हादिया बोलीं- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश, अदालत से जो मांगा वो मिला
नई दिल्ली। केरल में मुस्लिम धर्म अपना कर शादी करने वाली हादिया ने उसकी शादी को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हादिया ने कहा, ' मैं दो बातों के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। पहली ये कि मैं मुस्लिम बने रहना चाहती हूं और दूसरी ये कि मैं अपने पति के साथ रहना चाहती हूं। कोर्ट ने मेरी दोनों बातों को माना इसके लिए मैं खुश हूं क्योंकि अदालत ने मुझे जीने की आजादी दी है। हादिया की शादी को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसल सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था हाईकोर्ट का फैसला
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने केरल निवासी 26 साल की हादिया के मामले में केरल हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए हदिया शकील की शादी को वैध करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें सब इस शादी की अवैध करार दिया था। एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए अदालतन ने कहा कि हादिया को अपना जीवन आजादी से जीने का हक है और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अपनी जांच आगे जारी रखेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले की तथ्यों और परिस्थितियों में, हाईकोर्ट शादी को रद्द नहीं कर सकता।

हादिया के पिता ने लगाए थे गंभीर आरोप
हादिया के पिता अशोक के एम ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित कर दिया गया और वो सीरिया जाना चाहती थी। उन्होंने 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में यह आरोप दोहराया है। आपको बता दें कि पिछले साल केरल की एक अखिला नाम की लड़की ने मुस्लिम धर्म अपनाकर निकाह कर लिया था। जिसके बाद लड़की के पिता ने इस मामले की कोर्ट में गुहार लगाई थी।

केरल हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थी शादी
लड़की के पिता की अर्जी पर केरल हाईकोर्ट ने इस शादी को रद्द कर दिया था। हादिया के पति शफी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल नवंबर में हादिया को तमिलनाडु के सलेम स्थित होम्योपैथिक कॉलेज में अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति दी थी। अभी तक इस मामले में 30 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।












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