Happy Birthday Manmohan Singh: एक नजर उनकी उपलब्धियों पर

नई दिल्ली। देश के 13वें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज 85 साल के हो गए हैं। देश के पहले सिख प्रधानमंत्री भले ही अपनी चुप्पी के कारण हमेशा विपक्ष के निशाने पर रहे, लेकिन बिना बोले ही उन्होंने देश के लिए कई ऐसे काम किए जिन्हें देश कभी नहीं भूलेगा। आर्थिक सुधारों के सूत्रधार माने जाने वाले मनमोहन सिंह के नाम कई उपलब्धियां भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विटर पर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजी हैं। एक नजर उनके जीवन और उपलब्धियों पर-

Happy Birthday ManMohan Singh

कैंब्रिज और ऑक्सफॉर्ड से की है पढ़ाई

कैंब्रिज और ऑक्सफॉर्ड से की है पढ़ाई

मनमोहन सिंह का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में 26 सितंबर, 1932 में हुआ था। माता-पिता की मौत के बाद उनकी दादी उन्हें भारत के अमृतसर ले आईं जहां उनका बचपन बीता। पंजाब विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद वो स्कॉलरशिप पर पढ़ने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए। साल 1960 में उन्होंने ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ फिलॉसिफी में डिग्री ली।

ऐसे शुरू हुआ राजनीतिक करियर

ऐसे शुरू हुआ राजनीतिक करियर

इसके बाद मनमोहन सिंह भारत लौट आए। साल 1966 में उन्हें यूनाइटेड नेशन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट के साथ काम करने का मौका मिला। सिंह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में फैकल्टी भी रहे। उनका राजनीतिक करियर तब शुरू हुआ जब ललित नारायण मिश्रा ने उन्हें वाणिज्य मंत्रालय में बतौर सलाहकार नियुक्त किया। उनके आर्थिक फैसलों से खुश होकर उन्हें 1972 में वित्त मंत्रालय का मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। इसके तुरंत बाद उन्हें मंत्रालय का सचिव बना दिया गया।

बेहतरीन अर्थशास्त्री हैं सिंह

बेहतरीन अर्थशास्त्री हैं सिंह

साल 1982 में उन्हें रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया गया। वीपी सिंह के कार्यकाल के वक्त उन्होंने आर्थिक मामलों पर भारत के प्रधान मंत्री के सलाहकार तौर पर पद संभाला। मुख्य राजनीति में उन्हें लाने का श्रेय पीवी नरसिंहा राव को जाता है। उनके कार्यकाल में सिंह को वित्त मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया गया। सिंह ने भी राव की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए आर्थिक संकट से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था को संभाला।

2004 में संभाली प्रधानमंत्री की कुर्सी

2004 में संभाली प्रधानमंत्री की कुर्सी

सिंह ने 1991 में असम से राज्य सभा का चुनाव लड़ा और तभी से उच्च सदन के सदस्य रहे हैं। 1998 से 2004 तक भाजपा की सरकार के दौरान वो सदन में विपक्ष के नेता रहे हैं। साल 2004 के आम चुनावों में जनता ने यूपीए को सरकार चलाने का जिम्मा सौंपा और तब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की कमान पार्टी के वरिष्ट नेता मनमोहन सिंह को सौंपी। मनमोहन सिंह जवाहरलाल नेहरू के बाद देश के इकलौते पीएम हैं जिन्होंने 10 साल तक देश का नेतृत्व किया है।

प्रधानमंत्री बन देश को दीं कई सौगातें

प्रधानमंत्री बन देश को दीं कई सौगातें

दस साल के उनके कार्यकाल में कई उपलब्धियां तो कई घोटाले शामिल हैं। यूपीए 1 के दौरान उन्होंने देश को इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील, शिक्षा का अधिकार, मनरेगा, आरटीआई जैसी सौगातें दीं। वहीं यूपीए 2 का उनका कार्यकाल घोटालों के इर्द-गिर्द रहा। कोयला घोटाला, 2जी और चॉपर स्कैम से न केवल पार्टी की छवि खराब हुई, बल्कि अभी तक साफ छवि वाले मनमोहन सिंह पर भी इसके छींटे पड़े। उनकी चुप्पी को लेकर भी उन्हें कई बार विपक्ष का शिकार होना पड़ा।

दुनिया भर में मिले कई सम्मान

दुनिया भर में मिले कई सम्मान

मनमोहन सिंह को अपने काम के लिए कई सम्मान भी मिले हैं। वो देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण (1987) के अलावा जवाहरलाल नेहरू बर्थ सेंटेनरी अवॉर्ड ऑफ द इंडियन साइंस कांग्रेस (1995), कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का एडम स्मिथ अवॉर्ड (1956), सर्वेष्ठ वित्त मंत्री के लिए एशिया मनी अवॉर्ड (1993 और 1994) जैसे अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

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