भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर बोले- मैंने मायावती को पांच बार कॉल किया था लेकिन कोई जवाब नहीं मिला
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के लिए वोटिंग के दिन धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं। सात अप्रैल को बसपा प्रमुख मायावती और अखिलेश यादव अपनी पहली चुनावी रैली में एक मंच पर नजर आएंगे। उनकी ये रैली सहारनपुर में होगी। सहारनपुर लोकसभा सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में मायावती के लिए खास रहा। पिछले चार संसदीय चुनावों में बीएसपी को दो बार जीत मिली है।

16 महीने बाद जेल से रिहा
लेकिन सहारनपुर की सीट कई चीजों के लेकर चर्चा में रही है। खासकर भीम आर्मी के नेता और 29 साल के चंद्रशेखर आजाद को लेकर। सहारनपुर दंगे को लेकर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद को दंगों में मुख्य भूमिका के लिए आरोपी बनाया गया। उन्हें तीन महीने बाद हिमाचल प्रदेश में गिरफ्तार किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर लगे आरोपों को वापस लेने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्हें 16 महीने बाद रिहा किया गया। इसी बीच चंद्रशेखर ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि उन्होंन मायावती को पांच बार कॉल किया था लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिला।

मोदी-योगी शासन ने मुझ पर 43 झूठे मुकदमे लगाए
दिल्ली में एक सार्वजनिक रैली आयोजित करने के बाद चंद्रेशेशर ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि मोदी-योगी शासन ने मुझे 16 महीने की जेल दी और मुझ पर 43 झूठे मुकदमे लगाए। मैं उस पार्टी के लिए कैसे काम कर सकता हूं, जिसने मुझे नष्ट करने की कोशिश की? चंद्रशेखर ने मायावती के बारे में बात करते हुए कहा कि मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं और कभी भी उनकी हितों को कमतर करने के लिए कुछ नहीं करूंगा। लेकिन उन्हें मुझ पर भरोसा करना होगा। उन्होंने कहा कि मायावती ने प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात पर नराजगी जताई।

इन दो वजहों से चंद्रशेखर ने बदली अपनी रणनीति
हाल ही में आजाद ने कहा था कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता बने रहेंगे और सक्रिया राजनीतिक में प्रवेश करेंगे। लेकिन उन्होंने अपने हृदय परिवर्तन के पीछे दो कारण बताए हैं। जिसमें पहला भाजपा नेताओं की ओर से की जा रही टिप्पणियां जो संविधान को बदलने की ओर इशारा करती हैं। और दूसरा भाजपा की ओर से दलितों का अपमान है। चंद्रशेकर ने कहा कि फरवरी में प्रधानमंत्री ने वाराणसी में संत रविदास मंदिर का दौरा किया, मैं भी वहां भीड़ में था और देखा कि कैसे उनकी सुरक्षा ने हमारे धर्मगुरुओं को अपमानित किया। वो बाहर व्यकित थे और हम भक्त थे।
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