कर्नाटक चुनाव में 1.65 करोड़ इंटरनेट यूजर्स के लिए भाजपा-कांग्रेस के सोशल मीडिया वॉर रूम में घमासान
नई दिल्ली। कर्नाटक के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एक तरफ जहां दोनों पार्टियों के दिग्गज नेता एक के बाद लगातार दौरे कर रहे हैं और लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया के जरिए लोगों को अपनी ओर खींचने की कवायद तेज हैं। दोनों ही बड़ी पार्टियों ने सोशल मीडिया के जरिए वोटरों को लुभाने के लिए सोशल मीडिया वॉर रूम बना रखा है, जहां से दोनों दल एक दूसरे के खिलाफ निशाना साधते हैं और लोगों के बीच अपनी पैठ को मजबूत करते हैं। इस सोशल मीडिया के वॉर रूम में तमाम पढ़े लिखे, इंजीनियर, वकील और समाज के तकरीबन हर वर्ग से जुड़े लोग मौजूद हैं।

भाजपा का सोशल मीडिया वॉर रूम
भाजपा के सोशल मीडिया रूम में आईआईएम लखनऊ से पढ़े छात्र, वकील से लेकर पूर्व पत्रकार शामिल हैं , जो भाजपा की राजनीतिक जमीन को कर्नाटक में मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। यह सोशल मीडिया हेडक्वार्टर बेंगलुरू में स्थित है, जहां से तमाम पोस्ट किए जाते हैं। इस सोशल मीडिया रूम को चलाने वाले अधिकतर लोग 30 वर्ष से कम आयु के हैं। यहां काम करने वाले कीर्ति जोशी का कहना है कि हमारा काम करने का कोई निर्धारित समय नहीं है, लेकिन हम कभी भी ऑफलाइन नहीं होते हैं। उनका कहना है कि वह इस पार्टी में इसलिए आए क्योंकि यह पार्टी हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी है और यह देश के साथ विकास की बात करती है। हम सभी लोग यहां स्वेच्छा से काम कर रहे हैं क्योंकि हमें पार्टी के एजेंडा में विश्वास है। भाजपा के इस हेड ऑफिस मल्लेश्वरम में स्थित है और यहां हर क्षेत्र से जुड़े 30 लोग काम करते हैं, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी है सोशल मीडिया कैंपेन चलाना, इसकी कमान बालाजी श्रीनिवास के पास है।

येदुरप्पा का अलग सोशल मीडिया ऑफिस
वहीं भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदुरप्पा का अपना अलग सोशल मीडिया वॉर रूम है, जोकि टोनी सदाशिवनगर में स्थित है, जिसके राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म राजनीति चलाती है। यह पिछले वर्ष अक्टूबर माह से सक्रिय है। यहां भी 30 लोग काम करते हैं और इसकी कमान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी राजनीति के हाथ में है। इसका मुख्य काम है मुख्यमंत्री उम्मीदवार येदुरप्पा के डिजिटल कैंपेन को हर किसी तक पहुंचाना। राजनीतिक के को फाउंडर शारसचंद्र का कहना है कि उन्हें यह पता है कि कैसे सोशल मीडिया काम करता है और कैसे राजनेता इसका इस्तेमाल करते हैं। जिस वक्त राहुल गांधी कर्नाटक के दौरे पर तमाम मंदिर जा रहे थे तो हमने हैशटैक इलेक्शन हिंदू चलाया था, जिसपर आठ घंटे के भीतर 30 लाख लोगों ने कमेंट किया था।

कांग्रेस का सोशल मीडिया वॉर रूम
वहीं अगर कांग्रेस के सोशल मीडिया वॉर रूम में नजर डालें तो पार्टी का कार्यालय कनिंघम रोड पर स्थित है, जिसमे 30 लोग दो शिफ्ट में काम करते हैं। इस कार्यालय में ग्राफिक डिजाइनर से लेकर, वीडियो प्रोडक्शन और पार्टी के नेता व कार्यकर्ता काम करते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य है कि सरकार के सकारात्मक कार्यों को लोगों तक पहुंचाना, सोशल मीडिया पर लोगों की राय लेना। इसकी कमान दिनेश गुंडू राव के हाथ में है। कांग्रेस के सोशल मीडिया इंचार्ज श्रीवत्स बी का कहना है कि इस ऑफिस से हम महज एक घंटे के भीतर 12 लाख लोगों का संदेश हासिल कर सकते हैं। यहां से कुछ लोकप्रिय हैशटैग चलाए गए, जिसमे अहम है नम्मा बेंगलुरू, हन्मा हेम्मे, यानि हमार बेंगलुरू हमारा गर्व। इस अभियान में लोगों को सरकार के कामों से अवगत कराया गया। दिनेश गुंडू का कहना है कि सरकार ने शहर के लिए काफी काम किया है।

कितने लोगों तक है पहुंच
भाजपा के सोशल मीडिया पर नजर डालें तो कर्नाटक भाजपा के ट्विटर हैंडल पर कुल 159000 फॉलोवर हैं, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पीयूष गोयल भी फॉलो करते हैं। इस हैंडल से अबी तक कुल 183000 ट्वीट किए जा चुके हैं। वहीं फेसबुक पेज पर नजर डालें तो कर्नाटक भाजपा के फेसबुक पेज पर कुल 540026 फॉलोवर हैं, जबकि 528763 लाइक्स हैं। येदुरप्पा के ट्विटर पेज को 240000 लोग फॉलो करते हैं, जबकि फेसबुक पर उनके तकरीबन 15 लाख फॉलोवर हैं। वहीं अगर कांग्रेस के सोशल मीडिया पेज पर नजर डालें तो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के ट्विटर पेज पर कुल 130000 फ़ोलवर हैं, जबकि कांग्रेस के कर्नाटक ट्विटर हैंडल पर कुल 34224 फॉलोवर हैं।

क्या है कर्नाटक का पूरा सियासी गणित
आपको बता दें कि 2016 के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में कुल मतदाताओं की संख्या 4.96 करोड़ है, वहीं हर विधानसभा क्षेत्र में वोटरों की संख्या 2.21 लाख है। इस बार 15.42 लाख ऐसे मतदाता हैं जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कर्नाटक में कुल 16.41 मिलियन यानि तकरीबन 1.65 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं। कर्नाटक में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं, जिसमे से कांग्रेस के पास मौजूदा समय में 122 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास सिर्फ 40 विधायक हैं। वहीं 2008 के चुनाव में यहां भाजपा के पास कुल 110 सीटें थीं और कांग्रेस के खाते में 80 सीटें थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां कुल 20 फीसदी वोट मिला था, जबकि कांग्रेस को 36.6 फीसदी वोट मिला था। 2008 में कांग्रेस को 35.1 फीसदी वोट मिला था और भाजपा को 33.9 फीसदी वोट मिला था।
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