UNGA में पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें, वैक्सीन से लेकर आतंकवाद पर कही ये बात
न्यूयॉर्क, 25 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76 वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले सेशन के अध्यक्ष चुने गए मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद को बधाई दी। इसके बाद कोरोना महामारी में अपनी जिंदगी खोने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से पूरा विश्व 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी का सामना कर रहा है। ऐसी भयंकर महामारी में जीवन गंवाने वाले सभी लोगों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं और परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। पीएम मोदी ने अपने भाषण में वैक्सीन बनाने से लेकर अफगानिस्तान सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। ऐसे में जानिए पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें...

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PM Modi At UNGA: आतंकवाद, Pakistan और Afghanistan पर क्या बोले पीएम? | वनइंडिया हिंदी
- 'भारत का वैक्सीन डिलीवरी प्लेटफॉर्म कोविन एक ही दिन में करोड़ों वैक्सीन डोज लगाने के लिए डिजिटल सहायता दे रहा है'।
- 'मैं UNGA को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली DNA वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल से ज्यादा आयु के सभी लोगों को लगाया जा सकता है'।
- 'भारत के वैज्ञानिक एक नेजल वैक्सीन के बनाने में भी लगे हैं। मानवता के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए भारत ने एक बार फिर दुनिया के जरूरतमंदों को वैक्सीन देनी शुरू कर दी है'।
- 'मैं आज दुनिया भर के वैक्सीन मैन्युफैक्चर्स को भी आमंत्रित करता हूं कि आइए और भारत में वैक्सीन बनाइए'।
- 'जो देश आतंकवाद का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद, उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है'।
- 'ये सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो'।
- 'हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा वहां कि नाजुक स्थितियों का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश न करे'।
- 'इस समय अफगानिस्तान की जनता को वहां की महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यक आबादी को मदद की जरूरत है। इसमें हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा'।
- 'हमें ध्यान रखना होगा ओसियन रिसोर्सेज को हम यूज करें अब्यूज नहीं। हमारे समुद्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी हैं। इन्हें हमें एक्सपैंशन और एक्सक्लूजन की दौड़ से बचाकर रखना होगा'।
- 'संयुक्त राष्ट्र को स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी इफेक्टिवनेस को सुधारना होगा, रिलायबिलिटी को बढ़ाया होगा। UN पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं'।












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