BS Yediyurappa: तो इस वजह से भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा को लगाया किनारे, CM बोम्मई को मिली ECC की कमान

BS Yediyurappa: आखिर क्यों कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के प्रचार कमेटी की कमान नहीं सौंपी गई, पार्टी के अंदरूनी नेता बता रहे हैं वजह।

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BS Yediyurappa: कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री बासवाराज बोम्मई को भारतीय जनता पार्टी की प्रचार कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। पार्टी के करीबी सूत्र का करना है कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने यह कदम लिंगायत समुदाय पर पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के प्रभाव को कम करने के लिए किया है। पिछले कई दशक से येदियुरप्पा का लिंगायत समुदाय पर बड़ा व्यापक प्रभाव है, इसी प्रभाव को कम करने के लिए पार्टी ने यह कदम उठाया है।

आखिर क्या है यह इशारा?

आगामी चुनाव से पहले भाजपा ने प्रदेश में बड़ा संकेत देने की कोशिश की है। हालांकि इसके साथ ही पार्टी यह भी संकेत देने की कोशिश कर रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ येदियुरप्पा प्रचार में अहम भूमिका निभाएंगे। हाल ही में कर्नाटक में अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने कहा था कि मुझे पीएम मोदी और येदियुरप्पा में काफी भरोसा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को येदियुरप्पा के पूर्ण बहुमत के सपने को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जिस तरह से केंद्रीय नेतृत्व ने येदियुरप्पा पर भरोसा जताया था उसके बाद लग रहा था कि येदियुरप्पा को प्रचार कमेटी की कमान सौंपी जाएगी। लेकिन पार्टी ने येदियुरप्पा की जगह बोम्मई को चुनाव प्रचार कमेटी की कमान सौंप दी।

येदियुरप्पा के बेटे बने अड़चन

पार्टी के इस फैसले के बाद येदियुरप्पा खेमे में भ्रम और नाराजगी दोनों ही है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि बोम्मई प्राकृतिक पसंद हैं, उन्होंने खुद ही येदियुरप्पा की जगह ली है, येदियुरप्पा 80 साल से ऊपर की हैं। दरअसल पार्टी बोम्मई के के चयन से इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि पार्टी के भीतर आरएसएस मुखिया बीएल संतोष येदियुरप्पा के समर्थन में नहीं हैं, वह पार्टी पर उनके नियंत्रण का विरोध कर रहे हैं। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि यह पार्टी के भीतर कोई खुफिया बात नहीं है कि बीएल संतोष और येदियुरप्पा के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। आरएसएस खेमा पार्टी के नेतृत्व पर नियंत्रण रखना चाहता है, लेकिन वह यह भी जानते हैं कि येदियुरप्पा पार्टी के लिए काफी अहम हैं। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने जिस तरह से येदियुरप्पा की तारीफ की, उस बीच संघ ने यह बड़ा फैसला लेकर स्पष्ट कर दिया है कि वह इस पद पर अपने खेमे के नेता को चाहते हैं।

आरएसएस की पसंद!

पार्टी के करीबी नेता ने कहा कि येदियुरप्पा हिजाब बैन और हलाल विवाद का विरोध कर रहे थे, जिसे आरएसएस के रणनीतिकारों ने ही आगे बढ़ाया है। ऐसे में येदियुरप्पा का यह रुख आरएसएस को पसंद नहीं आया। पार्टी के एक और नेता ने कहा कि ईसीसी के मुखिया पद पर येदियुरप्पा की नियुक्ति का विरोध इसलिए भी हो रहा था क्योंकि उनके छोटे बेटे बीवाई विजयेंद्र उनके उत्तराधिकारी के तौर पर आगे आ रहे थे। अगर येदियुरप्पा को प्रचार कमेटी की कमान सौंपी जाती तो भी उनके बेटे के हाथ में यह पद होता। जब येदियुरप्पा सीएम थे उस वक्त भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा था। कई नेताओं ने विजयेंद्र का प्रशासन पर नियंत्रण का विरोध किया था।

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