शर्मनाक: महिला कर्मचारियों के जबरन उतरवाए कपड़े, करवाई प्रेग्नेंसी टेस्ट, पूछे आपत्तिजनक सवाल
नई दिल्ली। गुजरात के सूरत में शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। जहां महिला ट्रेनी क्लर्क के साथ अभद्रता की गई। फिजिकल टेस्ट के नाम पर उन्हें निर्वस्त्र कर घंटों कतार में खड़ा रहने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं न तो उनकी प्राइवेसी का ख्याल रखा गया और न ही उनके साथ संवेदनशीलता दिखाई गई। उनसे आपत्तिजनक सवाल किए गए। मामला सूरत नगर निगम में ट्रेनी फीमेल्स क्लर्क के मेडिकल टेस्ट का है। SMC की महिला ट्रेनी कर्मचारियों को सूरत मगर निगम द्वारा संचालित एक अस्पताल में फिजिकल एग्जामिनेशन के लिए घंटों बिना कपड़ों के खड़ा किया गया।

महिला कर्मचारियों के साथ शर्मनाक हरकत
गुजरात के सूरत में फिटनेस टेस्ट के नाम पर महिला कर्मचारियों के कपड़े उतरवाए गए। सूरत नगर निगम की ट्रेनी महिला क्लर्क को निर्वस्त्र कर उनकी जांच की गई। सूरत नगर निगमकी महिला ट्रेनी क्लर्क के साथ की गई इस बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ा जा रहा है। मामला सामने आने के बाद जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सू्रत नगरपालिका आयुक्त बंचानिधि पाणि ने शुक्रवार को उन आरोपों की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के आदेश में कहा गया है कि करीब 10 महिला ट्रेनी क्लर्कों के साथ मेडिकल एग्जामिनेशन के नाम पर कपड़े उतरवाकर उनके साथ बदसलूकी की गई।

प्रेग्नेंसी टेस्ट के नाम पर पूछे आपत्तिजनक सवाल
महिला ट्रेनी क्लर्कों ने बताया कि उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए अस्पातल के प्रसूति विभाग में ले जाया गया। उन्हें 10-10 के समूह में बांटकर सारे कपड़े उतारने को कहा गया। जिस कपड़े में उन्हें निवर्स्त्र खड़ा करवाया गया, उस कमरे का दरवाजा तक ठीक से बंद नहीं किया गया। वहां उनकी प्राइवेसी तक का ख्याल नहीं रखा गया। जांच के दौरान महिला चिकित्सकों ने अविवाहित महिलाओं की भी गर्भावस्था से जुड़ी जांच कीं। उनसे आपत्तिजनक सवाल पूछे। उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। घंटों तक उन्हें बिना कपड़ों के खड़े रहने के लिए मजबूर किया गया।

जांच के आदेश 15 दिनों में सौंपी जाएगी रिपोर्ट
दरअसल ट्रेनी पीरियड खत्म होने के बाद ट्रेनी महिला कर्मचारियों को परमानेंट नौकरी के लिए फिजिकल टेस्ट करवाकर खुद को स्वस्थ साबित करना होता है। उन्हें मेडिकल रिपोर्ट सब्मिट करनी होती है। 3 साल की ट्रेनिंग खत्म होने के बाद कुछ महिला प्रशिक्षु लिपिकों को मेडिकल टेस्ट के लिए अस्पताल लाया गया था, जो कि अनिवार्य है। लेकिन इस जांच के लिए अस्पताल की डॉक्टरों द्वारा जो तरीका अपनाया गया वो बेहद शर्मसार करने वाला था। जहां मेडिकल टेस्ट के लिए एक-एक कर महिलाओं को बुलाया चाहिए था, वहां डॉक्टरों ने उन्हें 10 के समूह में बुलाकर बिना कपड़ों के एक साथ खड़ा किया। महिला कर्मचारियों के सात की गई बदसलूकी के खिलाफ कर्मचारी संघ ने नाराजगी जताई है और इसे मानवता के खिलाफ बताया है। सू्रत नगरपालिका आयुक्त बंचानिधि पाणि ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। सूरत के महापौर जगदीश पटेल ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।












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