तो मीडिया अब केजरीवाल को गंभीरता से नहीं लेता
नई दिल्ली (विवेक शुक्ल)। कहते हैं, वक्त बदलते देर नहीं लगती। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल इस बात को आजकल जरूर समझ रहे होंगे। एक दौर था, जब अरविंद केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस को सारे चैनल लाइव दिखाते थे। देश के हर छोटे-बड़े खबरिया चैनलों और अखबारों के पत्रकार वहां होते थे कवरेज के लिए।

कल संजीव चतुर्वेदी को एम्स से हटाए जाने के सवाल पर उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस की। सिर्फ दो चैनलों ने लाइव दिखाया। बाकी ने नहीं। वरिष्ठ पत्रकार ओमकार चौधरी कहते हैं कि इससे उन्हें अहसास हो जाना चाहिए कि मीडिया के बड़े हिस्से ने उन्हें गंभीरता से लेना बंद कर दिया है।
उधर एक राय यह भी है कि मीडिया अब ईमानदार नहीं रहा, उसे अब सिर्फ बिकाऊ माल की तलाश रहती है। आसाराम को जमानत मिल जाएगी तो कई दिनों तक वही उसके लिए महापुरुष हो जाऐंगें। जैसे बिकने की उम्मीद खत्म होते ही अन्ना भी उसके लिए कूड़ा हो गए हैं।
अरविंद केजरीवाल के एक दौर में करीबी रहे फिरोज बख्त अहमद कहते हैं कि केजरीवाल से जनता और मीडिया का मोहभंग तब सेशुरू हो गया था,जब उऩ्होंने रेल भवन के बाहर रात धरना दिया था। तब सबको समझ आ गया कि वे बेहद गैर-जिम्मेदार शख्स हैं। जल्दी ही उन्हें दिन में तारे नजर आएंगे जब दिल्ली विधान सभा का दुबारा चुनाव होगा और उसके नतीजे आएंगे।












Click it and Unblock the Notifications