सावधान! अल्ट्रा-प्रोसेड फूड पहुंचा सकता है आपको मौत के करीब, खाने की ऐसी आदतें बढ़ा देती हैं बीमारियों का खतरा
Food Habits: आज के दौर में बदलती लाइफ स्टाइल के साथ-साथ लोगों के खाने-पीने की आदतों में भी काफी बदलाव हो गया है। जंक फूड, तला-भुना खाना, पैक्ड खाद्य पदार्थ इत्यादि का उपयोग काफी बढ़ गया है। बदलते फूड हैबिट्स की वजह से बीमारियां भी बढ़ रही हैं।
हाल ही में सामने आए एक रिसर्च में दावा किया गया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन हृदय रोगों के अलावा अन्य कई बीमारियों को बुलावा देता है और अन्य चीजों के मुकाबले ज्यादा लोगों के मौत का कारण बनता है। ये रिपोर्ट ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में प्रकाशित 30 साल के स्टडी पर आधारित है।

डॉक्टर्स का कहना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को अपने सामान्य भोजन के तौर पर पेट भरने के लिए उपयोग करने पर जीवनकाल छोटा हो जाता है। इसके पर्यापत प्रूफ मौजूद हैं।
टीओआई की एक रिपोर्ट में नारायण अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पंकज वर्मा के हवाले से कहा गया, "हालांकि कभी-कभार अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन समग्र स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डाल सकता है, लेकिन आदतन और अत्यधिक सेवन इस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। स्वीकार्य अति-प्रसंस्कृत खाद्य उपभोग के लिए दैनिक सीमा निर्दिष्ट करना कठिन है।"
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, आईसीएमआर आहार दिशानिर्देशों के अनुसार, हम उनके सेवन को सीमित करने और संपूर्ण, असंसाधित या न्यूनतम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं। हम अस्वास्थ्यकर वसा, शर्करा और नमक की खपत को कम करते हुए फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, थिन प्रोटीन और स्वस्थ वसा जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों की एक विविध श्रृंखला पर जोर देते हैं। बीमारी की रोकथाम और कल्याण के लिए स्वस्थ आहार संबंधी आदतें सर्वोपरि हैं।"
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में पहले से तैयार भोजन, सॉसेज, नगेट्स, मिठाई, बिस्कुट, पेस्ट्री, बन, केक और चिप्स आदि शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, "इन खाद्य पदार्थों में शर्करा और संतृप्त वसा अधिक होती है, इसलिए इनके सेवन से हृदय रोग, मधुमेह और मोटापा जैसी बीमारियां बढ़ जाएंगी। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करना होगा और इसके अलावा साबुत अनाज, फलियां, फल और सब्जियां जैसे बहुत सारे साबुत खाद्य पदार्थ अपने आहार में शामिल करने होंगे।
मैक्स हॉस्पिटल साकेत की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ रितिका समद्दर ने के अनुसार, "अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में, मांस/पोल्ट्री/समुद्री भोजन-आधारित खाने के लिए तैयार उत्पादों को विशेष रूप से चिंताजनक माना गया है।"
इसके हानिकारक प्रभाव पर चर्चा करते हुए, नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के निदेशक डॉ. अजय अग्रवाल ने कहा,"इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन के अधिक सेवन से हृदय रोग से संबंधित मौतों का जोखिम लगभग 50% बढ़ जाता है। चिंता और सामान्य मानसिक विकारों का जोखिम 48-53% अधिक है, और टाइप 2 मधुमेह का जोखिम 12% अधिक है।" उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जितना संभव हो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
सर गंगा राम अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और उपाध्यक्ष डॉ.पीयूष रंजन कहते हैं, "दैनिक जीवन में, इस प्रकार के भोजन से बचा नहीं जा सकता है, लेकिन उनका सेवन कम से कम किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, संतुलित आहार महत्वपूर्ण है।
इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए, पारस हेल्थ में नैदानिक पोषण और आहार विज्ञान की प्रमुख नीलिमा बिष्ट ने कहा, "अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचने पर ध्यान केंद्रित करने की तुलना में संपूर्ण खाद्य पदार्थों से भरपूर संतुलित आहार खाना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद है।"












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