गुजरात से अमेरिका, वैध वीज़ा के बिना कैसे पहुँचते हैं लोग?

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अमेरिका में अवैध ढंग से घुसने की कोशिश करते हुए एक गुजराती परिवार के चार सदस्यों की ठंड की वजह से मौत हो गई थी. यह परिवार गुजरात के कलोल शहर के डिंगुचा गाँव का रहने वाला था.

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर गुजरात से अमेरिका जाने वाले अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठा दिया है. इस हादसे ने उन दुष्कर रास्तों को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है, जिनसे लोग अमेरिका में घुसने की कोशिश करते हैं.

हालांकि, ऐसा नहीं है कि अमेरिका पहुँचने की कोशिश करने वाले लोग कनाडा से होकर ही अमेरिका में घुसते हैं. और ये भी ध्यान रखना चाहिए कि गुजरात से अमेरिका जाने वाला हर शख़्स अवैध ढंग से अमेरिका में नहीं घुसता है.

अमेरिकी पुलिस ने अब तक ये नहीं बताया है कि ये परिवार क्यों और किन हालात में कनाडा से होकर अमेरिका पहुँचना चाहता था. क्योंकि ऐसे तमाम रास्ते हैं, जिनकी मदद से अवैध प्रवासी अमेरिका पहुँचते हैं.

और अमेरिका में पहले से काफ़ी बड़ी संख्या में गुजराती लोग रहते हैं जो अलग-अलग समुदायों से जुड़े हुए हैं.

इन लोगों ने अपने गाँवों में संपर्क बनाए हुए हैं. ऐसे में जब भी इनके समुदायों से लोग अमेरिका पहुँचते हैं तो वे इन लोगों से मदद लेते हैं और कुछ महीनों के लिए उन पर निर्भर भी रह सकते हैं.

बीबीसी गुजराती ने कुछ ऐसे ट्रैवल एजेंट्स से बात की है जो लोगों की काग़ज़ात बनवाने में मदद करते हैं.

हालांकि, इन लोगों में इस मुद्दे पर बात करने को लेकर हिचकिचाहट नज़र आई और इन्होंने अपने नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर बात की है क्योंकि फ़िलहाल पुलिस की जांच जारी है.

आख़िर ये सब शुरू कैसे होता है?

अगर आप विदेश यात्रा करना चाहते हैं तो आपको एक पासपोर्ट की ज़रूरत होती है. कनाडा में मरने वाले परिवार के मुखिया जगदीशभाई पटेल के पास भी एक पासपोर्ट था.

और इसी पासपोर्ट के आधार पर उन्हें कनाडा की ओर से विज़िटर वीज़ा मिला था.

नाम न बताने की शर्त पर एक एजेंट ने कहा कि "सामान्य रूप से हम अपने क्लाइंट्स से कहते हैं कि वे अमेरिका के आसपास किसी देश का ट्रैवल वीज़ा ले लें."

एक बार टूरिस्ट या अन्य किसी तरह का वीज़ा मिलने के बाद वे भारत छोड़ सकते हैं और आसानी से अमेरिका के पड़ोसी देशों में पहुँच सकते हैं.

"हालांकि, इस तरह से अमेरिका पहुँचने वाले लोगों को काफ़ी ज़्यादा पैसा ख़र्च करना पड़ता है. उन्हें अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए एक मोटी रक़म ख़र्च करनी होती है.

डिंगुचा गाँव के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि, "यहाँ पर लोग अमेरिका पहुँचने के लिए करोड़ों रुपये ख़र्च करना चाहते हैं. सामान्य रूप से एक परिवार अमेरिका पहुँचने के लिए एक करोड़ रुपये तक ख़र्च कर सकता है."

एक ट्रैवल एजेंट ने इस ख़र्च की पुष्टि करते हुए कहा कि "हां, इसमें काफ़ी पैसा लगता है. क्योंकि हमें एजेंट्स को पैसे देने पड़ते हैं और जो लोग वहाँ होते हैं, उन्हें पैसे देने पड़ते हैं. इसके साथ ही हमें ट्रांज़िट कंट्री में भी एजेंट्स को पैसे देने पड़ते हैं."

अमेरिका में घुसने के प्रमुख रास्ते?

अमेरिका में अवैध ढंग से घुसने का सबसे बड़ा रास्ता दक्षिणी छोर पर है.

अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, पिछले साल अक्टूबर, नवंबर, और दिसंबर में लगभग पाँच लाख लोगों ने अमेरिका में अवैध ढंग से घुसने का प्रयास किया था.

अमेरिका में इस तरह अवैध ढंग से घुसने के सबसे बड़े मार्ग मेक्सिको, ग्वातेमाला, होंडुरास और एल सल्वाडोर से होकर अमेरिका में जाते हैं. वहीं, उत्तर दिशा यानी कनाडा से आने वाले लोग अल्बर्टा से होकर आते हैं.

बीबीसी गुजराती ने 15 सालों तक अमेरिका में अवैध ढंग से रहने वाले एक शख़्स से बात की जो कि अब गुजरात में रहते हैं.

नाम न बताने की शर्त पर इस शख़्स ने कहा, "तब से लेकर अब तक गुजरातियों के लिए अमेरिका में घुसने का सबसे बढ़िया रास्ता मेक्सिको की सीमा ही है. मैं ख़ुद भी उसी बॉर्डर से होकर गया था. लेकिन मुझे कुछ कारणों से वापस आना पड़ा."

इस शख़्स ने बताया कि 15 साल पहले वह ऑन-अराइवल (पहुँचकर मिलने वाला) वीज़ा के साथ मेक्सिको पहुँचे थे. उस दौर में भारतीय लोगों के लिए मेक्सिको में ऑन-अराइवल वीज़ा उपलब्ध होता था.

इनका समूह ऑन-अराइवल वीज़ा पर मेक्सिको पहुँचा, जिसके बाद पूरे समूह ने मेक्सिकॉ बॉर्डर से अमेरिका में प्रवेश किया. मेक्सिको ने अब वीज़ा नियमों को बदल दिया है और भारतीय लोगों को मेक्सिको के लिए निकलने से पहले वीज़ा लेना होता है.

एक ट्रैवल एजेंट के मुताबिक़, "यद्यपि, कनाडा के अलावा अमेरिका के दूसरे पड़ोसी देशों का वीज़ा हासिल करने में ज़्यादा ख़र्च नहीं होता है. लेकिन असली काम इन देशों में पहुँचने के बाद शुरू होता है.

किसी स्थानीय व्यक्ति के साथ क़रार करना होता है जो इन्हें सीमा तक ले जाता है. ये लोकल एजेंट सीमा पार करने के लिए ज़रूरी सभी चीज़ें जैसे गरम कपड़े, खाना और पानी उपलब्ध कराते हैं."

ये लोकल एजेंट अवैध आप्रवासियों को सीमा पर ले जाते हैं, उन्हें जंगलों एवं रेगिस्तानी इलाके से होकर गुजरने वाले रास्तों से जुड़ी जानकारियां देते हैं.

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कनाडा की जमी हुई ओंटारियो झील
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कनाडा की जमी हुई ओंटारियो झील

जमी हुई झील पर चला जगदीशभाई का परिवार

जगदीशभाई के परिवार के मामले में स्टीव शांड नामक शख़्स एक लोकल एजेंट के रूप में काम कर रहा था. उसे इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है और पुलिस मानती है कि वह एक व्यापक ह्यूमन ट्रैफिकिंग नेटवर्क का हिस्सा है.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि इस एजेंट ने खाना, पानी से लेकर अन्य ज़रूरी चीज़ें जगदीशभाई के परिवार को मुहैय्या कराई थीं.

डिंगुचा गांव का ये पटेल परिवार सबसे पहले कनाडा पहुंचा. यहां पहुंचकर उन्होंने अपने एजेंट से संपर्क किया और फिर ये लोग मानिटोबा नामक गाँव पहुंचे जिसकी आबादी मात्र 300 है.

बीबीसी अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक़, ये परिवार भारत से टोरंटो आया था और इसके बाद इसने ओंटारियो से अमेरिका में घुसने की कोशिश की. इन लोगों को दक्षिणी ओंटारियो में अमेरिकी सीमा के पास एक जमी हुई झील पर चलना पड़ा. लेकिन ये परिवार सीमा पार नहीं कर सका और इनके शव सीमा के पास पाए गए.

ये लोग बूट और गर्म कपड़े पहने हुए थे. लेकिन ये गर्म कपड़े माइनस 35 डिग्री तापमान के लिए पर्याप्त नहीं थे.

इससे पहले 2019 में एक छह साल की बच्ची गुरुप्रीत कौर अमेरिकी सीमावर्ती राज्य एरिजोना से गायब हो गयी थी.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक़, वह अपने परिवार के साथ थी और अपनी माँ और बहन के साथ अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रही थी. और इस प्रक्रिया में वह खो गयी और इसके बाद बॉर्डर पुलिस को इस बच्ची के मृत शरीर के अवशेष मिले.

अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग द्वारा साल 2019 में जारी की गयी रिपोर्ट (पेज 39) के मुताबिक़, भारत, क्यूबा और इक्वाडोर से एक बड़ी संख्या में लोग अमेरिका पहुंचे हैं.

साल 2019 के सितंबर तक, लगभग 8000 भारतीय नागरिकों ने अवैध ढंग से अमेरिका में घुसने की कोशिश की. इनमें से 7500 लोग दक्षिणी सीमा से अमेरिका में घुसे और वहीं 339 लोग उत्तरी सीमा से घुसे.

ये बताता है कि भारत से अमेरिका पहुंचने वाले ज़्यादातर अवैध आप्रवासी दक्षिण अमेरिकी देशों से होकर अमेरिका पहुंचे हैं.

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