Attari Border: मां से अलग हुई बेटी, घर छोड़ कर जाने को मजबूर! अपनों से बिछड़ने का दर्द देख पसीज जाएगा आपका दिल
Attari Border: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए और आदेश जारी किया कि वे 27 अप्रैल तक भारत छोड़ दें।
अब डेडलाइन के आखिरी दिन, देशभर से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक अटारी बॉर्डर पर जमा हो रहे हैं। बॉर्डर पर जुदाई, दर्द और बिछड़ने की कई भावुक तस्वीरें देखने को मिल रही हैं।

बॉर्डर पर बहते आंसू, टूटते रिश्ते
अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर ओर एक अजीब सा सन्नाटा और गम का माहौल है। जिन परिवारों ने सालों पहले सीमाओं के बंधनों को नजरअंदाज कर रिश्ते बनाए थे, अब उन्हें अचानक बिछड़ने का दर्द झेलना पड़ रहा है। कहीं बच्चे अपनी मां का हाथ पकड़कर रो रहे हैं, तो कहीं बुजुर्ग अपने घर लौटते वक्त नम आंखों से आखिरी बार पीछे मुड़कर देख रहे हैं।
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मां-बेटी की दर्दभरी जुदाई
ऐसी ही एक कहानी सामने आई, जिसने वहां मौजूद हर इंसान का दिल छू लिया। एक मां के पास भारतीय पासपोर्ट था और बेटी के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट। सरकार के आदेश के बाद दोनों को अलग होना पड़ रहा था। बेटी ने रोते हुए कहा, "हम मां को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। या तो मां भी साथ चलें, या फिर हम यहीं रहेंगे।" इस मासूम जिद के आगे हर आंख भर आई।
साहिबा की कहानी ने बढ़ाया दर्द
राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली साहिबा खान (बदला हुआ नाम) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दस साल पहले उनकी शादी पाकिस्तान के कराची में हुई थी। साहिबा अपनी बीमार मां से मिलने दिल्ली आई थीं, लेकिन पहलगाम हमले के बाद अचानक उन्हें और उनके बच्चों को वापस लौटने का फरमान मिल गया। साहिबा के पास भारतीय पासपोर्ट है, जबकि उनके छोटे बच्चों के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट। अब मां अपने बच्चों के साथ रह भी नहीं सकती और अलग भी नहीं होना चाहती। अटारी बॉर्डर पर उनकी बेबसी देख हर कोई भावुक हो गया।
सीमा पर बंटे दिल और रिश्ते
ऐसे कई परिवार हैं जिनके दिल और रिश्ते अब सीमाओं में बंट गए हैं। कई बुजुर्ग अपने बच्चों को गले लगाकर रोते दिखे, कई छोटे बच्चे समझ भी नहीं पा रहे थे कि क्यों उन्हें अपने घर से दूर किया जा रहा है। अटारी बॉर्डर इन दिनों न सिर्फ दो देशों के बीच खड़ी दीवार का प्रतीक बन गया है, बल्कि बंटते हुए दिलों और टूटते सपनों का भी गवाह बन गया है।
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