Happy Birthday Mayawati: जब स्कूल में पढ़ाना छोड़ राजनीति में आईं 'बहनजी', बन गईं देश की सबसे युवा महिला CM
Happy Birthday Mayawati: आज मायावती का जन्मदिन है, उन्हें देश का शीर्ष दलित नेता माना जाता है। मायावती को दलितों के एक बड़े नेता के तौर पर जाना जाता है।

Happy Birthday Mayawati: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का आज जन्मदिन है। मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में हुआ था। मायावती के पिता प्रभु राम पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। राजनीति के शिखर पर पहुंचने के लिए मायावती ने काफी संघर्ष किया। मयावती देश की पहली महिला दलित मुख्यमंत्री हैं। वह सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाली देश की पहली महिला हैं। मायावती उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि मायावती को सत्ता से बाहर हुए एक दशक से अधिक का समय हो गया है लेकिन बावजूद इसके उनके किए काम को लोग भुला नहीं पाए हैं।
काशीराम से काफी प्रभावित थीं
राजनीति में आने से पहले मायावती ने अपने करियर की शुरुआत एक टीचर के तौर पर की थी। लेकिन वह कांशीराम के विचारों से काफी प्रभावित थीं और काशीराम का उनके जीवन पर काफी प्रभाव पड़ा। काशीराम के सिद्धांतों और काम से प्रेरित होकर मायावती ने राजनीति में आने का फैसला लिया। शुरुआत में मायावती काशीराम के काम से प्रभावित थीं, लेकिन बाद में वह उनके साथ राजनीति में शामिल हो गईं। 2003 में चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने 2007 में एक बार फिर से वापस की और प्रदेश की फिर से मुख्यमंत्री बनीं।
अध्यापन छोड़ 1984 में राजनीति में रखा कदम
मायावती का राजनीति सफर काफी बेहतर रहा है। मायावती 1984 तक शिक्षण कार्य में लिप्त रहीं, इसके बाद काशीराम उन्हें बहुजन समाज पार्टी में लेकर आए। 1984 में मायावती काशीराम से प्रभावित होकर राजनीति में शामिल हुईं। राजनीति में आने से पहले मायावती दिल्ली में एक स्कूल में पढ़ा रही थीं और IAS की तैयारी कर रही थीं। लेकिन शिक्षण कार्य छोड़कर मायावती ने पूर्णकालिक राजनीति में आने का फैसला लिया। मुजफ्फरनगर जिला की कैराना लोकसभा सीट पर मायावती ने सक्रियता से काम किया। 1985, 1987 और 1989 में उन्होंने काफी लगन के साथ इस सीट पर काम किया और पार्टी को 1989 में 13 सीटों पर जीत मिली। जिसके बाद 1995 में उन्हें गठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री बनाया गया। वह पहली बार 1989 में सांसद बनीं।
2001 में बनीं काशीराम की उत्तराधिकारी
वर्ष 2001 में काशीराम ने मायावती को खुद का उत्तराधिकारी बनाया। 2002 से 2003 के बीच वह फिर से भारतीय जनता पार्टी के समर्थ से प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन कुछ समय के बाद मायावती यह गठबंधन टूट गया, भाजपा ने अपना समर्थन वापस ले लिया और मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मायावती को उनके समर्थक बहनजी कहकर बुलाते हैं। लेकिन उनके आलोचन कहते हैं कि वह पार्टी को तानाशाही अंदाज में चलाती हैं। मायावती ने प्रदेशभर में कई मूर्तियां बनवाईं। उन्होंने दलित महापुरुषों और गौतम बुद्ध की कई मूर्तियां बनवाईं।
देश की शीर्ष दलित नेता
मायावती को दलितों के एक बड़े नेता के तौर पर जाना जाता है। जिस तरह से दलितों को उन्होंने नैतिक बल दिया और देश मे खुद को दलितों के रोलमॉडल के तौर पेश किया उसने इस समुदाय को काफी बल देने का काम किया। दलित समुदाय में मायावती की अच्छी पैठ है, हालांकि पिछले कुछ समय में उनकी राजनीतिक जरूर कमजोर हुई है लेकिन इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि मायावती अभी भी देश की शीर्ष दिग्गज दलित नेताओं में से एक हैं, लिहाजा उनके समर्थक इतनी आसानी से उन्हें नजरअंदाज नहीं करेंगे।












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