Holi 2023 India की खास लोकेशंस पर एंजॉय करें, मथुरा-बरसाना के अलावा किन शहरों की होली मशहूर है, जानिए
Holi 2023 India की विविधता को सेलिब्रेट करने का मौका है। रंगों में सराबोर भारतीय तमाम गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूजे को गले लगाते हैं। मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है, जिससे त्योहार की खुशी दोगुनी हो जाती है।

Holi 2023 India के लिए खास मौका है। ऐसा इसलिए क्योंकि होली का पर्व भारत की विविधता को बेहतरीन ढंग से परिभाषित करता है। होली ऐसा मौका होता है जिसमें जाति-धर्म का भेद भुलाकर लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं। रंगों में सराबोर भारतीय पूरी दुनिया के सामने नजीर पेश करते हैं। मिसाल इस बात की पेश की जाती है कि त्यौहार के असली मायने प्रेम, सौहार्द और खुशियों की मिठास बरकरार रखना है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे अलग-अलग शहरों की होली क्यों खास है, जानिए इस आलेख में

छुट्टियों में फुरसत से घूमें भारत
Holi 2023 भारत के कुछ Must Visit Places को जानने का भी शानदार अवसर है। ऐसा इसलिए क्योंकि 'रंगों का त्योहार' सेलिब्रेट करने के साथ-साथ छुट्टियों में फुरसत निकालकर भारत की कुछ खास जगहों पर घूमने का प्रयास जरूर करना चाहिए। वन इंडिया हिंदी होली के मौके पर उत्तर प्रदेश के मथुरा, बरसाना, राजस्थान के उदयपुर, पंजाब और पश्चिम बंगाल की होली के बारे में कुछ दिलचस्प बातें शेयर कर रहा है।

मथुरा की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध
उत्तर प्रदेश में मथुरा की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है। दुनिया भर से लोग भव्य उत्सव देखने के लिए मथुरा आते हैं क्योंकि इस शहर को भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान लोग यहां फूलों और रंगों से खेलने का भरपूर आनंद लेते हैं। वहां खूब सूखे रंग, पानी के गुब्बारों और वाटर गन के साथ होली मनाई जाती है। आपको मथुरा में 'बांके बिहारी मंदिर' के आसपास भव्य समारोह का हिस्सा बनकर खुशी होगी।

बरसाना: लठमार होली का उत्साह
उत्तर प्रदेश का ही बरसाना शहर भी होली में विशेष उत्साह का केंद्र होता है। यह ऐसी जगह है जिसे आप होली के भव्य उत्सव का गवाह बनने के लिए अपने फेवरेट की सूची में जोड़ सकते हैं। बरसाना शहर 'लठ मार होली' मनाता है। यहां महिलाओं को पुरुषों को डंडों से पीटने की परंपरा है, जबकि पुरुष खुद को ढाल से बचाते हैं। यह देखना काफी दिलचस्प हो सकता है।

उदयपुर की होली में पारंपरिक लोक नृत्य और लोक गीत
राजस्थान के उदयपुर में मनाई जाने वाली होली का जश्न शहर को शाही लुक देता है। शाही परिवार के सदस्यों सहित लोग पारंपरिक राजस्थानी कपड़े पहनते हैं और बारी-बारी से अलाव की परिक्रमा करते हैं। यह 'बुराई पर अच्छाई' की जीत का प्रतीक है। पारंपरिक लोक नृत्य और लोक गीत होते हैं, जिसके बाद भव्य रात्रिभोज और शानदार आतिशबाजी होती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उदयपुर भारत में होली मनाने के लिए सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है।

पंजाब की होली में कुश्ती!
पंजाब की होली पूरे देश में होली से बहुत अलग है, जिसे सिख अपने-अपने अंदाज में मनाते हैं। वहां इसे 'होला मोहल्ला' कहते हैं। स्थानीय लोग एक परंपरा के रूप में अपने दिल की बात कहते हैं। इस दिन, वे अपनी मार्शल आर्ट, विशेष रूप से 'कुश्ती' भी दिखाते हैं, और रंगों से मनाते हैं। स्वादिष्ट हलवा, पूरी, गुजिया और मालपुए बनाकर दूसरों को परोसे जाते हैं। होली के दौरान घूमने के लिए यह निश्चित रूप से बेहतरीन जगहों में से एक है।

होली के लिए अन्य मशहूर जगहें-
पश्चिम बंगाल में, होली को गायन और नृत्य के साथ 'डोल जात्रा' के रूप में मनाया जाता है। दक्षिण भारत में लोग होली के दिन प्रेम के देवता कामदेव की पूजा करते हैं। उत्तराखंड में कुमाऊंनी होली शास्त्रीय रागों के गायन के साथ मनाई जाती है। इस बीच, बिहार में लोग परंपरागत रूप से अपने घरों को साफ करते हैं और फिर त्योहार में शामिल होते हैं।

होली पर मेला और मिठाइयों की संस्कृति
परंपरागत रूप से गांवों में होली मेले सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों की एक मजबूत भावना के साथ आयोजित किए जाते हैं। इस रंगीन त्योहार को मनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग जमा होते हैं। अलग-अलग राज्यों के लोग फूड स्टॉल पर गुजिया और मालपुए जैसी मिठाइयाँ पेश करते हैं। विशेष रूप से बच्चे होली मेला को जमकर एंजॉय करते हैं। का ध्यान आकर्षित करती हैं। अधिकांश भारतीय परिवारों में होली पर ठंडाई, गुझिया, मालपुआ और दही वड़ा जैसी विशेष मिठाइयाँ बनती हैं।

होली के त्योहार की कहानी
होली 'बुराई पर अच्छाई' की जीत का प्रतीक है। लोग होली का फेस्टिवल सर्दी को 'अलविदा' कहने और गर्मियों के स्वागत के रूप में भी मनाते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में हिरण्यकश्यपु की बहन 'होलिका' के जलने को बुराई के अंत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भक्त प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यपु के आदेश को मानने से इनकार कर दिया और भगवान विष्णु के लिए प्रार्थना करता रहा। आक्रोशित पिता हिरण्यकश्यपु अपने ही बेटे को मारने के लिए बहन होलिका की मदद लेता है। होलिका प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अलाव में बैठती है, लेकिन प्रहलाद पर कोई असर नहीं होता और होलिका जलकर भस्म हो जाती है। बुराई के अंत के इसी के संकेत के रूप में होली से एक दिन पहले 'होलिका दहन' मनाया जाता है।
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