हाजीपुर लोकसभा सीट चाचा-भतीजे के कलह का बनेगा गवाह, चिराग और पशुपति होंगे आमने-सामने!
Chirag Paswan VS Pashupati Kumar Paras: लोकसभा चुनाव-2024 में इस बार बिहार के हाजीपुर लोकसभा सीट की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सीट पर 'चाचा' RLJP अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस और 'भतीजा' LJP प्रमुख चिराग पासवान आमने-सामने हो सकते हैं।
पशुपति कुमार पारस ने 19 मार्च को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद ये कहा जा रहा है, पशुपति कुमार पारस आरजेडी से गठबंधन कर सकते हैं। पशुपति पारस ने पहले ही कह दिया है कि वो हर हाल में हाजीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं दूसरी ओर एनडीए में ये सीट चिराग पासवान को मिली है।

पशुपति पारस बोले- 'मेरे साथ हुई नाइंसाफी'
पशुपति कुमार पारस केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि, 'एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) ने बिहार लोकसभा के लिए 40 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। हमारी पार्टी के पांच सांसद थे और मैंने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया...हमारे और हमारी पार्टी के साथ नाइंसाफी हुई है...इसलिए, मैं केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देता हूं।''

बता दें कि बीजेपी की अगुआई वाला गठबंधन एनडीए ने बिहार में 40 लोकसभा सीटों में 17 पर बीजेपी, 16 पर जेडीयू, और 5 सीटों पर चिराग पासवान की एलजेपी को टिकट दिया है।
एक-एक सीट जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को दिया गया है। इस गठबंधन में इस रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस के हिस्से में कुछ नहीं आया है। जिससे वो नाराज हैं।
Hajipur lok sabha: इस बार चाचा vs भतीजे में हो सकता है दिलचस्प मुकाबला!
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पशुपति पारस आरजेडी के साथ हाथ मिला सकते हैं। हाजीपुर से वर्तमान सांसद पशुपति पारस ने अपनी दावेदारी पर कहा है कि, वह हाजीपुर से चुनाव लड़ेंगे। हाजीपुर सीट हमेशा से पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच विवाद का विषय रहा है।

वहीं चिराग पासवान ने संकेत दिया था कि उनकी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ेगी, यह कहते हुए कि भाजपा ने उनकी सभी चिंताओं का समाधान कर दिया है।
बता दें कि हाजीपुर लोकसभा सीट रामविलास पासवान का गढ़ माना जाता है। रामविलास पासवान हाजीपुर सीट से 1977 से 1980, 1989, 1996 से 2004 और 2014 तक सांसद रहे हैं। हाजीपुर सीट से 2019 के चुनाव में पशुपति पारस ने चुनाव लड़ा था।
8 अक्टूबर 2020 को रामविलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी दो भागों में बंट गई थी। उनके भाई पारस राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) और उनके बेटे चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) का नेतृत्व करते हैं।












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