Google Doodle: टैगोर की 'नृत्य समरागिनी' सितारा देवी को गूगल का सम्मान
कथक की दुनिया के सबसे मशहूर नाम सितारा देवी के 97वें जन्मदिन पर गूगल ने उन्हें सम्मानित किया है। 'कथक क्वीन' के नाम से जानी जानें वालीं सितारा देवी पर गूगल ने डूडल बनाया है। सितारा देवी ऐसी शख्सियत थीं जिन्हें बयां कर पाना मुश्किल है।
नई दिल्ली। कथक की दुनिया के सबसे मशहूर नाम सितारा देवी के 97वें जन्मदिन पर गूगल ने उन्हें सम्मानित किया है। 'कथक क्वीन' के नाम से जानी जानें वालीं सितारा देवी पर गूगल ने डूडल बनाया है। सितारा देवी ऐसी शख्सियत थीं जिन्हें बयां कर पाना मुश्किल है। उन्हें सबसे खूबसूरती से लेखक और कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने बयां किया था। जब सितारा देवी महज 16 साल की थीं, तभी उनके नृत्य पर मुग्ध होतर उन्होंने सितारा देवी को 'नृत्य समरागिनी' का खिताब दे दिया था।

कलकत्ता में 8 नवंबर, 1920 को जन्मीं सितारा देवी का बचपन से कथक से ताल्लुक रहा। उनके पिता खुद एक कथक डांसर रहे थे। वो बचपन से सितारा को कथक सिखाना के पक्ष में रहे लेकिन समाज ने इसे नामंजूर कर दिया। फिर रवींद्रनाथ टैगोर के कहने पर उन्होंने सितारा को शिक्षा देनी शुरू की। जब सितारा 10 साल की थीं, तभी से वो अकेले परफॉर्मेंस देने लगीं थीं।
सितारा देवी के अंदर डांस का जुनून ऐसा था कि इसके लिए उन्होंने स्कूल भी छोड़ दिया और मुंबई आ गईं। सितारा देवी के नृत्य से प्रभावित होकर टैगोर ने न केवल उन्हें 'नृत्य समरागिनी' का खिताब दिया, बल्कि एक शॉल और 50 रुपये का सम्मान भी दिया। सितारा देवी ने कथक को दोबारा जन्म दिया था। इसके लिए उन्हें पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी और कालिदास सम्मान से भी नवाजा गया।
सितारा देवी ने बॉलीवुड की हीरोइनों को भी कथक की ट्रेनिंग दी है। मधुबाला, माला सिन्हा और काजोल उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्हें कथक क्वीन से सीखने का मौका मिला। 25 नवंबर, 2014 को लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया।












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