया। फ्लाइट लेफ्टिनेंट के नचिकेता को पाकिस्तान ने युद्धबंदी बना लिया। वहीं, स्क्वॉड्रन लीडर अजय अहूजा शहीद हो गए।
1 जून: फ्रांस और अमेरिका ने भारत के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया।
5 जून: भारत ने दस्तावेज जारी किए जिससे इस जंग में पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता का पता चला।
9 जून: भारतीय सेना के जवानों ने अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करते हुए जम्मू-कश्मीर के बटालिक सेक्टर में दो प्रमुख ठिकानों पर दोबारा कब्जा किया।
10 जूनः पाकिस्तान ने जाट रेजिमेंट के 6 सैनिकों के क्षत-विक्षत शव लौटाए।
13 जून: पाकिस्तान को एक बड़ा झटका तब लगा, जब भारतीय सेना ने टोलोलिंग चोटी पर फिर से कब्जा कर लिया। तालोलेंग जीतने के बाद भारतीय सैनिकों ने 'प्वाइंट 5140' की तरफ दौड़ लगा दी।
15 जूनः अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे हटाने का आग्रह किया।
20 जून: भारतीय सेना ने प्वॉइंट 5140 पर कब्जे की लड़ाई शुरू की। इसे टाइगर हिल के नाम से भी जाना जाता है।
4 जुलाई: विक्रम बत्रा के नेतृत्व में भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर कब्जा किया। इसके बाद प्वॉइंट 4825 पर कब्जा करने के दौरान बत्रा शहीद भी हो गए।
5 जुलाई: बिल क्लिंटन ने नवाज शरीफ से मुलाकात की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने कारगिल से पाकिस्तानी सैनिकों को हटाने की घोषणा की।
11 जुलाई: पाकिस्तानी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू किया। भारतीय सेना ने बटालिक की प्रमुख चोटियों पर कब्ज़ा कर लिया।
14 जुलाई: भारतीय प्रधानमंत्री ने सेना के 'ऑपरेशन विजय' को सफलता की घोषणा की।
26 जुलाई: पाकिस्तानी सेना के कब्जे वाले सभी पॉजिशन्स को फिर से अपने कब्जे में लेकर भारत इस युद्ध में विजयी हुआ। इसी तरह युद्ध समाप्त हुआ।












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