Big Alert: अगले चंद घंटों में हो सकती है इन राज्यों में भारी बारिश, पर्यटकों के लिए अलर्ट जारी
नई दिल्ली। केरल के समुद्र से उठकर चला दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस वक्त पूरी गति के साथ आगे बढ़ रहा है और उसने देश के लगभग आधे से ज्यादा भाग को कवर कर लिया है इसी वजह से देश के कई जगहों से भारी बारिश की खबर है, मौसम की भविष्यवाणी करने वाली प्राइवेट कंपनी स्काईमेट के मुताबिक अगले चंद घंटों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और यूपी के कुछ जगहों पर भारी से भारी बारिश होने की आशंका है, इसलिए विभाग और प्रशासन ने पर्यटकों के लिए अलर्ट जारी किया है और उन्हें सावधान रहने के लिए कहा है।

अगले चंद घंटों में हो सकती है इन राज्यों में भारी बारिश
स्काईमेट ने कहा है कि कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड तीनों ही पर्यटन स्थल हैं और इन तीनों ही जगह पर अच्छी-खासी बारिश होने की उम्मीद है लेकिन इस वजह से भूस्खलन, जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है, इस वक्त इन सभी जगह सैलानियों की अच्छी खासी भीड़ है और इसी वजह से उसने अलर्ट जारी किया है।

पर्यटकों के लिए अलर्ट जारी
विभाग ने कहा है कि उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश , हरिद्वार और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, किन्नौर और मंडी में अगले 24 घंटो के दौरान भारी बारिश हो सकती है, इसके साथी ही तेज हवाएं चलेंगी और बिजली भी कड़केगी, लेकिन दिल्ली में मॉनसून जुलाई के पहले सप्ताह ही पहुंचेगा। फिलहाल पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश का दौर चला है, उसने प्रदूषण को काफी कम कर दिया है। आज सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 पर आ गया था। इस स्तर को संतोषजनक माना जाता है।

गुजरात में भी भारी बारिश की आशंका
दक्षिण पश्चिम मॉनसून 2019 ने काफी लंबे इंतज़ार के बाद गुजरात में प्रवेश कर गया है। जिसके बाद राज्य के दक्षिणी जिलों में बारिश की मध्यम से भारी बौछारें पड़ रही हैं। इस समय मॉनसून की उत्तरी सीमा वेरावल और सूरत से गुजर रही है, चक्रवाती तूफान 'वायु' की वजह से गुजरात में बारिश की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, फिलहाल अब मॉनसून राज्य में प्रवेश कर गया है, जिसकी वजह से बारिश की संभावना है जिससे लोगों को गर्मी से निजात मिलेगी।

84 फीसदी कम बारिश
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार इस साल मौसम विभाग के 84 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है, भारत में बारिश का मौसम एक जून से शुरू होकर 30 सितंबर तक रहता है, लेकिन 22 जून तक मॉनसून में औसतन करीब 39 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है।












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