हरियाणा में दीपेंद्र हुड्डा की 'यात्रा' के पीछे क्या है रणनीति? कांग्रेस की गुटबाजी में भारी कौन?
Haryana Vidhan Sabha Chunav: हरियाणा कांग्रेस में चल रही गुटबाजी सामने से नजर आ रही है। तीन हफ्ते भी नहीं बीते हैं, पार्टी हाई कमान की ओर से प्रदेश के नेताओं से कहा गया था कि सार्वजनिक तौर पर अपने मतभेद जाहिर न होने दें। लेकिन, कांग्रेस नेताओं के आचरणों से पब्लिक से कुछ भी नहीं छुप पा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी सांसद राहुल गांधी की ओर से हिदायतें मिलने के बावजूद हरियाणा में कांग्रेस के नेता अपनी-अपनी ओर से शक्ति का प्रदर्शनों में लगे हुए हैं। कोई अभी यात्रा निकाल रहा है तो किसी ने आगे की तैयारी की है। लेकिन, आपस में कोई तालमेल नहीं नजर आ रहा।

भाजपा से ऐसे कैसे मुकाबला करेगी कांग्रेस?
कांग्रेस पार्टी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनावों में भाजपा से मुकाबले के लिए मैदान में उतरने वाली है, जो पिछले एक दशक से राज्य की सत्ता में बैठी है। तथ्य यह है कि लोकसभा चुनावों में उसकी सीटें आधी जरूर हुई हैं, लेकिन कांग्रेस उससे बढ़त नहीं बना सकी है।
दीपेंद्र हुड्डा ने आयोजित की है 'हरियाणा मांगे हिसाब' यात्रा
कांग्रेस के नेता यूं तो अपनी सारी कवायद भाजपा और उसकी सरकार के खिलाफ ही बता रहे हैं, लेकिन जमीन पर लगता है कि वे अपनी-अपनी गोटी सेट करने के खेल में ही ज्यादा जुटे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा की 'हरियाणा मांगे हिसाब' यात्रा आयोजित की गई है।
बेटे को सीएम के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करना चाह रहे हैं हुड्डा?
हरियाणा से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कहीं इसके जरिए बुजुर्ग भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने गुट की कमान युवा बेटे को तो नहीं सौंपना चाहते हैं। चुनावी भाषा में समझें तो वह अपनी जगह युवा नेता के रूप में बेटे को पार्टी के सीएम चेहरे के तौर पर तो प्रोजेक्ट नहीं करना चाह रहे हैं!
यह कयासबाजी हवा में नहीं है। खुद हुड्डा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान के साथ उनकी ट्यूनिंग किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने दीपेंद्र की यात्रा को हरी झंडी दिखाकर इस बात का प्रमाण दे दिया है कि कांग्रेस सांसद की यात्रा पार्टी की आधिकारिक यात्रा है।
शैलजा की यात्रा से पहले माहौल बनाने की कोशिश?
5 बार के सांसद दीपेंद्र हुड्डा के पास प्रदेश कांग्रेस की कोई जिम्मेदारी नहीं है और न ही एआईसीसी में उनके पास कोई पद है। वे सीडबल्यूसी में इंवाइटी हैं। फिर, उन्हें अपनी अलग यात्रा निकालने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
कांग्रेस के कुछ शुभचिंतकों ने महसूस किया है कि ये यात्रा कुमारी शैलजा की ओर से इस महीने के आखिर में शहरी इलाकों में भाजपा के खिलाफ एक यात्रा शुरू करने की घोषणा के बाद की गई। सांसद शैलजा पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव भी हैं और पहले प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर भी आक्रामक रही हैं शैलजा
उन्होंने हाल ही में जिस तरह से हरियाणा में लोकसभा चुनावों में कुछ सीटों पर पार्टी की हार के लिए एक तरह से भूपेंद्र हुड्डा को जिम्मेदार ठहराया है, उससे खेमेबाजी की गंभीरता समझी जा सकती है। वैसे भी शैलजा कांग्रेस में हुड्डा विरोधी कैंप की मजबूत नेता मानी जाती हैं।
हरियाणा कांग्रेस में समानांतर यात्राओं ने पार्टी की कमजोरियों को और ज्यादा उजागर कर दिया है। इसकी नींव लोकसभा चुनावों से पहले जनवरी में शैलजा की बस यात्रा में ही देखने को मिली थी, जिससे प्रदेश कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर एक तरह से दूरी बनाने की कोशिश की थी। लेकिन, तब कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने उनका साथ दिया था।
शैलजा पिछले कई चुनावों से खुद को प्रदेश कांग्रेस की ओर से टॉप पोस्ट के चेहरे के लिए दावेदार के तौर पर देखते रही हैं, लेकिन 10 जनपथ पर भूपेंद्र हुड्डा अक्सर भारी पड़ते नजर आए हैं। इस बार लगता है कि उन्होंने नया 'खेल' खेला है, जिसमें जाट, लेकिन युवा चेहरे पर दांव लगाने की कोशिश की गई है।












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