एचएएल बनाएगा अपाचे जैसे बेहतरीन 500 लड़ाकू सैन्‍य हेलिकॉप्‍टर, जानें भारत को होगा कितने का फायदा?

HAL plans to build the finest 500 combat military helicopters like the Apache for all three Indian armies. If the scheme is approved by the government this year, HAL will prepare the first draft by 2023.एचएएल सेना के लिए बनाएगा अपाचे जैसे बेहतरीन 500 लड़ाकू सैन्‍य हेलिकॉप्‍टर, भारत को होगा फायदा

बेंगलुरु। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) तीनों भारतीय सेना के लिए 500 लड़ाकू हेलिकॉप्‍टर बनाने जा रहा हैं। एचएएल ने वर्ष 2027 तक 10 से 12 टन के स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। सरकार से इस योजना को मंजूरी मिलने पर इस सैन्‍य हेलीकॉप्टर का पहला प्रारूप 2023 में तैयार कर लिया जाएगा। जानिए एचएएल जो लड़ाकू सैन्‍य हेलीकॉप्‍टर बनाएगा उसकी खासियत क्या होगी। साथ ही जानें इस महत्वाकांक्षी और सामारिक रूप से अहम परियोजना से भारत को क्या आर्थिक फायदा होगा?

apache

एचएएल के प्रबंध निदेशक आर माधवन के अनुसार ये जिन लड़ाकू हेलिकॉप्‍टर बनाए जाने की योजना हैं वो हेलीकॉप्टर बोइंग के अपाचे की तरह दुनिया के बेहतरीन सैन्य हेलीकॉप्टर के टक्कर देने वाले होगे। एचएएल ने इन लड़ाकू हेलीकॉप्टर की प्रारंभिक डिजाइन तैयार कर ली है और शुरुआती योजना के तहत कम से कम 500 हेलीकॉप्टर बनाने का लक्ष्य है और अगर सरकार इस साल मंजूरी देती है तो हेलीकॉप्टर का पहला प्रारूप 2023 में तैयार कर लिया जाएगा।

आयात में 4 लाख करोड़ रुपये तक की होगी बचत

आयात में 4 लाख करोड़ रुपये तक की होगी बचत

बता दें एलएएल की महत्वाकांक्षा योजना का उद्देश्‍य तीनों भारतीय सेनाओं के लिए करोड़ों रुपये से विदेशों से खरीदे जाने वाले हेलीकॉप्टर के आयात को रोकना है। एचएएल के प्रमुख निदेशक ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद लड़ाकू हेलिकॉप्टरों के आयात में चार लाख करोड़ रुपए तक की कमी लाना है। यानी कि सरकार से अगर एचएएल की इस योजना को हरी झंडी मिल जाती हैं तो आयातित किए जाने वाले हेलिकॉप्‍टरों के आयात पर आने वाले खर्च कम होने से भारत को करोड़ो का लाभ भी होगा।

2023 में तैयार हो जाएगा मॉडल हेलीकॉप्‍टर

2023 में तैयार हो जाएगा मॉडल हेलीकॉप्‍टर

लड़ाकू हेलीकॉप्‍टर की पहला प्रोटोटाइप हेलीकॉप्‍टर 2023 तक तैयार कर लिया जाएगा और 2027 तक 10-12 टन के इन हेलिकॉप्टरों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। माधवन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। इस बड़े प्रोजेक्ट का प्रारंभिक डिजाइन तैयार हो चुकी है। एचएएल की योजना कम से कम 500 हेलिकॉप्टर का निर्माण करने की है।

9,600 करोड़ रुपए खर्च होंगे

9,600 करोड़ रुपए खर्च होंगे

एमआई-17 के बेड़े को रिप्लेस करने के लिए 10 से 12 टन श्रेणी के हेलिकॉप्टर का निर्माण किया जाएगा। इसका निर्माण देश में ही किया जाना है। हेलिकॉप्टर के प्रोटोटाइप के निर्माण और डिजाइन पर 9,600 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अगर हमें 2020 में अनुमति मिल जाती है तो हम पहले हेलिकॉप्टर का निर्माण 2027 तक कर लेंगे।''एक सैन्य विशेषज्ञ ने तेजस सैन्य विमान के विकास के बाद इसे एचएएल का दूसरा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताया।

हेलिकॉप्टर को निर्यात भी किया जाएगा

हेलिकॉप्टर को निर्यात भी किया जाएगा

एचएएल के प्रमुख निदेशक माधवन ने बताया कि एचएएल की एक अहम योजना हैं। यह एक स्वदेशी मंच होगा और करीब 500 हेलीकॉप्टर बनाने की क्षमता होगी। इससे दूसरे देशों से चार लाख करोड़ रुपये के हेलीकॉप्टर आयात करने की जरूरत नहीं होगी। माधवन ने कहा कि इस योजना के तहत हेलिकॉप्टर को निर्यात भी किया जा सकेगा। लड़ाकू हेलीकॉप्‍टरों के निर्यात होने से भारत को आर्थिक लाभ भी हो सकेगा।

हेलीकॉप्टर में खासियतें होंगी बेशुमार

हेलीकॉप्टर में खासियतें होंगी बेशुमार

उन्‍होंने कहा कि हम भारतीय वायुसेना (इंडियन एयर फोर्स) और भारतीय जल सेना (नेवी) के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। 10-12 टन श्रेणी के कैटेगरी में दो बेसिक स्ट्रक्चर होंगे। सेना के लिए बनाए जाने वाले हेलीकॉप्टर का आकार सेना और वायुसेना के लिए बनाए जाने वाले हेलीकॉप्टर से अलग होगा। माधवन ने बताया कि हेलीकॉप्टर में दो इंजन होंगे और पोत पर अपनी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए हेलीकॉप्टर के ब्लेड को मोड़ने की सुविधा होगी! योजना के तहत इन हेलीकॉप्टर की हवाई हमले, परिवहन, लड़ाई के दौरान सामरिक मदद करने, दुश्मनों की तलाश और बचाव कार्यों में भूमिका होगी। हेलीकॉप्टर कई आधुनिक हथियार प्रणाली से लैस होंगे।

2032 तक एमआई-17 को रिप्लेस किए जाने की योजना

2032 तक एमआई-17 को रिप्लेस किए जाने की योजना

बता दें एमआई-17 हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर के बेड़े की रीढ़ माने जाते हैं और वायुसेना के हेलीकॉप्टर बेड़े में एमआई-17 अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें 2032 तक सेवा से हटाकर उन्‍हें रिप्लेस किए जाने की योजना है। एचएएल द्वारा बनाए गए युद्ध हेलिकॉप्टरों में एलसीएच (लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर) और मल्टी-रोल एएलएच (एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर) और चेतक जैसे कई हेलिकॉप्टर शामिल हैं।

एचएएल की तेजस से बड़ी हैं ये योजना

एचएएल की तेजस से बड़ी हैं ये योजना

रक्षा विशेषज्ञ तेजस लड़ाकू विमान के बाद इस योजना को एचएएल को सबसे बड़ी परियोजना बता रहे हैं। बता दें स्वदेशी लड़ाकू विमान का विचार 1970 के दशक में आया था, लेकिन इस पर काम 1980 के दशक में आरंभ हुआ। एचएएल द्वारा देश में ही बनाए गए हल्के लड़ाकू विमान तेजस की विमान ने पहली बार जनवरी, 2001 में उड़ान भरी थी। तेजस पूर्ण तरह से स्‍वदेशी सैन्‍य हेलिकॉप्‍टर था।अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते इस विमान का नाम ‘तेजस' रखा गया था। माधवन ने बताया कि ध्रुव के मंच से हमने हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) को विकसित किया, इसी प्रकार 10-12 टन श्रेणी में बनने वाले हेलीकॉप्टर अपाचे हेलीकॉप्टर के बराबर होंगे। एचएएल ने अब तक हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच), बहुपयोगी एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) और चेतक हेलीकॉप्टर को विकसित किया है।

दुनिया का सबसे बड़ा हथियार,सैन्‍य समानों का आयतक है भारत

दुनिया का सबसे बड़ा हथियार,सैन्‍य समानों का आयतक है भारत

भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार और सैन्य साजो सामान का आयातक है। सरकार रक्षा उत्पादन के स्वेदशीकरण का प्रयास कर रही है और इसके लिए रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को उदार बनाने सहित कई कदम उठा रही है। भारतीय वायुसेना विमान निर्माण कंपनी बोइंग से अरबों डॉलर में 22 अपाचे गार्जियन लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीद रही है। इसके अलावा थल सेना हथियारों से लैस छह अपाचे हेलीकॉप्टर खरीद रही है. इससे जुड़ा समझौता पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे में किया गया।

 लड़ाकू हेलिकॉप्टर सितंबर 2019 में शामिल हुए

लड़ाकू हेलिकॉप्टर सितंबर 2019 में शामिल हुए

बता दें 2015 में भारत-US के बीच हुई डील हुई थी एक लंबे इंतजार के बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में अमेरिका में बने अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर विमान सितंबर 2019 में शामिल हुए। इन हेलीकॉटरों के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से सेना की ताकत अब कई गुना बढ़ चुकी है। विगत सितंबर माह में वायुसेना में 8 अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल हुए, इस डील के मुताबिक कुल 22 विमान 2020 तक वायुसेना को मिलने वाले हैं। सितंबर, 2015 में भारतीय वायुसेना ने बोइंग और अमेरिकी सरकार के साथ 3 बिलियन डॉलर की डील की थी, जिसमें 22 अपाचे लड़ाकू विमान और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर लेने की डील हुई थी। चिनूक हेलिकॉप्टर की पहली खेप भी 2019 की शुरुआत में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे।

दुनिया का पसंदीदा 'अपाचे' लड़ाकू विमान बनाकर भारत होगा मालामाल

दुनिया का पसंदीदा 'अपाचे' लड़ाकू विमान बनाकर भारत होगा मालामाल

'अपाचे' से पहले भारतीय वायुसेना के पास ध्रुव, चेतक, चीता,एमआई-8,एमआई-17,एमआई-26,एमआई-25/35,एचएएल लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर,एचएएल रुद्रा आदि मौजूद थे। सेना में शामिल हुए अपाचे हेलिकॉप्टर लगातार चार से पांच घंटे तक ऑपरेशन में शामिल हो सकता है। इसके जरिए करीब 14 मिसाइलों को एक साथ दागा जा सकता है। Apache AH-64e दुनिया का सबसे एडवांस्ड मल्टीरोल कंबैट हेलीकॉप्टर है। अपाचे हेलिकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इस हेलिकॉप्टर में 30 एमएम की दो गन भी लगाई जा सकती है। हेलीकॉप्टर में सटीक मार करने और जमीन से उत्पन्न खतरों के बीच प्रतिकूल हवाईक्षेत्र में ऑपरेशन की क्षमता है। इसमें ऐसे सेंसर लगे हैं जिनसे से ये रात में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना समेत कई अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बलों द्वारा किया जाता है।अपाचे हेलिकॉप्टर 300 किमी प्रति घंटा उड़ सकता है। अपाचे ने 30 सितंबर 1975 को पहली उड़ान भरी थी। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि एचएएल इस योजना में कामयाब हो जाता हैं तो विदेशों से सैन्‍य हेलिकॉप्‍टर आयात करने वाला भारत दुनिया भर में इसका निर्यातक बन सकेगा।

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