कैसे सोमनाथ चटर्जी के रास्ते पर चल पड़े हैं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश?
नई संसद के उद्घाटन समारोह में शामिल होकर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपनी पार्टी के सुप्रीमो को नाराज कर दिया है। लेकिन, जेडीयू अगर उन्हें पार्टी से निकालती भी है तो भी उनका पद सुरक्षित रह सकता है।

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए से निकले करीब 10 महीने हो चुके हैं। लेकिन, अब जाकर पार्टी को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के पद की याद आई है। हरिवंश नारायण सिंह तब इस पद पर बैठे थे, जब जेडीयू एनडीए में शामिल थी। गठबंधन टूटने के बाद भी वह अपने पद पर विराजमान रहे । लेकिन, उन्होंने नए संसद भवन के उद्घाटन में शामिल होकर पार्टी सुप्रीमो को नाराज कर दिया है।

एनडीए की वजह से उपसभापति बने थे हरिवंश
जदयू सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जबसे बीजेपी से अलग हुए हैं, वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष को गोलबंद करने के लिए देश भर में विपक्षी नेताओं के घरों के चक्कर काट रहे हैं। इतने महीनों में उनकी पार्टी ने शायद ही कभी सुध ली कि उनकी पार्टी के सांसद हरिवंश एनडीए में होने की वजह से ही राज्यसभा के उपसभापति के पद पर बैठे थे।

हरिवंश ने अपनी जमीर बेच दी- जेडीयू
लेकिन, जब हरिवंश नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंच गए तो उनकी पार्टी बिलबिला उठी। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने उनपर जोरदार हमला किया है। जेडीयू प्रवक्ता ने उनपर आरोप लगाए हैं कि हरिवंश ने अपनी 'लेखनी और जमीर बेच दी है। पत्रकारिता जगत को कलंकित किया है।'

कार्रवाई पर फैसला नेतृत्व करेगा-जेडीयू
जेडीयू प्रवक्ता के मुताबिक, 'जब संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय लिखा जा रहा था तो आपने अपनी उपस्थिति से उस काले इतिहास के पहले पन्ने पर अपना हस्ताक्षर कर दिया है। यह बड़ी चिंता और चिंतन की बात है।' उन्होंने उनपर गुनाह का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो यह फैसला नेतृत्व की ओर से लिया जाएगा।

नई संसद के उद्घाटन में शामिल होने से भड़की नीतीश की पार्टी
जेडीयू प्रवक्ता ने हरिवंश के बारे में कहा कि 'जेडीयू ने आपको संसद के उच्च सदन में भेजा। लेकिन आप उद्घाटन समारोह (नए संसद भवन का) में शामिल हो गए, जबकि पार्टी और पार्टी के नेतृत्व ने इस कार्यक्रम से अनुपस्थित रहने का फैसला किया था।' जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि हरिवंश ने उद्घाटन समारोह में शामिल होकर 'अपने पद के लिए अपनी जमीर' बेच दी।
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पीएम मोदी की तारीफ से भी नाखुश है जेडीयू
जेडीयू की हरिवंश से यह भी शिकायत है कि वे न सिर्फ नई संसद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए, बल्कि पीएम मोदी की भी सराहना की। तब हरिवंश ने कहा था, 'यह अपार हर्ष का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्रीजी ने अपनी देख-रेख में ढाई वर्षों से भी कम समय में भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम एक आधुनिक संसद भवन तैयार करवाया है।'
2026 तक है राज्यसभा की सदस्यता
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हरिवंश का मौजूदा संबंध झारखंड के रांची से है। वे 2014 में पहली बार बिहार से राज्यसभा के सांसद निर्वाचित हुए। उनकी राज्यसभा सदस्यता का यह दूसरा कार्यकाल है, जो कि 2026 में समाप्त होने वाला है। वह 2018 से राज्यसभा के उपसभापति हैं।

हरिवंश के सामने है सोमनाथ चटर्जी का उदाहरण
अगर जेडीयू उन्हें अनुशासनहीनता के नाम पर पार्टी से बाहर निकालती है तो भी उनके पद पर कोई आंच आने की संभावना नहीं दिखती है। क्योंकि, लोकसभा के पूर्व स्पीकर दिवंगत सोमनाथ चटर्जी का उदाहरण उनके सामने है। चटर्जी सीपीएम के दिग्गज नेता थे और यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में लोकसभा स्पीकर बने थे।

सोमनाथ चटर्जी ने पद की निष्पक्षता का दिया था हवाला
2008 में जब अमेरिका के साथ परमाणु डील के मामले में लेफ्ट फ्रंट ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, तो सीपीएम चाहती थी कि चटर्जी स्पीकर के पद से इस्तीफा दे दें। तब चटर्जी ने माना कि स्पीकर का पद हमेशा निष्पक्ष रहना चाहिए। इसपर सीपीएम ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया, लेकिन वह स्पीकर के पद पर बने रहे।












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