जिंदा इंसान के बराबर हुईं गंगा-यमुना, मिले सारे कानूनी अधिकार
मोहम्मद सलीम की याचिका पर कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए गंगा और यमुना को जीवित इकाई घोषित किया है। अब गंगा और यमुना को भी जीवित इंसान की तरह सारे कानूनी अधिकार मिले हैं।
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा और यमुना को जीवित इकाई घोषित किया है और उसे सारे कानूनी अधिकार दिए हैं जो एक इंसान को हासिल हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले से अब प्रदूषित गंगा और यमुना को साफ बनाने के प्रयासों को गति मिलने के आसार हैं।

मोहम्मद सलीम की गंगा बचाओ मुहिम पर हाईकोर्ट की मुहर
उत्तराखंड निवासी मोहम्मद सलीम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला दिया। इसके बाद अब गंगा और यमुना के नाम से याचिकाएं और परिवाद दाखिल की जा सकेंगी। कोर्ट ने केंद्र को दोनों नदियों की सफाई और प्रबंधन के लिए एक बोर्ड बनाने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है।

दोनों नदियों को मिले इंसानों जैसे कानूनी हक
इस मामले को स्पष्ट करते हुए याचिकाकर्ता मोहम्मद सलीम के एडवोकेट एमसी पंत का कहना है कि कोर्ट के इस फैसले के बाद गंगा और यमुना को एक जीवित इंसान की तरह माना जाएगा। दोनों नदियों के आधिकारिक प्रतिनिधि उनको मिले कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

प्रतिनिधियों के माध्यम से नदियां करेंगी अधिकारों का इस्तेमाल
जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस आलोक सिंह की बेंच ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जनरल, उत्तराखंड चीफ सेक्रेटरी और एडवोकेट जनरल को गंगा को मिले कानूनी अधिकारों के इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया है।
कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए देहरादून के डीएम को ढकरानी में गंगा की शक्ति नहर से अतिक्रमण हटाने के लिए 72 घंटे का समय दिया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को गंगा और सहायक नदियों से जुड़ी संपत्तियों के बंटवारे को विवाद को सुलझाने के आदेश दिए हैं।

न्यूजीलैंड के बाद भारत में किया गया यह काम
गंगा को जीवित इकाई घोषित करने से कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड ने वानगानोई नदी को जीवित इकाई घोषित किया और उसे इंसान के बराबर कानूनी हक दिए।। न्यूजीलैंड की यह नदी जीवित घोषित होनेवाली पहली नदी बन गई। इसके बाद गंगा को यह दर्जा दिया गया। गंगा भारत की ऐसी पहली नदी बन गई है जिसे जिंदा घोषित किया गया है।












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