...तो 7 महीने पहले ही शुरू हो गई थी योगी को यूपी में CM बनाने की तैयारी?

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बीजेपी के फैसले को सरप्राइज कहा जा रहा है लेकिन हकीकत कुछ और है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने हमेशा से गोरखपुर के इस सन्यासी को मजबूत दावेदार के तौर पर देखा है। योगी को सीएम बनाए जाने में आरएसएस की भूमिका ज्यादा नहीं है। योगी की लोकप्रियता, राजनीतिक वर्चस्व और विधानसभा चुनाव में सभी वर्गों के बीच वोटों के लिए उनकी अपील भी सीएम पद तक पहुंचने की वजह है।

पार्टी के पास थे दो संभावित CM उम्मीदवार

पार्टी के पास थे दो संभावित CM उम्मीदवार

ET के मुताबिक, बीजेपी के कई नेताओं ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि यूपी में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की तलाश करीब सात महीने पहले तेजी से शुरू हुई थी। सबसे पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पूछा गया था। अमित शाह ने राजनाथ सिंह को बताया था कि पार्टी के पास मुख्यमंत्री पद के दो संभावित उम्मीदवार हैं। जिनमें से एक नाम उनका है दूसरा योगी आदित्यनाथ का। राजनाथ सिंह ने राज्य की राजनीति में वापस जाने को लेकर सहमति नहीं दी और पार्टी को बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ने के लिए कहा था। लेकिन सीएम उम्मीदवार की तलाश रुकी नहीं। READ ALSO: यूपी के नए CM योगी आदित्यनाथ बोले- यूपी में बिना भेदभाव के बदलाव लाएंगे

सर्वे में भी योगी को मिली बढ़त

सर्वे में भी योगी को मिली बढ़त

बीजेपी के एक नेता ने बताया कि पार्टी ने राज्य में जितने भी सर्वे कराए उनमें से सभी में योगी आदित्यनाथ का नाम ऊपर रहा। योगी, राजनाथ के मुकाबले कुछ प्वाइंट से पीछे थे। बीजेपी समर्थकों के बीच कराए गए सर्वे में राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ दोनों बराबरी के आंकड़े पर थे। लगातार सर्वे में योगी के अव्वल आने और राजनाथ के सीएम बनने से इनकार के बाद योगी को यूपी चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बहुत पहले ही मुख्यमंत्री पद का दावेदार मान लिया गया था। योगी ने चुनाव प्रचार में दिन-रात एक किया और हर जाति-धर्म के बीच जाकर पार्टी के लिए वोट मांगे। योगी ने प्रदेश में तेजी से अपनी पैठ मजबूत की और राजनीतिक चुनौतियों से आसानी से निपटकर खुद को सबसे मजबूत मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश किया। READ ALSO: योगी आदित्यनाथ को CM बनाए जाने पर RSS नेता का बड़ा बयान

लोकसभा चुनाव के समय से छाए थे योगी

लोकसभा चुनाव के समय से छाए थे योगी

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, 'बीजेपी आखिरी चरण के चुनाव को लेकर चिंतित थी। कई बागी उम्मीदवार मैदान में थे। योगी आदित्यनाथ ने खासकर गोरखपुर में घर-घर जाकर वोट मांगे। योगी की मेहनत का नतीजा था कि बागी हार गए। किसी भी अन्य नेता ने चुनाव प्रचार के दौरान इतनी लगन नहीं दिखाई।' पूर्वांचल को लेकर मोदी और शाह की रणनीति को योगी ने कामयाब बनाया। 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान योगी के काम-काज और अनुशासन से अमित शाह काफी प्रभावित हुए थे। मोदी और योगी गोरखपुर में चुनाव प्रचार के लिए एक साथ गए थे। 2014 में वह राजनाथ सिंह के अलावा इकलौते ऐसे नेता थे जिन्होंने हर जगह चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। READ ALSO: PM मोदी के पास आया एक फोन और बदल गया यूपी के CM का चेहरा

सभी जातियों के बीच लोकप्रियता

सभी जातियों के बीच लोकप्रियता

योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे उनकी सभी जातियों के बीच लोकप्रियता भी एक वजह है। बीजेपी के एक सीनियर नेता ने कहा, 'योगी ठाकुर जाति से आते हैं और एक सन्यासी हैं। वह ऊंची जाति के हैं। गोरखनाथ पीठ के ज्यादातर फॉलोवर पिछड़ी जातियों के लोग हैं। इनमें खासकर यादव हैं। योगी की अपील पिछड़ी जातियों के बीच काम आई।' उन्होंने कहा कि ऊंची जाति के लोग योगी के साथ हैं और उनके फॉलोवर पिछड़ी जातियों के लोग ज्यादा हैं। योगी आदित्यनाथ इस लिहाज से राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा और केशव मौर्य के मुकाबले वोट जुटाने में बेहतर साबित हुए। गोरखपुर में उनकी पंचायत में बड़ी संख्या में मुस्लिम भी पहुंचते थे। READ ALSO: यूपी के नए सीएम योगी आदित्यनाथ का पहला ट्वीट, विकास का वादा

आरएसएस फैक्टर से किया इनकार

आरएसएस फैक्टर से किया इनकार

बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री के चयन में आरएसएस की भूमिका को खारिज किया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि आरएसएस का रोल इसमें ज्यादा नहीं रहा और न ही आरएसएस ने दखल दिया। यहां तक कि आरएसएस के आंतरिक सर्वे में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिलने के भी आसार नहीं दिखे थे।

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English summary
How BJP picked Yogi Adityanath as Uttar Pradesh chief minister before up-elections.
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