सपा के घमासान में क्या है भाजपा की भूमिका, क्यों बगावती हुए रामगोपाल?
लखनऊ। सपा परिवार में मचे संग्राम के पीछे कई नेता इसके लिए भारतीय जनता पार्टी पर भी ठीकरा फोड़ रहे हैं। सपा विधायक यहां तक कह रहे हैं कि अमर सिंह और अमित शाह दोनों की शक्लें मिलती हैं और ये दोनों मिलकर ही पार्टी के अंदर विवाद पैदा कर रहे हैं।

जिस तरह से रामगोपाल यादव ने सार्वजनिक पत्र लिखा उसके पीछे की सियासत को समझने की जरूरत है। रामगोपाल ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि जीत अखिलेश के पास है और मुलायम वाली सपा से कार्यकर्ता अपना किनारा कर लें।
भ्रष्टाचार में घिरे हैं रामगोपाल यादव
यहां गौर करने वाली बात यह है कि रामगोपाल यादव ने कभी चुनाव नहीं लड़ा है, सपा मुखिया उन्हें हमेशा से ही राज्यसभा में भेजने का काम किया है। वह उस वक्त विवादों में आ गए थे जब नोएडा के भ्रष्ठ इंजीनियर यादव सिंह के साथ उनका नाम जुड़ा।
बेटे को बचाने की हो सकती है कवायद
यही नहीं रामगोपाल यादव के बेटे पर भी सीबीआई ने शिकंज कस रखा है, ऐसे में रामगोपाल यादव को केंद्र की अच्छी-खासी जरूरत पड़ने वाली है। ऐसे में पार्टी के भीतरखआने से यह आवाज उठने लगी है कि यह सब रामगोपाल यादव अपने हित के लिए कर रहे हैं।
भाजपा के प्रति अपनी वफादारी
वह पार्टी के भीतर फूट कराकर भाजपा के प्रति अपनी वफादारी दिखाना चाहते हैं जिससे कि उन्हें और उनके बेटे को भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई से राहत मिल सके।
पार्टी के नेताओं ने रामगोपाल के खिलाफ खोला मोर्चा
सपा नेता आशू मलिक ने खुले तौर पर पत्र लिखकर रामगोपाल यादव पर निशाना साधा है कि जिनलोगों ने कभी चुनाव नहीं लड़ा, कार्यकर्ताओं के बीच उनकी कोई पहचान नहीं है वह पार्टी को तोड़ने का काम कर रहे हैं। रामगोपाल सिंह यादव कई बार अमर सिंह के खिलाफ बोल चुके हैं, उन्होंने अखिलेश यादव के उस बयान का भी समर्थन किया था कि बाहरी लोगों का पार्टी के भीतर हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एक साथ कई निशाने
ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर मचे इस घमासन में रामगोपाल यादव खुद को अखिलेश का करीबी दिखाने की कवायद में लगे हैं, ऐसे में वह ना सिर्फ खुद को साफ छवि का दिखाने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि भाजपा के आला कमान के प्रति भी अपनी करीबी को बनाए रखना चाहते हैं।












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