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DRDO की एंटी-कोरोना दवा कैसे करती है काम? क्या यह गेम-चेंजर होगा? जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

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नई दिल्ली, 09 मई: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा बनाई गई कोरोना वायरस रोधी दवा को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल गई है। इस दवा का नाम 2-deoxy-D-glucose (2-DG) दिया गया है। यह दवा एक पाउडर की तरह सैशे में आती है। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार (08 मई) को ये जानकारी दी है कि मुंह के जरिए ली जाने वाली इस दवा को कोविड-19 के मध्यम से गंभीर लक्षण वाले मरीजों के इलाज में उपयोग करने के लिए मंजूरी दे दी गई है। रिसर्च के दौरान बड़ी संख्या में इस दवा का उपयोग करने वाले लोग आरटीपीसीआर टेस्ट में कोविड निगेटिव पाए गए हैं।

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    DRDO Anti Covid Medicine: क्या है DRDO की Corona की दवा, जानें सबकुछ | वनइंडिया हिंदी

    भारत ने इस दवा को मंजूर कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये दवा सारे मेडिकट टर्म पर खड़ा पाया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस दवा के उपयोग के बाद मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करेगी और अस्पतालों में भर्ती होने वाले रोगियों को रिकवरी में मदद मिलेगी।

    यह कैसे काम करता है?

    जब दवा, 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) शरीर में प्रवेश करती है, तो यह वायरस द्वारा संक्रमित कोशिकाओं के अंदर जमा हो जाती है। जिसके वायरस सिंथेसिस और एनर्जी प्रोडक्शन कर संक्रमण को बढ़ने से रोकती है। DRDO का कहना है कि इसका "केवल वायरस संक्रमित कोशिकाओं में जाकर जमा होना'' इसे अद्वितीय बनाता है।

    दवा का निर्माण कौन करेगा?

    कोरोना रोधी दवा का निर्माण भारत में डॉ. रेड्डी लैबोरेट्रीज करेगी। दवा के क्लीनिकल ट्रायल्स की बात की जाए तो इसके सभी क्लीनिकल ट्रायल्स सफल साबित हुए हैं। तीसरे फेज के ट्रायल में भी इसकी पुष्टि हुई। दावा किया गया है कि कोविज मरीजों को ये बहुत जल्दी रिकवर करेगा। इसके साथ ही मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम होगी।

    दवा का सेवन कैसे किया जाता है?

    2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) दवा एक पाउडर की तरह एक सैशे में आती है, इसको आसानी से पानी में घोलकर पीया जाता है। लेकिन इसका इस्तेमाल डॉक्टरों की सलाह पर और इलाज के प्रोटोकॉल के तहत ही की जाएगी।

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    क्या यह गेम-चेंजर होगा?

    दवा अस्पताल में भर्ती कोविड-19 मरीजों की रिकवरी तेजी से कर सकती है और मेडिकल ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता को कम भी कर सकती है। क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि 42 फीसदी रोगी, जिन्हें प्रतिदिन इस दवा के 2 डोज दिए गए हैं, उनको तीसरे दिन ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ी है। स्टैंर्न्ड इलाज के तहत 30 प्रतिशत मरीजों को 3 दिन तक ऑक्सीजन सपोर्ट मिलती है।

    English summary
    How Does DRDO’s Anti Covid19 Drug Work? 2-deoxy-D-glucose 2-DG key Questions Answered
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