Trump Towers in India: भारत से करोड़ों रुपए कैसे कमा रहे डोनाल्ड ट्रंप? वो भी बिना एक भी रुपया खर्च किए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2025 से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर 100 प्रतिशत धोखा दिया है। बड़बोले ट्रंप ने तो पिछले हफ्ते भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' तक बता दिया था, जबकि खुद ट्रंप यह भूल गए कि 'ट्रंप टावर' बनवाने वाली उनकी कंपनी के लिए अमेरिका से बाहर सबसे बड़ा बाजार भारत में ही है।

भारत से 175 करोड़ की कमाई, वो भी बिना निवेश के
ट्रंप की कंपनी ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने बीते दस सालों में भारत के नामी बिल्डर समूहों के साथ साझेदारी करके करीब 175 करोड़ रुपए की कमाई की है। खास बात यह है कि 175 करोड़ की कमाई करने में ट्रंप की कंपनी को एक रुपए का भी निवेश नहीं करना पड़ा।
कैसे काम करता है ट्रंप का 'ब्रांड लाइसेंसिंग' मॉडल?
दरअसल, ट्रंप ऑर्गनाइजेशन का बिजनेस मॉडल ब्रांड लाइसेंसिंग पर आधारित है। मतलब, ट्रंप की कंपनी न तो खुद पैसा लगाती है और न ही कोई निर्माण कार्य करती है। वह केवल भारतीय रियल एस्टेट कंपनियों को अपनी बिल्डिंग्स पर 'ट्रंप' का नाम इस्तेमाल करने की अनुमति देती है और इसके बदले तगड़ी फीस वसूलती है।
भारत में ट्रंप टावर की बंपर डिमांड
भारतीय रियल एस्टेट कंपनियां 'ट्रंप टावर' के नाम से लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स धड़ल्ले से लॉन्च कर रही हैं। भारतीय ग्राहकों में 'ट्रंप' ब्रांड वाली प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ लगी हुई है। तभी तो गुरुग्राम, नोएडा, पुणे, हैदराबाद, मुंबई और बेंगलुरु में ट्रंप टावर्स बनाए जा रहे हैं। हाथों-हाथ बिक भी रहे। 80 लाख वर्ग फीट की प्रॉपर्टी डेवलपमेंट की योजना का अनुमानित बिक्री मूल्य 15,000 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है।
किन भारतीय बिल्डरों के साथ मिलकर बने ट्रंप टावर्स?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में ट्रंप ब्रांड का काम संभालने वाले ट्रिबेका डेवलपर्स ने लोढ़ा ग्रुप, पंचशील रियल्टी और एम3एम ग्रुप जैसी कंपनियों के साथ मिलकर ट्रंप टावर्स बनाए हैं। भारत में पहला ट्रंप प्रोजेक्ट साल 2012 में शुरू हुआ था और ट्रंप के दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने पर इन प्रोजेक्ट्स की रफ्तार और तेज हो गई।
बिल्डर लगाते हैं पैसा, ट्रंप उठाते हैं मुनाफा
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप टावर्स बनाने के लिए पैसा जुटाने, निर्माण करने और बिक्री की जिम्मेदारी पूरी तरह भारतीय बिल्डरों की होती है। ऐसे में ट्रंप की जेब में बिना किसी जोखिम और बिना एक भी रुपए के निवेश के, केवल अपने 'ट्रंप ब्रांड' के नाम पर मोटी कमाई हो जाती है।












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