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आवारा पशुओं के पुर्नवास पर सुनवाई करने वाले थे HC के जज, कोर्ट पहुंचे तो दर्जनों गायों ने रोकी उनकी कार

आवारा पशुओं के पुर्नवास पर सुनवाई करने वाले थे HC के जज, कोर्ट पहुंचे तो दर्जनों गायों ने रोकी उनकी कार
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अहमदाबाद, 18 जनवरी। सड़कों पर मवेशी जानवरों से हर कोई परेशान है। वहीं अब गुजरात के मुख्‍य न्‍यायाधीश को भी इस समस्‍या से रूबरू होना पड़ा वो भी तब, जब वो आवारा पशुओं के पुनर्वास पर सुनवाई करने के लिए कोर्ट पहुंचे थे। तभी उनकी कार कोर्ट परिसर में दर्जनों गायों ने रोक ली पुलिस के भगाने पर भी वो वहीं डटी रहीं। इस घटना से वो इतने परेशान हो गए कि केस की सुनवाई के दौरान उन्‍होंने आप बीती सुना डाली। जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।

कोर्ट परिसर में गायों ने जमाया डेरा

कोर्ट परिसर में गायों ने जमाया डेरा

दरअसल, गुजरात कोर्ट की खंडपीठ क्षतिग्रस्त सड़कों और आवारा पशुओं के पुनर्वास पर गुजरात सरकार के अपने पहले के आदेश का पालन न करने पर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी। तभी मुख्य न्यायाधीश (सीजे) अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति ए जे शास्त्री की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए बताया कि कैसे गुजरात उच्च न्यायालय को भी मवेशियों ने प्रभावित किया है। लगभग एक दर्जन गायों ने कोर्ट परिसर में सड़क को अवरुद्ध कर दिया।

पुलिस भी सीटी बजाकर इसे नहीं हटा सकी

पुलिस भी सीटी बजाकर इसे नहीं हटा सकी

सीजे कुमार ने अपनी आपबीती सुनाई उन्‍होंने बताया कि सोमवार को हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश करते समय उनकी कार को गायों ने रोक दिया था। उन्होंने कहा, मेरी कार आज कोर्ट में प्रवेश कर रही थी और करीब 10-12 गायों ने सड़क जाम कर दिया था। पुलिस भी सीटी बजाकर इसे नहीं हटा सकी।"

अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी

अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी

अदालत राज्य में सड़कों की खराब गुणवत्ता और अहमदाबाद में मवेशियों की समस्या और पार्किंग की समस्याओं के संबंध में एक जनहित याचिका में अपने 2018 के फैसले में निहित निर्देशों का पालन न करने पर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी।मुस्तक हुसैन मेहंदी हुसैन कादरी ने अधिवक्ता अमित पांचाल के माध्यम से अवमानना ​​याचिका दायर की थी।

कानून तो बन गया है, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका है

कानून तो बन गया है, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका है

याचिका में कहा गया है कि आवारा पशुओं के समुचित पुनर्वास, बेहतर सड़कों और यातायात निषेधाज्ञा के संबंध में 2018 में न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्देशों का आज तक पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अहमदाबाद पुलिस आयुक्त ने इस मुद्दे को हल करने के लिए एक अधिसूचना जारी की है, और अहमदाबाद के बाहर के क्षेत्रों के लिए इसे नगर निगमों और राज्य सरकार को देखना होगा।

सरकारी वकील मनीषा लवकुमार ने कहा मवेशी अतिचार अधिनियम और बॉम्बे पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं लवकुमार ने कहा, "हमने भारी वाहनों वाले क्षेत्रों में मवेशी मुक्त क्षेत्र भी आवंटित किए हैं। कोर्ट ने हालांकि कहा कि कानून के क्रियान्वयन में ढिलाई बरती गई है। बेंच ने कहा, "कानून तो बन गया है, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका है। इसलिए न्यायालय ने कानून के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण को शामिल करने पर विचार किया।

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English summary
HC judge hearing on rehabilitation of stray animals, dozens of cows stopped their car when they reached the court
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