हिंदुत्व की राजनीति देश के लिए ठीक नहीं है: पूर्व चीफ जस्टिस
जे एस खेहर ने पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से संबंधित एक आदर्श के रूप में धर्म निरपेक्षता के महत्व को रेखांकित किया
नई दिल्ली। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने हिदुत्व की राजनीति की आलोचना की है। जे एस खेहर ने कहा कि ऐसी राजनीति भारत के लिए वैश्विक शक्ति बनने की राह में बाधक बन सकती है। 24वें लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल लेक्चर में खेहर ने कहा, 'आज जो कुछ हो रहा है, वह भारत के हित में नहीं है, खासतौर से अगर हम सांप्रदायिक मानसिकता प्रदर्शित कर रहे हैं तो वह ठीक नहीं है।' जे एस खेहर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने जान-बूझकर 1947 में धर्म-निरपेक्षता को चुना था, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान ने इस्लामिक रिपब्लिक बनने का फैसला लिया। इस अंतर को समझा जाना चाहिए। दिल्ली में युवा दिवस के मौके पर संबोधित हुए पूर्व चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा कि उन्होंने अयोध्या विवाद बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की थी।

'देश में मुस्लिम विरोधी नहीं बन सकते'
पूर्व चीफ जस्टिस जे एस खेहर के कहा 'भारत वैश्विक शक्ति बनने की चाहत रखता है। वैश्विक परिदृश्य में अगर आप मुस्लिम देशों के साथ मित्रता का हाथ बढ़ाना चाहते हैं तो आप वापस अपने देश में मुस्लिम विरोधी नहीं बन सकते। अगर आप ईसाई देशों के साथ मजबूत संबंध चाहते हैं तो आप ईसाई-विरोधी नहीं बन सकते।'

'भारत धर्म को राजनीति में शामिल नहीं करता है'
जे एस खेहर ने पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से संबंधित एक आदर्श के रूप में धर्म निरपेक्षता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सफलतापूर्वक देश के नेतृत्व करने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री कहा करते थे कि भारत धर्म को राजनीति में शामिल नहीं करता है। उन्होंने कहा, 'शास्त्री ने एक बार देखा कि हमारे देश की खासियत है कि हमारे देश में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी और अन्य धर्मो के लोग रहते हैं। हमारे यहां मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर हैं लेकिन हम इन सबको राजनीति में नहीं लाते हैं । जहां तक राजनीति का सवाल है, हम उसी प्रकार भारतीय हैं जिस प्रकार अन्य लोग ।'

'अयोध्या विवाद बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की थी'
वहीं शुक्रवार को दिल्ली में युवा दिवस के मौके पर संबोधित हुए पूर्व चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा कि उन्होंने अयोध्या विवाद बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की थी। पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि हर मुद्दा जंग के जरिए नहीं सुलाझाया जा सकता, उसके लिए शांति और बातचीत ही जरिया है। उनके अनुसार अन्य देशों की तुलना में भारत जैसे देश में मुद्दों को सुलझाने के लिए शांति और बातचीत की संभावना ज्यादा है। खेहर का कहना है कि यही वजह थी जिसके कारण उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अयोध्या विवाद में मध्यस्थ बनने की पेशकश की थी।
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