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गणतंत्र दिवस पर क्या कभी पाकिस्‍तान बना हैं हमारे देश का मेहमान? जानें अब तक कौन से देश बने चीफ गेस्‍ट

Has India ever made the leader of Pakistan the chief guest on Republicday. Know which countries have become our guests on Republic Day after India independence, गणतंत्र दिवस में दो बार पाकिस्‍तान को चीफ गेस्‍ट के रुप में आमंत्रित किया गया।जानें भारत की आजादी के बाद बाद कौन कौन देश हमारे बन चुके हैं

बेंगलुरु। इस वर्ष हमारा भारत देश 26 जनवरी को अपना 71वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। देश की राजधानी दिल्ली समेत देश भर में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी अंतिम चरण पर है। ये केवल एक राष्‍ट्रीय पर्व ही नहीं बल्कि हमारे देश के गौरव और सम्मान का दिन हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दिल्ली में लाल किले पर परेड होगी।

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भारत हर वर्ष अवसर पर भाग लेने के लिए किसी मित्र देश के प्रतिनिधि को मुख्‍य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करता हैं। गणतंत्र दिवस में किसी भी मुख्‍य अतिथि का आना काफी अहम होता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के तौर पर ब्राजील के 38वें राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को आमंत्रित किया गया है।

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भारत अतिथि का चयन आसान नहीं होता है, इसके लिए एक लंबी जटिल प्रक्रिया होती है, गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि को लेकर फैसला भारत के राजनयिक हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है। कई फैसलों के बाद भारत उस देश को चीफ गेस्‍ट के तौर पर चुनता है जिसके साथ भारत या तो अपनी दोस्‍ती को और मजबूत करना चाहता है या फिर उसके साथ दोस्‍ती शुरू करना चाहता है।

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विदेश मंत्रालय इस पर काम करता है, वो भारत और उसके करीबी देश के बीच संबंधों को ध्यान में रखकर कई पहलुओं पर विचार करता है, फिर वो अतिथि के बारे में निर्णय लेता है और प्रधानमंत्री के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी ली जाती हैं। भारत की आजादी के पूर्व पाकिस्‍तान जो हमारे देश का हिस्‍सा हुआ करता था वो पिछले कई दशकों से भारत का सबसे कट्टर दुश्‍मन हैं। तो जेहन में यह विचार आना लाज़मी हैं कि क्या वर्तमान समय में पूरी दुनिया में भारत के लिए जहर उगलने और बार-बार परमाणु युद्ध की धमकी देने वाला पड़ोसी मुल्क पाकिस्‍तान क्या कभी भारत ने गणतंत्र दिवस में मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया हैं।

भारत ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर पाकिस्‍तान को बनाया था मेहमान

भारत ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर पाकिस्‍तान को बनाया था मेहमान

बता दें भारत दो बार पाकिस्तान के नेताओं को गणतंत्र दिवस में मेहमान के तौर पर आमंत्रित कर चुका है मगर 1965 के बाद से भारत ने कभी भी पाकिस्तान के किसी नेता को न तो गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया ना ही भारत से कोई पाकिस्तान के इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने ही गया। वर्ष 1955 में पाकिस्‍तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्‍मद ने गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत की थी। इसके ठीक दस साल बाद वर्ष 1965 में एक बार फिर पाकिस्‍तान को भारत ने मुख्‍य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। भारत की उदारता व्‍यवहार का उदाहरण ये है कि भारत और पाक के युद्ध के तीन माह बाद भारत ने पाकिस्‍तान को गणतंत्र दिवस पर मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया था। तब पाकिस्‍तान के कृषि मंत्री राणा अब्‍दुल हमीद इस परेड में बुलाए गए थे। इसके बाद पाकिस्‍तान के रवैये के कारण भारत ने कभी भी पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान को गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्‍ट के तौर पर कभी आमंत्रित नही किया।

पहले गणतंत्र दिवस परेड में इस देश के राष्‍ट्रपति थे चीफगेस्‍ट

पहले गणतंत्र दिवस परेड में इस देश के राष्‍ट्रपति थे चीफगेस्‍ट

देश की पहली गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए इंडोनेशिया के राष्‍ट्रपति सुकर्णो आए थे। सुकर्णो, उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के काफी करीब थे। दोनों ने एशिया और अफ्रीकी देशों की आजादी की मुहिम की थी। इसके बाद दो बार हमारे पड़ोसी मित्र देश नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर विक्रम सिंह और भूटान के राजा किंग जिग्‍मे दोरजी वांगचुक गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्‍ट थे। पाकिस्‍तान का सबसे पक्का दोस्‍त चीन के 1959 में जनरल ये जियांगयिंग भारत आए।

अब तक सबसे अधिक बार ये देश बन चुका है गणतंत्र दिवस पर मुख्‍यअतिथि

अब तक सबसे अधिक बार ये देश बन चुका है गणतंत्र दिवस पर मुख्‍यअतिथि

बता दें फ्रांस अब तक सबसे अधिक 5 बार गणतंत्र दिवस में बतौर मुख्य अतिथि आ चुका है। भारत पूरी दुनिया के समाने अपनी विदेश नीति का प्रमाण देने के लिए अधिकांश समय में सोवियत संघ को अपे मेहमान के तौर पर चुनता रहा। समय के साथ भारत की विदेश नीति में बदलाव हुआ जिसके हिसाब से विदेशी मेहमानों के चयन करने में भी परिवर्तन आया। बता दें वर्ष 2015 में जब उस समय के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा बतौर चीफ गेस्‍ट भारत आए तो एक नया इतिहास बना था।

60 के दशक में ये देश बने गणतंत्र दिवस पर मुख्‍य अतिथि

60 के दशक में ये देश बने गणतंत्र दिवस पर मुख्‍य अतिथि

साल 1960 में सोवियत संघ के मार्शल क्‍लीमेंट येफ्रेमोविक वारोशिलोव गणतंत्र दिवस परेड के मुख्‍य अतिथि थे। 1961 में ब्रिटेन की महारानी क्‍वीन एलिजाबेथ भारत आईं, फिर कंबोडियर के महाराज। बुल्‍गारिया और युगोस्‍लाविया के मेहमान भी गणतंत्र दिवस की परेड में आए। साल 1960 में सोवियत संघ के मार्शल क्‍लीमेंट येफ्रेमोविक वारोशिलोव गणतंत्र दिवस परेड के मेहमान बने थे। इसके बाद 1961 में ब्रिटेन की महारानी क्‍वीन एलिजाबेथ भारत आईं, फिर कंबोडियर के महाराज। बुल्‍गारिया और युगोस्‍लाविया के मेहमान भी गणतंत्र दिवस की परेड में आए।

70 के दशक में गणतंत्र दिवस पर ये देश बने मेहमान

70 के दशक में गणतंत्र दिवस पर ये देश बने मेहमान

साल 1970 में भारत की विदेश नीति का और बदला हुआ स्‍वरूप नजर आया। युगोस्‍लाविया और पोलैंड के नेताओं के अलावा तंजानिया के राष्‍ट्रपति जूलियस कामबारगे नेयरेरे, फ्रांस के प्रधानमंत्री जैक्‍स रेन शिराक, ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्‍कम फ्रेसर भारत आए तो श्रीलंका की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमावो भंडारनाइके 70 के दशक में हुई गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्‍सा बनीं थी।

80 और 90 के दशक के गणतंत्र दिवस के मुख्‍य अतिथि

80 और 90 के दशक के गणतंत्र दिवस के मुख्‍य अतिथि

फ्रांस, श्रीलंका और भूटान को फिर से इस दशक की परेड में चीफ गेस्‍ट के तौर पर शामिल होने का मौका मिला। इसके अलावा अफ्रीका और तीन लैटिन अमेरिकी देशों मैक्सिको, अर्जेंटीना और पेरू से भी मेहमान आए। वर्ष 1989 में विएतनाम कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी नेग्‍यूएन वान लिन्‍ह मेहमान बने थे। साउथ अफ्रीका के राष्‍ट्रपति नेल्‍सन मंडेला साल 1995 में गणतंत्र दिवस में खास मेहमान बने थे। इसके अलावा लैटिन अमेरिका, ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम, मालद्वीव्‍स, मॉरीशस और नेपाल को इस दशक में गणतंत्र दिवस में शामिल होने का मौका मिला। वर्ष 1997 में त्रिनिदाद एंड टोबैगो के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री बासदेव पांडेय गणतंत्र दिवस पर खास मेहमान बने थे।

2000 के बाद इस्‍लामिक देश के मुखिया इस वजह से बने गणतंत्र दिवस के मेहमान

2000 के बाद इस्‍लामिक देश के मुखिया इस वजह से बने गणतंत्र दिवस के मेहमान

भारत की विदेश नीति भी बदल चुकी थी। इस दशक में भारत एक मजबूत देश के तौर पर अपनी पहचान बना पाने में कामयाब हो चुका था। इसलिए भारत सरकार की इस मामले में प्राथमिकता भी बदल गयी थी। भारत ने इसी दशक में ईरान को अपनी अहम रणनीतिक साझीदार बनाया। वर्ष 2003 में ईरान के राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद खातामी को चीफ गेस्‍ट के तौर पर चुना गया था। सऊदी अरब के राजा अब्‍दुल्ला बिन अब्‍दुल्‍लाजीज अल-सौद वर्ष 2006 में खास मेहमान बने थे। वहीं वर्ष 2007 में रूस के राष्‍ट्रपति ब्‍लादीमिर पुतिन खास मेहमान बनकर भारत आए थे। वर्ष 2009 में भारत को यूरेनियम सप्‍लाई करने वाले कजाखिस्‍तान के राष्‍ट्रपति नूरसुल्‍तान नजरबायेव खास मेहमान बनकर भारत आए।

2010 के बाद गणतंत्र दिवस पर ये देश बने मेहमान

2010 के बाद गणतंत्र दिवस पर ये देश बने मेहमान

साल 2010 में साउथ कोरिया, साल 2011 में इंडोनेशिया और साल 2012 में थाइलैंड के राष्‍ट्राध्‍यक्ष भारत आए थे। वहीं साल 2013 में फिर से भूटान के राजा खास मेहमान बने। वहीं जापान के राष्‍ट्रपति शिंजो एबे साल 2014 में भारतीय गणतंत्र दिवस पर खास मेहमान बने। लेकिन साल 2015 में अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा भारत आए। यह पहला मौका था जब किसी अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने भारत के गणतंत्र दिवस में बतौर चीफ गेस्‍ट शिरकत की थी। यह केंद्र की मोदी सरकार का भी पहला गणतंत्र दिवस था। साल 2016 में फिर से फ्रांस के राष्‍ट्रपति फ्रैंकोइस होलांद भारत के गणतंत्र दिवस में आए और फ्रांस ने पांचवीं बार शिरकत की।

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