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अमेरिका की H-1B visa Policy का असर, भारत में NRI दूल्हों की डिमांड में आई भारी गिरावट

H-1B visa impact India: अमेरिका में बदले हुए इमिग्रेशन नियमों (US Immigration Policy) का असर सिर्फ नौकरियों या करियर तक सीमित नहीं रहा - अब इसका असर भारतीय समाज और पारिवारिक रिश्तों, खासकर शादी-ब्याह के रिश्तों तक पहुंच गया है।

एक समय था जब अमेरिका में काम करने वाला NRI हर माता-पिता की पहली पसंद होता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब भारत के कई परिवार अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीय नागरिकों से अपनी बेटियों की शादी करने से झिझक रहे हैं।

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वजह है - वीजा से जुड़ी अनिश्चितता और ट्रंप सरकार की नई सख्त नीतियां, जिनसे न सिर्फ नौकरी बल्कि वहां स्थायी बसने की संभावना भी प्रभावित हुई है।

🇺🇸 कभी 'ड्रीम ग्रूम', अब 'रिस्क फैक्टर'

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में फिलहाल करीब 21 लाख भारतीय मूल के नागरिक (NRI) रह रहे हैं। कभी ये भारतीय समाज में सबसे ज्यादा डिमांड वाले दूल्हे माने जाते थे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B वीजा पॉलिसी ने तस्वीर पलट दी है।

हरियाणा की 19 वर्षीय मेडिकल छात्रा सिद्धि शर्मा ने हाल ही में एक एनआरआई से शादी की योजना रद्द कर दी। उन्होंने रॉयटर्स से कहा -"मैंने हमेशा सपना देखा था कि शादी के बाद अमेरिका में बस जाऊंगी, लेकिन अब ट्रंप ने मेरे लिए वह दरवाजा बंद कर दिया है।"

रिपोर्टस की मानें तो पिछले कई सालों तक NRI दूल्हों की बहुत डिमांड थी, लेकिन अब वह क्रेज खत्म हो गया है। खासकर ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद पिछले छह महीनों में ये बदलाव ज्यादा दिखा है। पहले जहां अमेरिका में काम करने वाला दूल्हा 'स्टेटस सिंबल' माना जाता था, अब वहीं परिवार वीजा रद्द होने या इमिग्रेशन रोक जैसी खबरों से डरने लगे हैं।

मैट्रिमोनी ऐप्स पर आया 'US Visa Filter'

प्रभाव इतना गहरा है कि अब मैट्रिमोनी ऐप्स ने भी अपने प्लेटफॉर्म पर 'US Visa Filter' जोड़ दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में प्रीमियम मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म Knot.dating के को-फाउंडर और CEO जसवीर सिंह बताते हैं -अब शादी के रिश्तों में वीजा स्टेटस 'डील मेकर या डील ब्रेकर' बन गया है। हमने अपने ऐप में वीजा के आधार पर फिल्टर जोड़ा है।

मैरिज प्लेटफॉर्म पर लगभग 1000 एनआरआई रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 60% H-1B वीजा पर और 40% ग्रीन कार्ड होल्डर हैं। दक्षिण भारत के परिवार अब भी एनआरआई रिश्तों को तरजीह देते हैं, लेकिन वीजा स्टेटस की जांच अब अनिवार्य हो गई है।

छात्र भी झेल रहे हैं वीजा संकट

ट्रंप प्रशासन की सख्ती से भारतीय छात्रों को भी झटका लगा है। भारतीय पत्रकार कौशिक राज, जिन्हें कोलंबिया यूनिवर्सिटी में 1 लाख डॉलर (₹89 लाख) की स्कॉलरशिप मिली थी, उनका वीजा रिजेक्ट कर दिया गया।

कौशिक ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने सत्ता संभालते ही अमेरिकी दूतावासों को नए स्टूडेंट इंटरव्यू शेड्यूल न करने का आदेश दिया था। हालांकि एक महीने बाद प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन छात्रों के वीजा आवेदन में भारी गिरावट दर्ज की गई। इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में भारत से अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या 50% घट गई, जबकि कुल अमेरिकी स्टूडेंट आगमन में 19% की गिरावट आई।

अब नजर कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप पर

अमेरिका की वीजा सख्ती ने न सिर्फ शादी के सपने बल्कि शैक्षणिक योजनाएं भी बदल दी हैं। अब भारतीय परिवारों की नजर कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप और मिडल ईस्ट की ओर है - जहां वीजा नियम अपेक्षाकृत स्थिर हैं।

अमेरिका में बदली वीजा नीति ने भारतीय समाज में गहरा असर छोड़ा है। जहां एक समय एनआरआई दूल्हे को 'परफेक्ट मैच' माना जाता था, वहीं अब वही रिश्ता जोखिम भरा सौदा माना जा रहा है। चाहे शादी हो या पढ़ाई - ट्रंप प्रशासन की सख्त पॉलिसी ने भारतीय परिवारों की सोच और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है।

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