मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल! 233 पेज वाली हेमा आयोग की रिपोर्ट जारी, यौन उत्पीड़न के आरोपों से भरी पड़ी
मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों की जांच के गठित हेमा आयोग की रिपोर्ट में कास्टिंग काउच और यौन उत्पीड़न के गंभीर मुद्दों का जिक्र किया गया है। कमीशन फिल्म इंडस्ट्री के अंदर हुई कुछ ऐसी घटनाओं पर सवाल खड़े करती है, जिससे मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली ही सवालों के घेरे में है। इस बीच केरल सरकार ने सोमवार को 233 पेज की जस्टिस के हेमा कमेटी की रिपोर्ट जारी कर दी है।
केरल सरकार द्वारा गठित एकल सदस्यीय समिति, जिसने मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार की स्थिति की जांच की। रिपोर्ट में कथित तौर पर उद्योग में बड़े पैमाने पर यौन उत्पीड़न का खुलासा किया गया है।

दरअसल, केरल सरकार ने सोमवार को 233 पेज की जस्टिस के हेमा कमेटी की रिपोर्ट जारी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलयालम उद्योग में निर्देशकों, निर्माताओं और अभिनेताओं सहित 15 बड़े शॉट्स को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में इंडस्ट्री में पुरुष वर्ग की प्रधानता है और यही तय करता है कि किसे इंडस्ट्री में रहना चाहिए और किसे फिल्मों में काम मिलेगा और किसे नहीं।
रिपोर्ट में अभिनेताओं और अन्य तकनीशियनों सहित उद्योग में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के बारे में चिंताजनक विवरण भी सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पीड़न के शिकार लोग अपनी जान के डर से पुलिस के पास जाने से झिझकते थे।
इसके अलावा रिपोर्ट में कास्टिंग काउच, वेतन असमानता और उद्योग में महिलाओं के लिए गोपनीयता और पर्याप्त सुविधाओं की कमी के बारे में बात की गई है।
बता दें कि सरकार की ओर जारी हेमा कमीशन रिपोर्ट 51 व्यक्तियों के बयान पर आधारित है। रिपोर्ट में साइबरबुलिंग और स्पष्ट धमकियों सहित ऑनलाइन उत्पीड़न का जिक्र है। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न के समाधान के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के गठन का सुझाव दिया गया है, जिसमें समिति में उद्योग संघों को शामिल करने की सिफारिशें भी शामिल हैं।












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