कर्नाटक हिजाब विवाद: 'जुमे और रमजान में मिले हिजाब पहनने की इजाजत' हाईकोर्ट ने कहा-विचार करेंगे
बेंगलुरु, 17 फरवरी: कर्नाटक हाई कोर्ट में हिजाब विवाद को लेकर आज फिर सुनवाई हुई। इस दौरान छात्राओं की ओर से अधिवक्ता विनोद कुलकर्णी ने पीठ से अनुरोध किया कि शुक्रवार को जुमा है, कृपया अभी के लिए छात्राओं को शुक्रवार के दिन हिजाब पहनने की अनुमति दे दीजिए। पीठ ने कहा कि ठीक है, हम आपके अनुरोध पर विचार करेंगे। जिसके बाद सुनावाई को शुक्रवार तक के लिए स्थिगित कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार दोपहर ढाई बजे होगी।
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हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट में आज पांचवे दिन भी सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सोशल एक्टिविस्ट आर कोतवाल ने कहा कि लिंग-धर्म के आधार भेदभाव के चलते शिक्षा के अधिकार का हनन हो रहा है। वहीं छात्रों की ओर से दलीलें दे रहे अधिवक्ता डॉ. विनोद कुलकर्णी ने मांग की कि हर शुक्रवार और रमजान के महीने में हिजाब पहनने की इजाजत दी जाएगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि आप चाहते हैं कि शुक्रवार को हिजाब पहनने की इजाजत मिले। हम इस पर विचार करेंगे।
हिजाब विवाद मुस्लिम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। संविधान की प्रस्तावना के अनुसार स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है। सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में कहा गया कि हिजाब पर रोक कुरान पर प्रतिबंध लगाने के समान है। मामले में नई याचिका को स्वीकृति दी गई। ऐडवोकेट आर. कोतवाल का कहना है कि अनुच्छेद 14, 15 और 25 के अलावा, राज्य की कार्रवाई अनुच्छेद 51 (सी) का भी उल्लंघन करती है - अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि दायित्वों के लिए सम्मान।
5 छात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनियर एडव एएम डार ने हाईकोर्ट में कहा कि, हिजाब पर सरकार के आदेश से उनके ग्राहकों पर असर पड़ेगा जो हिजाब डालते हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है। कोर्ट ने डार से अपनी वर्तमान याचिका वापस लेने और उसे नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता देने को कहा है।
इससे पहले बुधवार को याचिकाकर्ता के वकील की तरफ से तमाम दलीलें दी गई थीं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कहा था सरकार अकेले हिजाब को क्यों मुद्दा बना रही है..चूड़ी पहने हिंदू लड़कियों और क्रॉस पहनने वाली ईसाई लड़कियों को स्कूल से बाहर क्यों नहीं भेजा जाता है। कुमार ने कहा देश में झुमका, क्रास, हिजाब, बुर्का, चूडि़यां और पगड़ी पहनी जाती है। महिलाएं ललाट पर बिंदी भी लगाती हैं। मगर सरकार ने इनमें से सिर्फ हिजाब को ही चुना और उस पर पाबंदी लगाई ऐसा भेदभाव क्यों? क्या चूड़ी धार्मिक प्रतीक नहीं?












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