घाटी में हिजबुल और लश्कर के बीच की जंग, आर्मी के लिए वरदान
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में पिछले दिनों लश्कए-ए-तैयबा का आतंकी अबु कासिम की मौत एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। कासिम की मौत के साथ ही घाटी में आतंकी वारदातों की साजिश पर भी लगाम लग सकी है।

उसकी मौत एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी तो है ही साथ ही साथ घाटी में इस समय आतंकी संगठनों की वजह से एजेंसियों के लिए तैयार हुए एक माहौल की भी झलक है।
आतंकी संगठनों में खुद को बेहतर बताने की होड़
घाटी में मौजूदा वक्त में हर आतंकी संगठन खुद को दूसरे संगठन से बेहतर बता रहा है। आतंकी संगठनों के भीतर कैडर्स में रैंक और खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की रेस एजेंसियों के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार कर रही है।
घाटी में फिलहाल पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और घाटी के आंतकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के बीच तनातनी की वजह से शायद एजेंसियों को सफलता हासिल हो रही है।
कासिम के लिए बिछा था जाल
अबु कासिम जम्मू कश्मीर में लश्कर का चीफ था और पिछले पांच वर्षों से एजेंसियों को उसकी तलाश थी। वह हर बार इंडियन आर्मी और पुलिस के हाथ से बाहर निकल जा रहा था। उधमपुर हमले का मास्टरमाइंड कासिम दरअसल एजेंसियों के जाल में फंसा और मारा गया।
पिछले हफ्ते कासिम को सेना और सुरक्षाबलों ने कुलगाम में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया था। कासिम की तलाश एजेंसियों को उधमपुर में हुए आतंकी हमले के बाद से ही थी।
इन हमलों का एक और आतंकी मोहम्मद नावेद जो जिंदा पकड़ा गया था उसने कासिम के बारे में कई अहम जानकारियां एजेंसियों को मुहैया कराई थीं। उसने कासिम कहां हो सकता है इस बारे में भी जानकारी दी थी।
हिजबुल ने लीक की थी कासिम की जानकारी
इन जानकारियों के आधार पर ही जम्मू कश्मीर पुलिस ने एक ऑपरेशन चलाया। हालांकि कासिम के पास भी स्थानीय सूत्रों की ओर से मिली कई जानकारियां थीं और इसके बावजूद वह पकड़ा गया।
उसे पुलिस के एक ऑफिसर अल्ताफ डार ने मार गिराया। आर्मी ने कासिम के खिलाफ ऑपरेशन चलाने से पहले इसके बारे में जानकारियां देनी शुरू कर दी।
आर्मी का मकसद उसे उसके मजबूत गढ़ से बाहर निकालना था। इसके बाद कासिम हिजबुल के अहम अड्डे कुलगाम में आया। फिर ऑपरेशन को शुरू कर दिया गया।
कासिम के पास नहीं था सपोर्ट
घाटी में हिजबुल चाहता है कि वह लश्कर को कमजोर कर सके और इसलिए ही उसने कासिम की लोकेशन से जुड़ी सही जानकारी को लीक कर दिया।
एनकाउंटर के समय कासिम को इस बात का अहसास हुआ कि लड़ाई के लिए जरूरी सपोर्ट या हथियार उसके पास हैं ही नहीं। इस वजह से आर्मी एनकाउंटर में बेहतर साबित हुई और कासिम को मारा गया।












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