• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

Har Ghar Tiranga : KKGSS जैसा खादी वाला तिरंगा दुनिया में कहीं नहीं, मोदी सरकार की 'नीति' से कयामत के कयास !

हर घर तिरंगा और आजादी के अमृत महोत्सव में करोड़ों राष्ट्रीय ध्वज खरीदे जा रहे हैं। हालांकि, नियमों में बदलाव के कारण भारत में तिरंगा उत्पादन के लिए एकमात्र प्रमाणित यूनिट- KKGSS से तिरंगा बिकने की मात्रा घटी है। kkgss
Google Oneindia News

बेंगलुरु, 13 अगस्त : भारत की एकमात्र प्रमाणित तिरंगा बनाने वाली इकाई KKGSS कर्नाटक में है। यहां महिलाएं तिरंगे की सिलाई करती हैं। हालांकि, हर घर तिरंगा जैसे उत्सव के दौरान भी तिरंगे की बिक्री में गिरावट हैरान करने वाली है। KKGSS कर्मियों का मानना है कि बिक्री में गिरावट सरकार की तरफ से नियमों में बदलाव के बाद आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSS) में लगभग 1,300 लोग कार्यरत हैं। इनमें से बेंगेरी खादी बनाने वाली इकाई में 600 यानी करीब 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। कर्नाटक के बेंगेरी में खादी इकाइयों में महिलाओं के लिए, राष्ट्रीय ध्वज तैयार करना या तिरंगे की सिलाई कोई काम नहीं बल्कि एक भावना है। हर बुनाई, हर झंडे को बड़ी मेहनत से प्यार और गर्व की भावना से तैयार किया जाता है।

देश की एकमात्र BIS सर्टिफाइड यूनिट

देश की एकमात्र BIS सर्टिफाइड यूनिट

बता दें कि सरकारी वाहनों पर फहराने वाले छोटे तिरंगे से, दुनिया भर में हमारे सरकारी भवनों, स्कूलों और दूतावासों के ऊपर, हमारे बहादुर शहीद सैनिकों की अंतिम यात्रा में इस्तेमाल होने वाले झंडे तक, उत्तर कर्नाटक के इस विचित्र और छोटे शहर में तैयार किया जाता है। कर्नाटक खादी और ग्रामोद्योग संयुक्ता संघ (फेडरेशन), या KKGSS हुबली के बेंगेरी गांव में है। KKGSS दुनिया भर में तिरंगे के निर्माण और आपूर्ति के लिए भारत में बीआईएस प्रमाणीकरण वाली एकमात्र अधिकृत इकाई है।

क्या है तिरंगे के कपड़े का विवाद

क्या है तिरंगे के कपड़े का विवाद

तिरंगे की बिक्री घटने के बारे में यह सवाल स्वाभाविक है कि भारत सरकार ने 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में 'हर घर तिरंगा' अभियान की पहल की। इसके बावजूद ऐसा क्यों हुआ ? दरअसल, साल 1957 से खादी के झंडे बना रहीं KKGSS बेंगेरी की महिलाओं में खुशी का माहौल तो है, लेकिन हर घर तिरंगा अभियान के शुभारंभ के बाद सरकार से सहायता न मिलने से निराथ भी हैं। दरअसल, महिलाएं नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में इंडियन फ्लैग कोड में संशोधन किया है। इससे काफी निराशा है। पुराने कोड के अनुसार, पॉलिएस्टर और मशीन से बने झंडों के उपयोग की अनुमति नहीं थी। लेकिन दिसंबर 2021 में हुए संशोधन के बाद सरकार ने प्रतिबंधों को हटा दिया। खादी के अलावा, कपास, रेशम और लकड़ी की सामग्री के उपयोग को हरी झंडी दे दी गई। नतीजतन खादी से बनने वाले झंडे की डिमांड घटी है। नए कोड के मुताबिक तिरंगा handwoven होने के अलावा handspun भी हो सकते हैं।

दिहाड़ी मजदूर बनाते हैं तिरंगा, ऑर्डर न मिलने से निराशा

दिहाड़ी मजदूर बनाते हैं तिरंगा, ऑर्डर न मिलने से निराशा

इस साल, बेंगेरी की तिरंगा इकाई- KKGSS को झंडे के लिए करीब 8-10 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उनकी निराशा के कारण उन्हें अब तक केवल 2 करोड़ रुपये के ही ऑर्डर मिले हैं। KKGSS में लगभग 1,300 लोग कार्यरत हैं। ज्यादातर महिलाएं जो बुनकर, कातने और दर्जी हैं, वे दिहाड़ी मजदूर हैं और एक दिन में लगभग 500-600 रुपये कमाती हैं। तिरंगे की बिक्री में गिरावट के बारे में न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक यूनिट में कार्यरत एक महिला ने कहा, बिक्री में गिरावट ने हमारे वेतन और हमारे दिलों को चोट पहुंचाई है। हमने सोचा था कि हम देश के हर घर में हमारे द्वारा बनाए गए खादी के झंडे को गर्व से देख पाएंगे।

अमृत महोत्सव जैसे मौके पर खादी की अनदेखी क्यों ?

अमृत महोत्सव जैसे मौके पर खादी की अनदेखी क्यों ?

KKGSS में यूनिट प्रबंधक के रूप में काम कर रहीं, अनुराधा के ने बताया, हमने सोचा था कि इस साल हम आज़ादी का अमृत महोत्सव के मौके पर बिक्री बढ़ेगी, लेकिन अब निराशा हो रही है, क्योंकि केंद्र सरकार ने खादी के अलावा बड़े पैमाने पर पॉलिएस्टर के झंडे का उत्पादन करने की अनुमति भी दे दी है। यूनिट की महिलाओं का कहना है कि खादी भारत की शान है। मैनेजर अनुराधा ने सवाल किया, क्या हमें इसका उपयोग अपने देश की सबसे महत्वपूर्ण घटना को चिह्नित करने के लिए नहीं करना चाहिए?

हर घर तिरंगा पर राहुल गांधी का बयान

हर घर तिरंगा पर राहुल गांधी का बयान

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 75वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने के लिए कर्नाटक के दौरे पर गए थे। राहुल ने खादी के झंडे बनाने वाली इकाई KKGSS का दौरा किया था। राहुल एक राष्ट्रीय ध्वज को इस्त्री (Ironing) करते भी दिखे थे। उन्होंने हर घर तिरंगा पहल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जो लोग अभियान चला रहे हैं वे "राष्ट्र-विरोधी संगठन" से आए हैं, जिन्होंने 52 वर्षों तक तिरंगा नहीं फहराया। उन्होंने यह भी ट्वीट किया था, स्वतंत्रता संग्राम के समय वे कांग्रेस को नहीं रोक सके थे। वे अब भी कांग्रेस को नहीं रोक पाएंगे।

पॉलिएस्टर का तिरंगा KKGSS के लिए कयामत

पॉलिएस्टर का तिरंगा KKGSS के लिए कयामत

गौरतलब है कि ध्वज संहिता में संशोधन के खिलाफ केकेजीएसएस कांग्रेस के साथ 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना दे रही है। न्यूज18 की रिपोर्ट में केकेजीएसएस के सचिव शिवानंद मथापति ने कहा, हम पीएम से मिलने का समय मांगेगे। उनसे हमारी बातें सुनने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि हमने अब सभी खादी-निर्माण इकाइयों के देशव्यापी आंदोलन की योजना बनाई है। शिवानंद मथापति के मुताबिक पॉलिएस्टर का तिरंगा KKGSS के लिए कयामत है।

तिरंगा कैसे बनता है

तिरंगा कैसे बनता है

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तैयार करना कोई आसान काम नहीं है। हुबली में बने झंडे पूरी तरह से हाथ से बुने जाते हैं और हर धागा हाथ से काता जाता है। सामग्री व्यापक क्वालिटी चेक से गुजरती है। तैयार तिरंगा और इस्तेमाल किए गए धागे भारतीय ध्वज संहिता के मानकों के अनुसार होने चाहिए। सबसे पहले, खादी के कपड़े को एक ऐसी सामग्री में काटा जाता है जो डेनिम की तुलना में मजबूत और सख्त होती है। मथापति ने बताया कि हाथ से बुने जाने वाली कपास को दो प्रकार की सामग्री में बुना जाता है। पहले तरीके का उपयोग ध्वज बनाने के लिए किया जाता है। इसे केसरिया और हरे रंग में रंगा जाता है। दूसरी सामग्री को लंबी बेलनाकार आस्तीन (cylindrical sleeve) में बदल दिया जाता है। इससे झंडा फहराने वाले पोल पर तिरंगे को टिकाने में मदद मिलती है।

तिरंगे के रंगों के मानक

तिरंगे के रंगों के मानक

केकेजीएसएस के सचिव शिवानंद मथापति ने बताया कि रंगीन रंगों से लेकर सफेद सामग्री के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ब्लीच तक, हर चीज को सावधानीपूर्वक मापना होता है। रंग (tint) विनिर्देशों के अनुसार ही होना चाहिए। केकेजीएसएस में तैयार होने वाला प्रत्येक झंडा परिपूर्ण और प्रेम और श्रम के साथ बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि तिरंगे के प्रत्येक रंग को अलग से रंगा जाता है और सामग्री को निश्चित आकार में काटा जाता है। अशोक चक्र के लिए, नीले रंग का प्रतीक एक सफेद कपड़े पर मुद्रित किया जाता है और फिर तीन टुकड़ों (केसर, सफेद और हरा) को एक साथ सिला जाता है। प्रत्येक विवरण - धागे की गिनती से, रंग की स्थिरता से लेकर ध्वज के आकार तक - ध्वज कोड के अनुसार ही होना चाहिए।

क्या हैं मानक

क्या हैं मानक

इंडियन फ्लैग कोड के विनिर्देशों के अनुसार, तिरंगा आयताकार और 3:2 के अनुपात के साथ होना चाहिए; झंडे नौ अलग-अलग आकारों में बनते हैं। सबसे छोटा 6×4 इंच और सबसे बड़ा 21×4 फीट का है। अलग-अलग आकार के चक्र को कैसे मुद्रित किया जाता है, इस पर मथापति ने कहा कि नीला चक्र हर तिरंगे पर अलग-अलग और मैन्युअल तरीके से मुद्रित होता है। तिरंगे के आकार के आधार पर चक्र बनाने वाले लोगों की संख्या भी बदलती है।

तिरंगे में गलती पर सजा का प्रावधान

तिरंगे में गलती पर सजा का प्रावधान

उदाहरण से समझाते हुए मथापति ने बताया कि 2×3 फीट के तिरंगे पर एक चक्र छापने में दो महिलाओं की जरूरत पड़ती है। 21×4 फीट आकार के बड़े झंडों के लिए चक्र उभरे ब्लॉक को पकड़ने में लगभग आठ महिलाओं की जरूरत होती है। इसे खादी के कपड़े के सादे सफेद टुकड़े पर छापा जाता है। यह सटीकता और कड़ी मेहनत का काम है। ध्वज को पैक करने और प्रेषण के लिए तैयार करने से पहले सभी क्रीज को लोहे से हटाया जाता है। तिरंगे झंडे में किसी भी प्रकार की कमी या दोष एक गंभीर अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर भारतीय ध्वज संहिता 2002 के प्रावधानों के अनुसार जुर्माना या कारावास दोनों सजा हो सकती है।

ये भी पढ़ें- VIDEO : लंदन पहुंचे 'भाबी जी घर...' वाले सक्सेना जी, रात के दो बजे स्पेशल ड्रिंक और... फैंस बोले- छिपकली...ये भी पढ़ें- VIDEO : लंदन पहुंचे 'भाबी जी घर...' वाले सक्सेना जी, रात के दो बजे स्पेशल ड्रिंक और... फैंस बोले- छिपकली...

Comments
English summary
Har Ghar Tiranga kkgss decline in tiranga sell only certified indian flag maker
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X