Haryana Election: बीजेपी करेगी 38-40% वोटों का जुगाड़! खास रणनीति पर कर रही है काम
Haryana Vidhan Sabha Chunav: हरियाणा में विधानसभा चुनाव को लेकर अबतक भाजपा की जो रणनीति दिख रही है, उसमें पार्टी का फोकस मुख्य रूप से ओबीसी वोटर नजर आ रहे हैं। इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की चुनाव जीतने की एक खास रणनीति है।
हरियाणा में भाजपा ओबीसी वोटरों पर पूरा फोकस कर रही है, उसके पिछले कुछ निर्णयों से यह साफ तौर पर नजर आ रहा है। हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने चुनावों से पहले कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की हैं, साथ ही साथ ओबीसी वोट बैंक को देखते हुए भी बड़े फैसले लिए हैं।

हरियाणा में सबसे बड़ा वोट बैंक है ओबीसी
हरियाणा में ओबीसी वोट बैंक सबसे बड़ा है। इनकी जनसंख्या करीब 30% है। इसके बाद जाट लगभग 25% और अनुसूचित जाति के वोटर करीब 20% हैं। राज्य सरकार ने वैसे तो लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद सभी वर्गों को ध्यान में रखकर कई लोक-लुभावन घोषणाएं की हैं।
लेकिन, ओबीसी समुदाय के लिए कई खास फैसले लिए हैं। जैसे कि ओबीसी क्रीमी लेयर की आय की सीमा बढ़ा दी गई है। साथ ही साथ पंचायतों, नगर निगमों और नगरपालिकाओं में पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षण का कोटा बढ़ा दिया गया है।
जाट वोट बैंक पर कांग्रेस और चौटाला परिवार की रही है नजर
इस साल लोकसभा चुनावों से पहले मार्च में प्रदेश में भाजपा और दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी से गठबंधन टूट गया था। इसका अर्थ यह निकाला गया कि इसकी वजह से जाट वोट बैंक अब भूपेंद्र हुड्डा की वजह से कांग्रेस और चौटाला परिवार की वजह से उनकी परिवार की पार्टियों (INLD-JJP) के बीच बंट जाएगा।
भाजपा कर रही है 38 से 40% वोटों का जुगाड़
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है, 'ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से यह फायदेमंद है कि अन्य समुदायों को गोलबंद किया जाए, क्योंकि भाजपा को सरकार बनाने के लिए कुल वोटों का सिर्फ 38 से 40% की ही जरूरत है।'
अमित शाह भी दे गए हैं ओबीसी समुदाय को तरजीह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा चुनावों के बाद दो बार हरियाणा दौरे पर आ चुके हैं। दोनों बार ही उनका फोकस ओबीसी पर दिखा है। 29 जून को पंचकूला यात्रा में वह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ही विधानसभा चुनावों में बीजेपी के सीएम चेहरे के तौर पर पेश कर चुके हैं। सैनी ओबीसी हैं, जिन्हें पंजाबी खत्री समाज से आने वाले मनोहर लाल खट्टर की जगह कुर्सी दी गई है।
बीते मंगलवार को महेंद्रगढ़ में आयोजित 'पिछड़ा वर्ग सम्मान सम्मेलन' में उन्होंने ओबीसी क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाने और स्थानीय निकायों में इनके लिए आरक्षण बढ़ाने जैसी घोषणाएं भी की हैं।
हरियाणा में ओबीसी को भाजपा ने कैसे दी है अहमियत?
वैसे केंद्रीय मंत्री और फरीदाबाद से भाजपा सांसद कृष्ण पाल गुज्जर का कहना है, 'ऐसा नहीं है कि पिछड़े वर्ग के लिए बीजेपी अब कुछ नया कर रही है। वास्तव में वह पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल में लगातार पिछड़े वर्ग के लिए ऐसे कई कदम उठा चुकी है।'
वहीं मुख्यमंत्री सैनी का कहना है, '17 सितंबर, 2023 को आरंभ हुई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पिछड़े वर्गों के बीच कौशल विकास में अपनी भूमिका निभाने के लिए सराहनीय है। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ओबीसी आयोग को संवैधानिक शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिसकी वजह से पिछड़े वर्ग के बच्चों को केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों जैसे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश मिल सकेगा। केंद्र सरकार ने पिछड़े वर्ग के अधिकारों को सुरक्षित ही नहीं किया है, बल्कि उनका संरक्षण किया है।'
आज हरियाणा बीजेपी का हिसाब ये है कि सीएम ओबीसी हैं, प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ब्राह्मण हैं। केंद्रीय मंत्रियों में खट्टर पंजाबी खत्री हैं, तो कृष्ण पाल गुज्जर और राव इंद्रजीत सिंह ओबीसी समाज से आते हैं। यही नहीं, अमित शाह महेंद्रगढ़ में खुद को 'बनिया का बेटा' कहकर भी गए हैं।
लोकसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री सैनी की सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 7,500 परिवारों को 100 स्कॉयर यार्ड वाले प्लॉट्स का कब्जा पत्र सौंपा है। इनमें से ज्यादातर पिछड़े वर्ग के ही लाभार्थी हैं। इसके अलावा उन्होंने दलितों और ओबीसी समाज के लिए धर्मशालाओं और चौपाल के जीर्णोद्धार के लिए भी 100 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।
पार्टी के लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में ओबीसी समुदाय के लिए राज्य सरकार की ओर से कुछ और घोषणाएं हो सकती हैं।












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