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कैसे किया जाता है मतदान केंद्र का चुनाव? जानें घर बैठे कैसे पता लगाएं अपना पोलिंग स्टेशन

देश में जल्द ही लोकसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर सभी पार्टियां तैयारियों में जुटी हुई हैं। साथ ही साथ चुनाव आयोग भी आम चुनाव की तैयारियां कर रहा है।

मिल रही जानकारी के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में 2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। ऐसे में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं चुनाव से जुड़ी एक विशेष जानकारी। ये केवल लोकसभा चुनाव के बारे में नहीं है। बल्कि इसका हर चुनाव से संबंध है।

Polling Booth

आज हम आपको बताने वाले हैं चुनाव जहां होते हैं यानी चुनाव या मतदान केंद्र से जुड़ी कुछ खास और दिलचस्प बातें। सबसे पहला सवाल किसी के भी मन में आता होगा कि आखिर मतदान केंद्र क्या होता है।

मतदान केंद्र क्या है?
पोलिंग स्टेशन या मतदान केंद्र उस इमारत या प्रांगण को कहते हैं जहां मतदान करने की सुविधा उपलब्ध होती है। एक मतदान केंद्र में कई मतदान बूथ या पोलिंग बूथ हो सकते हैं। जहां मतदाता अपना वोट डालते हैं उस जगह को पोलिंग बूथ कहा जाता है।

पोलिंग बूथ एक कमरे के अंदर छोटा सा कॉर्नर होता है। इस कोने में एक टेबल पर ईवीएम मशीन या बैलेट पेपर के माध्यम से मतदाता अपना वोट डालते हैं। इसे तीन तरफ से ढक कर रखा जाता है ताकि मतदाता किसे वोट दे रहा है ये केवल उसे पता रहे।

मतदान केंद्र वोटर्स के घर से अधिकतम कितनी दूर हो सकता है?
पोलिंग स्टेशन को लेकर 1951 के जनप्रतिनिधित्व कानून में कई प्रावधान तय किए गए हैं। चुनाव आयोग भी आबादी में बदलाव होने पर समय-समय पर नए दिशा-निर्देश जारी करता है। साल 2020 में बने नियमों के अनुसार 1,500 से अधिक मतदाताओं पर एक पोलिंग स्टेशन होना चाहिए।

वहीं, एक पोलिंग बूथ पर 1,000 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए। मतदान केंद्र बनाते समय यह ध्यान में रखा जाता है कि किसी भी चुनाव क्षेत्र में मतदाता को अपना वोट डालने के लिए अपने घर से दो किलोमीटर से अधिक दूर ना जाना पड़े।

कैसे होता है मतदान केंद्र का चुनाव?
सामान्य तौर पर ये सरकारी या अर्द्धसरकारी दफ्तरों की इमारत होती हैं। इन इमारतों का चुनाव करते वक्त सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है। स्कूल और कॉलेज की इमारतों में कुर्सी-टेबल की सुविधाएं पहले से मौजूद होने के कारण भी वहां पोलिंग बूथ बनाने को प्राथमिकी दी जाती है।

कई बाार ग्रामीण सामुदायिक भवन, पंचायत भवन या हॉल का इस्तेमाल भी पोलिंग स्टेशन बनाने के लिए किया जाता है। नियमों के अनुसार पुलिस स्टेशन, अस्पताल, मंदिर और अन्य धार्मिक जगहों पर पोलिंग स्टेशन बनाना मना है। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन से 200 मीटर की दूरी तक किसी राजनीतिक दल का ऑफिस या अस्थायी कार्यालय नहीं होना चाहिए।

सरकारी इमारत के नहीं होने पर पोलिंग स्टेशन प्राइवेट बिल्डिंग या फिर अस्थायी ढंग से तैयार किए गए शेड्स में बनाए जा सकते हैं। लेकिन आमतौर पर इस व्यवस्था से बचा जाता है।

बुर्ज़ुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदान केंद्र ग्राउंड फ्लोर पर बनाना होता है। मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदान केंद्र में रैंप की व्यवस्था भी अनिवार्य होती है।

कौन करता है मतदान केंद्र की इमारत का फैसला?
पोलिंग स्टेशन को लेकर फैसला आम तौर पर जिला मजिस्ट्रेट या फिर जिलाधिकारी करते हैं। जिलाधिकारी ही जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं। हालांकि पोलिंग स्टेशन फाइनल करने से पहले इसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं करने पर यहां हुए मतदान को मान्यता नहीं मिलती है। कई बार जंगलों और पहाड़ों पर भी पोलिंग स्टेशन बनाए जाते हैं ताकि वहां रहने वाले मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

पोलिंग बूथ या मतदान केंद्र को कैसे ढूंढें?
कई बार मतदाता को यह नहीं पता होता है कि उसका मतदान केंद्र कहां है। मतदान केंद्र पता करने के तीन प्रमुख तरीके हैं।

  • जो लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं वो प्ले स्टोर से वोटर हेल्पलाइन ऐप (Voter Helpline) डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप में Know your polling Station सेक्शन में अपना विवरण डाल कर आप अपने मतदान केंद्र का पता लगा सकते हैं।
  • चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी आप अपना मतदान केंद्र खोज सकते हैं।
  1. अपना विवरण देकर।
  2. मतदाता पहचान पत्र पर दिए ईपीआईसी नंबर के जरिए।
  3. अपने मोबाइल नंबर के आधार पर

पोलिंग बूथ के खुलने का समय क्या है?
चुनाव आयोग के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 10,37,848 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मतदान केंद्र मतदाताओं के लिए सुबह सात बजे खोल दिए जाते हैं। मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होता है। मतदान का समय खत्म होते समय जितने भी वोटर वहां लाइन में लगे होते हैं, उन सबको मतदान करने का मौका दिया जाता है। इसमें जितना भी समय लगे, जब तक क़तार का अंतिम मतदाता मतदान नहीं कर लेता बूथ खुला रहता है।

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