हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बोले, विदेशी गाय का दूध पीने से बढ़ता है गुस्सा
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत गाय के दूध को लेकर दिए अपने बयान की वजह से चर्चा में है। राज्यपाल ने कहा कि विदेशी गाय का दूध पीने से काफी नुकसान होता है। हाल्सटेन फ्राइसियन और जर्सी गाय का दूध पीने ने इंसान के भीतर गुस्सा बढ़ता है और उसका रक्तचाप भी बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों को सुझाव दिया है कि वह विदेशी गाय या फिर जर्सी गाय का दूध पीने की बजाए देसी गाय का दूध पीएं यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

सीएम योगी की तारीफ
राज्यपाल ने यह बयान उत्तर प्रदेश के गोरखनाथ मंदिर में सनातन हिंदू धर्म में गाय की महत्ता पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। आपको बता दें कि गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैदनाथ की सालगिरह का कार्यक्रम चल रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे जोकि मठ के मुखिया है। राज्यपाल ने बताया कि उनके गांव स्थित फॉर्म हाउस में काफी सारी गाय हैं जहां उनसे मिलने वाले कई उत्पाद का इस्तेमाल किया जाता है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने गायों की रक्षा के लिए कई अच्छे कदम उठाए हैं।

200 एकड़ में 300 गाय
व्रत ने बताया कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गांव में उनका 200 एकड़ का फार्म है, जहां 300 गाय है। उन्होंने कहा कि यहां गाय के मूत्र और गोबर को जीव अमृत की तरह इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर से बनी खाद से खेत की पैदावार बढ़ती है और खेत में अधिक से अधिक केचुए पैदा होते हैं जिसकी वजह से मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है। उनके सफल प्रयोग की वजह से हरियाणा सरकार ने 25 करोड़ रुपए का अनुदान दिया और यहां किसानों को इस बाबत खाद बनाने की ट्रे्निंग दी जाती है।

खाद को लेकर किया बड़ा दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने गाय की रक्षा के लिए काफी अहम कदम उठाए हैं। राज्यपाल देवव्रत के पास पढ़ाने का भी काफी लंबा अनुभव है, उन्होंने दावा किया है कि उन्हें 30 एकड़ जमीन के लिए जीव अमृत तैयार करना था। एक तरफ जहां इतने खेत को खाद पैदा करने के लिए 2 विदेशी और जर्सी गाय की जरूरत पड़ेगी। राज्यपाल ने दावा किया है कि हिसार , कुरुक्षेत्र और नैनी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध में पाया गया है कि एक ग्राम देसी गाय के गोबर में 2 से 5 लाख करोड़ उर्वरकता को बढ़ाने वाले माइक्रो ऑर्गन होते हैं, जबकि विदेशी गाय में सिर्फ 60-70 लाख माइक्रो ऑर्गन होते हैं।
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