नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ बोले वेंकैया नायडू, कहा- ये हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं
नई दिल्ली, जनवरी 03। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सोमवार को केरल के कोट्टयम जिले में कैथोलिक समुदाय के एक आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक संत कुरियाकोस इलियास चावरा की 150वीं पुण्यतिथि के अवसर पर निकटवर्ती मन्नानम में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। इस दौरान वेंकैया नायडू ने अपने संबोधन में नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ बोलते हुए कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषण देश की संस्कृति, संविधान और लोकाचार के खिलाफ होते हैं। वेंकैया नायडू ने कहा कि हर व्यक्ति को अपना पसंदीदा धर्म अपनाने का और उसके प्रचार का अधिकार है।

नफरती लोगों से दूर रहना होगा- वेंकैया नायडू
वेंकैया नायडू ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषण और लेखन संवैधानिक अधिकारों और हमारी संस्कृति के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों की बुराई करने और समाज में मतभेद पैदा करने के प्रयासों के खिलाफ हमें खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को देश में अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार है, लेकिन नफरती लोगों से हमें दूर रहना होगा।
आज हमारे समाज को एक संत चावरा की आवश्यकता है- नायडू
वेंकैया नायडू ने 19वीं सदी के कैथोलिक पादरी, दार्शनिक और समाज सुधारक संत चावरा को लेकर कहा कि उन्होंने हमें यही सिखाया है कि शांतिपूर्ण और पवित्र मानवीय संबंध किसी भी चीज से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं। नायडू ने कहा, "आज हमें हर समुदाय में एक चावरा की आवश्यकता है, वो एक महान व्यक्ति के रूप में हमेशा काम करते रहे। उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने के लिए काम किया।"
छात्रों के लिए अनिवार्य हो सामुदायिक सेवा- नायडू
वेंकैया नायडू ने कहा कि हमें आज जरूरत है कि हमें कम उम्र से ही बच्चों के अंदर सेवा की भावना पैदा करने की जरूरत है। नायडू ने सुझाव दिया कि एक बार महामारी खत्म हो जाने के बाद सरकारी और निजी दोनों स्कूल के छात्रों के लिए कम से कम 2-3 सप्ताह की सामुदायिक सेवा अनिवार्य करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे लिए पूरी दुनिया एक परिवार की तरह है, हम 'वसुधैव कुटुम्बकम' पर चले हैं और उसे हमें आगे बढ़ाना चाहिए।












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